बारिश का कहर! दिल्ली के 157 साल पुराने लोहे के पुल पर संकट, ब्रिटिश काल में हुआ था तैयार, लागत इतने पौंड
दिल्ली में बना ब्रिटिश शासन काल का लोहे का पुल कई पीढ़ियों का गवाह है। यह पुल कोलकाता को दिल्ली से जोड़ने के लिए ब्रिटिश इंडियन रेलवे ने तैयार किया था।
इस बार मानसून में बादल कहर बनकर बरस रहे हैं। देश भर में हाहाकार मचा है। कहीं सड़के तालाब तो कहीं हाईवे तहस-नहस नजर आ रहे हैं। मूसलाधार बारिश से नदियां उफान पर है। मकान ढहते नजर आ रहे हैं। ऐसे में दिल्ली की 157 साल की कई पीढ़ियों का गवाह रहा यमुना ब्रिज या लोहे का पुल खतरे में है। ब्रिटिश शासन काल में बनकर तैयार हुए इस पुल की दिल्ली एहसान मंद रही है। इस पुल ने कई मौसम, तूफान, बारिश, बाढ़ देखी।
लेकिन, अपनी छांव में बस, कार, स्कूटर, टांगों या फिर किसी अन्य वाहन को अपने गंतव्य तक पहुंचाया। लोहे का पुराना पुल, यमुना पुल, दिल्ली का लैंडमार्क किसी भी नाम से पुकारा जाए। दिल्लीवासियों के जहन में इसकी यादें गहरी हैं। लेकिन, लगातार हो रही मानसून की मूसलाधार बारिश ने दिल्ली में 25 साल का रिकॉर्ड टूट चुका है। ऐसे में यमुना के जलस्तर में तेजी से इजाफा हो रहा है। इसके चलते दिल्ली के पुराने लोहे के पुल के पास यमुना खतरे के निशान के करीब पहुंच चुकी है। अब इस पुल पर संकट मंडरा रहा है। आइए पलटते हैं इस पुल के इतिहास के पन्नों को ...

ब्रिटिश काल में 16,16,335 पौंड से हुआ तैयार
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोलकाता को दिल्ली से जोड़ने के लिए ब्रिटिश शासन काल 1866 में यमुना नदी पर ईस्ट इंडिया रेलवे की ओर से सिंगल लाइन पुल का निर्माण किया गया। इसमें 3500 टन लोहे का इस्तेमाल किया गया। पुल 12 विशाल स्तंभों पर खड़ा रहा। पुल को तैयार करने में करीब 16,16,335 पौंड(1 पौंड= 102 रु. इंडियन करेंसी) की लागत आई। 1913 में डबल लाइन का निर्माण किया गया। इसके लिए 14,24,900 पौंड की लागत आई। साल 2011 में 200 टन से अधिक लोहा बदला गया।
जानें पुल की कुछ खास बातें
- 3500 टन लोहे से पुल का निर्माण
- 12 विशाल स्तंभों पर खड़ा
- पुल की कुल लंबाई 700 मीटर
- पुल के दोनों छोरों पर सुरक्षाकर्मी के लिए एक कमरा
क्यों मंडरा रहा पुल पर खतरा?
आपको बता दें कि केंद्रीय जल आयोग (CWC) के मुताबिक, यमुना का जल स्तर 203.18 मीटर था। चेतावनी स्तर 204.5 मीटर है, जो कि मंगलवार यानी 11 जुलाई को 205.33 मीटर को पार करने की संभावना है। ऐसे में संभावना है कि अगर बाढ़ की स्थिति पैदा हुई तो लोहे का पुराना जलमग्न नजर आ सकता है।












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