HC का आदेश- CM केजरीवाल की सुरक्षा के मामले में सार्वजनिक नहीं होगी स्टेटस रिपोर्ट
नई दिल्ली, 30 मई: मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के घर हुई तोड़फोड़ के मामले में सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने केजरीवाल के आवास पर सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में दायर की गई स्टेटस रिपोर्ट को सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया। इसे सिर्फ सीलबंद लिफाफे में मुख्यमंत्री सचिवालय के समक्ष रखा जाएगा। वहीं याचिकाकर्ता और आम आदमी पार्टी के विधायक सौरभ भारद्वाज ने इसे अपने साथ साझा करने की मांग की थी, जिसे भी खारिज कर दिया गया।

मामले में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और जस्टिस सचिन दत्ता की पीठ ने कहा कि ये स्टेटस रिपोर्ट मुख्यमंत्री की सुरक्षा से संबंधित है, इसलिए वो चाहते हैं कि ये जनता के सामने ना आए। इसके अलावा वो सुरक्षा पहलुओं के चलते इसे याचिकाकर्ता के साथ भी साझा नहीं करना चाहते हैं। वहीं पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) संजय जैन के विभागीय जांच से संबंधित रिपोर्ट के एक निश्चित हिस्से को संशोधित करने के अनुरोध को भी खारिज कर दिया।
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खंडपीठ ने कहा कि सुरक्षा में चूक का मुद्दा काफी गंभीर है। चूक के बारे में कोई भी इनकार नहीं कर सकता। ऐसी खामियां थीं जिन्हें हमने खुद देखा है, इसलिए अनुशासनात्मक कार्रवाई का मुद्दा भी उठना चाहिए। आप कुछ भी सुधार नहीं करेंगे। वहीं सुनवाई के दौरान डीसीपी नार्थ ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जो 14 दिनों तक हिरासत में रहे, लेकिन बाद में उन्हें कोर्ट से जमानत मिल गई। उन्होंने कोर्ट को ये भी बताया कि 20 अन्य को नोटिस जारी किया गया है। पुलिस जल्द ही इस मामले में चार्जशीट दाखिल करेगी।
अब सभा या प्रदर्शन की अनुमति नहीं
अदालत के समक्ष रखी गई अपनी ताजा स्थिति रिपोर्ट में पुलिस ने मुख्यमंत्री आवास के आसपास सुरक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए उठाए गए कदमों और चूक के लिए जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई का ब्योरा दिया। रिपोर्ट में कहा गया कि सड़क के दोनों ओर दो गेट लगाने पर सहमति बन गई है। इसके अलावा सिविल लाइंस मेट्रो स्टेशन के पास किसी भी सभा या विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जाएगी।












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