दिल्ली के CM को विज्ञापन देने का शौक है, हम तो उन्हें एक बूंद भी कम पानी नहीं दे रहे: खट्टर
नई दिल्ली, जुलाई 14: जल-संकट से जूझती देश की राजधानी दिल्ली की सरकार के आरोपों पर हरियाणा के मुख्यमंत्री ने पलटवार किया है। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने दिल्ली के हिस्से का पानी नहीं देने के आरोप पर कहा है कि, हरियाणा सरकार पूरा पानी दे रही है। खट्टर ने अरविंद केजरीवाल को निशाने पर लेते हुए कहा कि, 'दिल्ली के मुख्यमंत्री (केजरीवाल) को अपने विज्ञापन देने का शौक है। अब वहां लोगों को पानी नहीं मिल रहा तो हरियाणा पर दोष मढ़ रहे हैं। मैं बता रहा हूं कि, सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार जितना पानी दिल्ली को देना है, उतना पानी हम दे रहे हैं।"
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न्यूज एजेंसी के हवाले से मनोहर लाल खट्टर ने यह भी कहा कि, वे दिल्ली के लिए एक बूंद कम पानी नहीं दे रहे, बल्कि पूरा पानी दे रहे हैं।' वहीं, दिल्ली सरकार कई महीनों से यह कहती रही है कि, दिल्ली को उसकी जरूरत का पानी नहीं पहुंचने दिया जा रहा। दिल्ली के कई इलाकों में जारी पानी की किल्लत के लिए दिल्ली सरकार ने हरियाणा की भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। इसी क्रम में, दिल्ली सरकार के जल बोर्ड ने इस मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष उठाया। जहां दिल्ली जल बोर्ड ने कहा कि, भरी गर्मी में हरियाणा ने दिल्ली के हिस्से का पानी राेक रखा है। हरियाणा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दिल्ली जल बोर्ड ने मांग की कि, यमुना नदी में दिल्ली के हिस्से का पूरा पानी छुड़वाया जाए।
दिल्ली सरकार के आप विधायक व दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष राघव चड्ढा ने आरोप लगाया कि, कोरोना महामारी और भीषण गर्मी के बीच हरियाणा सरकार द्वारा यमुना में पानी की आपूर्ति कम कर दी गई है। राघव ने पिछले दिनों कहा कि, दिल्ली के पानी का हिस्सा रोक दिया गया है। ऐसे में दिल्ली जल बोर्ड वर्ष 1995 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले ही निर्धारित दिल्ली के वैध हिस्से की आपूर्ति की मांग के लिए हरियाणा सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है। दिल्ली जल बोर्ड की ओर से 1,150 एमजीडी जल आपूर्ति की मांग की गई, वहीं अभी 945 एमजीडी पानी की आपूर्ति की जा रही है। चड्ढा के मुताबिक, हरियाणा द्वारा यमुना में छोड़ा जा रहा पानी 'अब तक के सबसे निचले स्तर' पर है।












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