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GNCTD Transfer posting: SC के आदेश के खिलाफ मोदी सरकार के अध्यादेश को AAP ने असंवैधानिक बताया

GNCTD Transfer posting के मुद्दे पर आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार और दिल्ली के उपराज्यपाल के बीच तकरार अक्सर सुर्खियों में रही है। अब एक बार फिर केंद्र सरकार ने कहा है कि उपराज्यपाल का फैसला ही अंतिम होगा।

GNCTD Transfer posting

GNCTD Transfer posting यानी दिल्ली में अधिकारियों की नियुक्ति या तबादलों का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है। सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के आदेश के बाद माना जा रहा था कि इस मुद्दे पर कन्फ्यूजन दूर हो चुका है, लेकिन SC के आदेश के खिलाफ मोदी सरकार अध्यादेश लाई है।

दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार (AAP) सरकार ने कानून मंत्रालय के अध्यादेश को असंवैधानिक बताया है। सीएम अरविंद केजरीवाल की सरकार में मंत्री सौरभ भारद्वाज ने कहा, ये बचपन की लड़ाई जैसा हाल है जहां हारने के बाद गली क्रिकेट में बैट-बॉल का मालिक खेलने से इनकार कर देता था।

8 दिन में पलट दिया SC का आदेश

खास बात ये कि ये मामला कई दिनों से चर्चा में है। सुप्रीम कोर्ट का आदेश विगत 11 मई को पारित हुआ। ठीक 8 दिन बाद 19 मई की रात करीब 11 बजे समाचार एजेंसी ANI ने अध्यादेश की खबर दी।

इससे करीब 6.30 घंटे पहले, शाम लगभग 5 बजे खुद सीएम केजरीवाल ने ट्वीट कर सवाल किया था। रात 8.10 बजे ट्वीट वीडियो में उन्होंने कहा, मीडिया में ऐसी अटकलें हैं कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश को बेमानी साबित करने के लिए केंद्र सरकार अध्यादेश का सहारा लेगी।

केजरीवाल ने कहा था, उन्हें उम्मीद है कि अध्यादेश वाली बातें कोरी अफवाह निकलेंगी, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सबको सम्मान करना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से भी चुनी हुई सरकार के फैसलों का सम्मान करने की अपील की।

AAP नेताओं की प्रतिक्रियाएं देखिए, नीचे--

आम आदमी पार्टी ने शुक्रवार देर रात 'स्थानांतरण पोस्टिंग, सतर्कता और अन्य प्रासंगिक मामलों' के संबंध में अधिसूचित नियमों पर सख्त ऐतराज जताया। अध्यादेश के गजट नोटिफिकेशन के लिए केंद्र पर जमकर निशाना साधते हुए AAP ने इसे "बेईमानी और विश्वासघात" करार दिया।

दिल्ली की शिक्षा मंत्री आतिशी ने कहा, "केंद्र द्वारा लाया गया अध्यादेश AAP सरकार को सेवाओं पर नियंत्रण देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ है। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया था कि एक निर्वाचित सरकार के पास निर्णय लेने की शक्ति होनी चाहिए। इसे लोकतंत्र कहा जाता है।

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    उन्होंने कहा, अध्यादेश इसलिए पारित किया गया है क्योंकि केंद्र सरकार सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से AAP को मिलने वाले अधिकार से डरी हुई है। उन्होंने कहा, अध्यादेश कहता है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल दिल्ली सरकार नहीं चलाएंगे। इसे केंद्र चलाएगा।

    यह स्पष्ट है कि केंद्र सरकार आम आदमी पार्टी सरकार से डरती है। दिल्ली सरकार में मंत्री सौरभ भारद्वाज ने भी अध्यादेश को "बेईमानी और विश्वासघात" बताते हुए कहा कि दिल्ली की जनता ने तीन बार अरविंद केजरीवाल को चुना। आज केंद्र कह रहा है कि ऐसे नेता के पास कोई शक्ति नहीं है।

    उन्होंने कहा, केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले, भारतीय संविधान के साथ-साथ दिल्ली की जनता को विश्वासघात बताते हुए दिल्ली के आप नेता ने कहा, "उपराज्यपाल जिन्हें निर्वाचित नहीं किया गया है, बल्कि दिल्ली के लोगों पर थोपा गया है। उन्हें पोस्टिंग और ट्रांसफर की शक्तियां प्रदान की जा रही हैं। अध्यादेश सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अनादर है।"

    इस बीच, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अध्यादेश को न केवल खराब बताया, उन्होंने, इसे गरीब, धूर्त और हारे हुए व्यक्ति का कार्य" करार दिया। उन्होंने कहा, "नए अध्यादेश की बारीकी से जांच की जानी चाहिए।

    नीचे देखिए कानून मंत्रालय का 10 पन्नों का पूरा अध्यादेश--

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