Gargi College Controversy: ‘फोर्स एंट्री’ से मचा बवाल, DUSU प्रेसिडेंट पर सवाल, विमन सेफ्टी क्यों बनी मुद्दा?

Gargi College Controversy: दिल्ली यूनिवर्सिटी की राजनीति एक बार फिर विवादों में है। ऑल-वुमन कॉलेज गार्गी कॉलेज में जबरन एंट्री के आरोपों ने माहौल गर्म कर दिया है। मामला दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) के अध्यक्ष आर्यन मान और एबीवीपी (ABVP) के कार्यकर्ताओं से जुड़ा है, जिन पर कॉलेज कैंपस में जबरदस्ती घुसने का आरोप लगा है।

इस घटना ने न सिर्फ छात्र राजनीति बल्कि महिला कॉलेजों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी इस मुद्दे पर घेराबंदी करते हुए एबीवीपी के 'संस्कारों' पर सवाल उठाए हैं। आइए समझते हैं कि आखिर उस दिन गार्गी कॉलेज में क्या हुआ था और इस विवाद की असली जड़ क्या है।

Gargi College Controversy

आखिर क्यों मचा गार्गी में बवाल? (Why Gargi College is in Uproar)

पूरा मामला 17 अप्रैल 2026 को हुए छात्र परिषद के चुनावों से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि मतदान के दौरान एक निर्दलीय उम्मीदवार ने डूसू अध्यक्ष को फोन कर शिकायत की थी कि उसके साथ भेदभाव हो रहा है और चुनावी प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं है।

इस शिकायत के बाद डूसू अध्यक्ष आर्यन मान अपने समर्थकों के साथ कॉलेज पहुंचे। गार्गी एक महिला कॉलेज है, जहां पुरुष आगंतुकों के प्रवेश के कड़े नियम हैं। गार्ड्स ने जब उन्हें रोकने की कोशिश की, तो आरोप है कि वे धक्का-मुक्की करते हुए जबरन कैंपस के अंदर घुस गए। कॉलेज की छात्राओं का कहना है कि उनकी बॉडी लैंग्वेज और बात करने का तरीका काफी आक्रामक और डराने वाला था।

छात्राओं की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल:ABVP की सफाई

रिपोर्ट के मुताबिक गार्गी कॉलेज की छात्राओं ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उनका कॉलेज डूसू की राजनीति से बाहर रहता है, ऐसे में डूसू अध्यक्ष का वहां हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है। छात्राओं ने एबीवीपी के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की।

दूसरी तरफ, एबीवीपी के दिल्ली प्रदेश मंत्री सार्थक शर्मा का कहना है कि यह केवल एक विरोध प्रदर्शन था। उनके मुताबिक, एक छात्रा ने भेदभाव की शिकायत की थी, इसलिए वे वहां गए थे। एबीवीपी का यह भी आरोप है कि कॉलेज के एक गैर-शिक्षण कर्मचारी ने उनके कार्यकर्ताओं के साथ बदसलूकी की, जिसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

पुलिस और प्रशासन का रुख

कैंपस में तनाव बढ़ता देख वहां तैनात पुलिसकर्मियों ने मोर्चा संभाला और आर्यन मान व उनके साथियों को कैंपस से बाहर निकाला। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि चुनाव की वजह से पुलिस पहले से मौजूद थी, इसलिए स्थिति को तुरंत नियंत्रण में ले लिया गया।

पुलिस के मुताबिक फिलहाल कोई लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है और चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गए हैं। हालांकि, कॉलेज प्रशासन की ओर से अब तक इस संवेदनशील मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, जिससे छात्राएं और उनके अभिभावक असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

महिला सुरक्षा फिर बहस के केंद्र में

गार्गी कॉलेज जैसे ऑल-वुमन संस्थान में इस तरह की घटना ने सुरक्षा को लेकर बहस तेज कर दी है। यह सवाल उठ रहा है कि क्या महिला कॉलेजों में सुरक्षा नियमों को और सख्त करने की जरूरत है? साथ ही यह भी चर्चा है कि छात्र राजनीति किस हद तक कैंपस के माहौल को प्रभावित कर रही है।

इस घटना ने दिल्ली की राजनीति में भी उबाल ला दिया है। विरोधी दलों ने इसे महिला सुरक्षा से जोड़ते हुए केंद्र सरकार और एबीवीपी को निशाने पर लिया है। यह पहली बार नहीं है जब गार्गी कॉलेज में बाहरी लोगों के घुसने पर विवाद हुआ हो, इससे पहले भी फेस्ट के दौरान ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। अब सवाल यह उठता है कि क्या राजनीति के नाम पर महिला कॉलेजों की मर्यादा और छात्राओं की निजता का उल्लंघन करना सही है? गार्गी की छात्राएं अब इस मामले में कड़ी कार्रवाई और भविष्य के लिए ठोस सुरक्षा गारंटी की मांग कर रही हैं।

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