शराब नीति केस में सुप्रीम कोर्ट अरविंद केजरीवाल को दे सकती है जमानत लेकिन रख दी ये शर्त

दिल्‍ली शराब नीति से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में तिहाड़ जेल में बंद अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी को चुनौती देने और दिल्‍ली सीएम की अंतरिम जमानत वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई की।

सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा चुनाव 2024 के मद्देनजर केजरीवाल को बड़ी राहत देते हुए मंगलवार को उन्हें अंतरिम जमानत देने पर विचार किया। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल की अंतरिम जमानत पर कोई आदेश नहीं दिया सुप्रीम कोर्ट अब 9 मई को इस याचिका पर सुनवाई कर सकती है।

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बता दें केजरीवाल के वकील सिंघवी जब दलील पेश कर रहे थे तभी सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की बेंच ने सिंघवी के सामने एक बड़ी शर्त रख दी।

केजरीवाल के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दिल्‍ली सीएम को अंतरिम जमानत देने की मांग करते हुए कोर्ट में कई दलीलें दी। उन्‍होंने कहा लोकसभा चुनाव के दौरान अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी को पार्टी के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है जो अपने शीर्ष नेता के बिना चुनाव के दौरान प्रचार करने के लिए संघर्ष कर रही है।

दो जस्टिस की बेंच ने आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल से कहा अगर जेल में बंद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत पर रिहा किया जाता है तो उन्हें आधिकारिक कामकाज करने की अनुमति नहीं होगी।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस ने सुनवाई करते हुए पूछा क्‍या अंतरिम ज़मानत मिलने पर क्या आप कार्यालय भी जाएंगे?कोर्ट ने कहा अगर आपको छोड़ा जाता है तो ऑफिस जाना ठीक नहीं होगा। तब आप आधिकारिक कार्य नहीं करेंगे।

इस सवाल पर केजरीवाल की ओर से उनके वकील ने कहा 'मैं आबकारी नीति पर कोई काम नहीं करूंगा। जिस पर कोर्ट ने पूछा कि अगर आप दफ़्तर जाते हैं तो ठीक नहीं होगा? इस पर सिंघवी ने कहा कि एक मुख्‍यमंत्री के तौर पर इसमें दिक्कत नहीं होनी चाहिए।

मुख्‍यमंत्री ने वकील सिंघवी ने कहा उनके पास अगर कोई मंत्रालय नही है तो क्या वो पद संवैधानिक हो गया? एलजी ने भी मान्यता दी है। उन्‍होंने बताया दो हफ्ते पहले उपरात्‍यपाल ने ही फाइल वापस कर दी क्‍योंकि मुख्‍यमंत्री के हस्‍ताक्षर नहीं थे।

सिंघवी ने कहा केजरीवाल किसी भी फाइल पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे इस शर्त के साथ कि उपराज्‍यपाल किसी आधार पर कोई काम नहीं रोकेंगे कि मैंने किसी फाइल पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से यह कहते हुए सुनवाई के लिए तैयार रहने का आग्रह किया कि "हम अनुदान दे सकते हैं या नहीं दे सकते हैं। लेकिन हमें आपके प्रति खुला रहना चाहिए क्योंकि किसी भी पक्ष को आश्चर्य नहीं होना चाहिए।"

अदालत ने आप सुप्रीमो के लिए जमानत की संभावना के खिलाफ दोनों पक्षों को आगाह किया और प्रवर्तन निदेशालय को संभावित जमानत शर्तों का आकलन करने का निर्देश दिया। इसके अतिरिक्त, अदालत ने ईडी से इस बात पर विचार करने को कहा कि क्या केजरीवाल को मुख्यमंत्री के रूप में अपने पद को देखते हुए किसी भी फाइल पर हस्ताक्षर करना जारी रखना चाहिए।

बता दें केजरीवाल को 21 मार्च को गिरफ्तार किया गया था और फिलहाल वह न्यायिक हिरासत के तहत तिहाड़ जेल में बंद हैं। शीर्ष अदालत ने 15 अप्रैल को ईडी को नोटिस जारी किया था और अपनी गिरफ्तारी के खिलाफ केजरीवाल की याचिका पर उससे जवाब मांगा था।

बता दें 2021-22 के लिए दिल्ली सरकार की अब समाप्त हो चुकी उत्पाद शुल्क नीति के निर्माण और कार्यान्वयन में कथित भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित है।

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