Delhi Zoo Tiger cubs के जन्म से उत्साहित, 18 साल बाद आए नन्हे गोल्डन रॉयल बंगाल टाइगर
वन्यजीवों के लिहाज से भी हिंदुस्तान बेहद समृद्ध है। कई दुर्लभ जीवों का घर भारत चिड़ियाघर में भी जानवरों की पर्याप्त केयर करता है। इसी का नतीजा है, 18 साल बाद Delhi Zoo में गोल्डन रॉयल बंगाल टाइगर का जन्म।

18 साल बाद Delhi Zoo Tiger cub का वेलकम कर बेहद एक्साइटेड है। खास बात ये है कि 18 साल बाद दिल्ली के चिड़ियाघर में 'गोल्डन' रॉयल बंगाल टाइगर शावकों का जन्म हुआ है। अधिकारियों ने कहा, अभी दोनों रॉयल बंगाल टाइगर शावकों का नामकरण बाकी है।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार चिड़ियाघर की अधिकारी ने बताया, पिछली बार 16 जनवरी, 2005 को चिड़ियाघर में एक रॉयल बंगाल टाइगर शावक का जन्म हुआ था।
विगत 4 मई को बाघिन सिद्धि ने पांच बाघ शावकों को जन्म दिया था, लेकिन तीन मृत पैदा हुए थे। दिल्ली चिड़ियाघर की निदेशक आकांक्षा महाजन के अनुसार, 16 जनवरी, 2005 के बाद पहली बार चिड़ियाघर में 'सुनहरी' नाम की बाघि ने रॉयल बंगाल बाघिन शावकों को जन्म दिया है।
अधिकारी दोनों शावकों की निगरानी कर रहे हैं। शावकों की सेहत का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। एक बार जब सभी टीकाकरण पूरे हो जाएंगे और थोड़े बड़े होने पर इन्हें वन्यजीव प्रेमियों के लिए बाड़े में छोड़ दिया जाएगा।
दिल्ली जू में शावकों के जन्म पर इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, जू की डायरेक्टर आकांक्षा महाजन ने बताया, बाघिन सिद्धि नागपुर के गोरेवाड़ा चिड़ियाघर की है, जबकि शावकों का पिता बाघ करण मैसूर चिड़ियाघर का है।
उन्होंने कहा, "बाघिन जंगल में पैदा हुई थी और बाघ चिड़ियाघर में पैदा हुआ था।" बाघिन की उम्र छह साल और बाघ की उम्र करीब 10 साल है। महाजन की तरफ से जारी नोट के अनुसार, बाघिन दो शावकों की देखभाल कर रही है।
सीसीटीवी कैमरों से शावकों और बाघिन पर नजर रखी जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, महाजन ने कहा "दिल्ली चिड़ियाघर रॉयल बंगाल टाइगर के संरक्षण प्रजनन में भाग लेने वाले चिड़ियाघरों में से एक है। यह एक अच्छा संकेत है कि बाघिन शावकों को जन्म दे रही है।"
चिड़ियाघर में चार वयस्क 'गोल्डन' रॉयल बंगाल टाइगर हैं। इनके नाम करण, सिद्धि, अदिति और बरखा रखे गए हैं। जू अधिकारियों के अनुसार, दो बाघिन- सिद्धि और अदिति जंगली मूल की हैं। इन्हें नागपुर के गोरेवाड़ा चिड़ियाघर से दिल्ली लाया गया था।
पिछले साल अगस्त में सात साल के अंतराल के बाद दिल्ली के चिड़ियाघर में सफेद बाघ के तीन शावकों का जन्म हुआ था। एक शावक की दिसंबर में मौत हो गई थी, जबकि अवनी और व्योम नाम के अन्य दो शावकों को पिछले महीने सार्वजनिक रूप से बाड़े में छोड़ दिया गया।
शावकों सहित अब छह 'गोल्डन' रॉयल बंगाल टाइगर के अलावा, दिल्ली चिड़ियाघर में पांच सफेद बाघ हैं। इसी के साथ दिल्ली चिड़ियाघर में बाघों की कुल संख्या 11 हो गई है। अधिकारियों ने कहा, सफेद बाघ शावकों की तरह, रॉयल बंगाल शावकों को भी कम से कम छह महीने तक निगरानी में रखा जाएगा।
चिड़ियाघर की तरफ से जारी बयान में कहा गया, "चिड़ियाघर के बाघों की आबादी के बीच आनुवंशिक विषमता को बनाए रखने के लिए, पशु विनिमय कार्यक्रम संचालित कर रहा है।"
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एक्सचेंज के मकसद के बारे में चिड़ियाघर के अधिकारियों का कहना है कि "बाघों की आनुवंशिक रूप से स्वस्थ आबादी को पुन: उत्पन्न करने" के लिए एक समन्वित संरक्षण प्रजनन कार्यक्रम का हिस्सा है।
दिल्ली के इस चिड़ियाघर की स्थापना 1 नवंबर, 1959 को हुई। स्थापना के बाद से ही यहां बाघों को रखा जा रहा है। राष्ट्रीय चिड़ियाघर नीति 1998 के हिस्से के रूप में, केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) ने 2010 में 73 गंभीर रूप से लुप्तप्राय जंगली जानवरों की प्रजातियों के लिए एक नियोजित संरक्षण प्रजनन कार्यक्रम शुरू किया।
फरवरी में इस चिड़ियाघर में 17 वर्षीय सफेद बाघिन - वीना रानी की मौत हो गई थी। मौत वृद्धावस्था से उपजी सेहत संबंधी परेशानी के कारण हुई। बता दें कि सफेद बाघों में पिगमेंट फोमेलानिन (pigment pheomelanin) की कमी होती है, जिससे उन्हें दुर्लभ त्वचा का रंग मिलता है।












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