Delhi Voter list SIR: दिल्ली में वोटर लिस्ट जांच के लिए EC ने शुरू किया SIR, क्या दस्तावेज हैं जरूरी?
Delhi Voter list SIR: बिहार के बाद अब चुनाव आयोग ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वोटर लिस्ट डेटा के "विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR)" की शुरुआत करने के लिए कमर कस ली है। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) ने बुधवार को लोगों से 2002 की मतदाता सूची की जांच करने और अपने तथा अपने माता-पिता के नाम सत्यापित करने का अनुरोध किया है।
सीईओ कार्यालय ने एक बयान में कहा, "यह एसआईआर के दौरान बूथ-स्तरीय अधिकारियों (BLOs) द्वारा घर-घर जाकर जनता से गणना प्रपत्र और आवश्यक दस्तावेज एकत्र करने में सहायक होगा।"

बता दें, बिहार एसआईआर मामले की अंतिम सुनवाई अक्टूबर के पहले सप्ताह में होने की संभावना है, और कोर्ट के अनुसार इसका फैसला पूरे भारत पर लागू होगा। यह प्रक्रिया वैसे भी देशव्यापी स्तर पर नियोजित है, इसलिए राष्ट्रीय राजधानी में भी इसे लागू किया जा रहा है।
इन वोटरों को किसी प्रमाण की नहीं होगी जरूरत
पीटीआई की रिपोर्ट में चुनाव आयोग का हवाला देते हुए बताया गया है कि दिल्ली के मौजूदा रजिस्टर्ड वोटरों को वोटर लिस्ट में बने रहने के लिए अब किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं होगी, बशर्ते उनका नाम 2002 की सूची में भी रहा हो। उन्हें केवल एक गणना प्रपत्र (Enumeration Form) जमा करना होगा।
अन्य वोटरों के लिए क्या है नियम?
ऐसे मामलों में जहां किसी मतदाता का नाम 2002 की सूची में नहीं है लेकिन उसके माता-पिता का नाम है, उसे पहचान प्रमाण के साथ गणना प्रपत्र और माता-पिता के संबंध में 2002 की मतदाता सूची का प्रमाण देना होगा। ऐसे वोटरों को पुरानी सूची में माता-पिता के नाम और/या पहचान व निवास के प्रमाणों की आवश्यकता होगी। हालांकि, यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि कौन से प्रमाण पर्याप्त होंगे।
गौरतलब है कि बिहार में आधार कार्ड को पहचान के प्रमाण के रूप में स्वीकार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप की आवश्यकता पड़ी थी, वह भी केवल पहचान के लिए, नागरिकता के लिए नहीं।
दिल्ली में कितने रजिस्टर्ड वोटर हैं?
गौरतलब है कि 2025 की शुरुआत में चुनाव आयोग ने दिल्ली में "विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (Special Summary Revision)" कराया था, जिसमें राष्ट्रीय राजधानी में 1.55 करोड़ रजिस्टर्ड वोटर होने का पता चला था। एसआईआर अनिवार्य रूप से पूरी वोटर की लिस्ट की फिर से जांच और नवीनीकरण है।
2002 के निर्वाचन क्षेत्रों के साथ मैप किया गया है
एसआईआर के एक टैब के तहत, वर्तमान विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों को 2002 के निर्वाचन क्षेत्रों के साथ मैप किया गया है, क्योंकि इस बीच विधानसभा सीट की सीमाओं में कुछ बदलाव हुए थे। एक बयान के अनुसार, सभी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में बूथ-स्तरीय अधिकारी (BLOs) नियुक्त किए गए हैं। सभी आवश्यक अधिकारियों-जिला चुनाव अधिकारी, चुनावी पंजीकरण अधिकारी, सहायक चुनावी पंजीकरण अधिकारी और बीएलओ-को भी प्रशिक्षित किया गया है।
बिहार वोटर लिस्ट SIR के बाद कितने घट गए हैं VOTER?
बिहार में कटऑफ 2003 की सूची थी। यह प्रक्रिया, विशेष रूप से आधार और राशन कार्ड जैसे सामान्य दस्तावेजों को छोड़कर विशिष्ट दस्तावेजों की मांग ने एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया था। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि यह अभ्यास लोगों को उनके मतदान के अधिकार से वंचित करने के उद्देश्य से किया गया है। बिहार में, एसआईआर के अब तक के निष्कर्षों ने पंजीकृत मतदाताओं की कुल संख्या को 7.9 करोड़ से घटाकर 7.24 करोड़ कर दिया है, हालांकि आपत्तियां अभी भी बनी हुई हैं।
क्या पूरे देश में होगा वोटर लिस्ट का SIR?
दिल्ली में चुनाव आयोग की यह तैयारी देशव्यापी एसआईआर योजना का हिस्सा है। इसी तरह के प्रशिक्षण अन्य राज्यों में भी हुए हैं, जिनमें पश्चिम बंगाल भी शामिल है, जहाँ अगले साल चुनाव होने हैं। चुनाव आयोग ने दोहराया है कि एसआईआर का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूचियों में शामिल हों और कोई भी अपात्र मतदाता इसमें शामिल न हो। HT की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव पैनल 2025 के अंत से पहले देशव्यापी पुनरीक्षण को शुरू करने की संभावना थी, लेकिन अभी यह तय नहीं किया है कि यह अभ्यास एक साथ किया जाएगा या चरणबद्ध तरीके से।












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