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Delhi Blast: मिलिट्री-ग्रेड विस्फोटक क्या है, लगभग हर आतंकी घटना में इसी का इस्तेमाल क्यों?

Delhi Red Fort Blast: कल आतंकवाद का साया पूरी दुनिया पर गहराता जा रहा है, और इस खतरे को और भी घातक बनाने में मिलिट्री-ग्रेड (Military-grade explosives)विस्फोटकों की बड़ी भूमिका है। आंकड़ों पर गौर करें तो, 2024 में हुए कुल आतंकी हमलों में से 31% में इन्हीं खतरनाक विस्फोटकों का इस्तेमाल हुआ है, जिनमें C-4 और सेम्टेक्स जैसे प्लास्टिक विस्फोटक आम हैं। हाल ही में दिल्ली में हुए धमाकों जैसी घटनाओं के बाद यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर ये विस्फोटक क्या हैं और ये आतंकियों के हाथ कैसे लग जाते हैं?

ग्लोबल टेररिज्म ट्रेंड्स एंड एनालिसिस सेंटर (GTTAC) की रिपोर्ट बताती है कि 2024 में 8,612 आतंकी वारदातों में 18,987 जानें गईं, और इन सब के पीछे इन्हीं विस्फोटकों का हाथ था। ये असल में सेना के लिए बने होते हैं, लेकिन काले बाजार के रास्ते आतंकवादियों तक पहुंच जाते हैं, और इनकी विनाशकारी क्षमता हम सबके लिए एक बड़ी चिंता का विषय है। आइए, जानते हैं इनकी ख़ासियतें और ये कैसे काम करते हैं।

Delhi Red Fort Blast
(AI Image)

क्या हैं मिलिट्री-ग्रेड विस्फोटक और कैसे करते हैं काम?

मिलिट्री-ग्रेड विस्फोटक वे रासायनिक यौगिक होते हैं जो अत्यधिक तेजी से ऊर्जा छोड़ते हैं, जिससे विनाशकारी धमाका होता है। इन्हें 'हाई एक्सप्लोसिव' कहा जाता है क्योंकि इनकी फटने की गति 1,000 मीटर/सेकंड से भी अधिक होती है, जो सामान्य विस्फोटकों से कहीं ज्यादा है। सेना इन्हें बम, तोप के गोले, मिसाइलों के वॉरहेड और तोड़फोड़ की कार्रवाई के लिए इस्तेमाल करती है। ये मुख्य रूप से कार्बन, हाइड्रोजन, नाइट्रोजन और ऑक्सीजन से बने होते हैं, जो विस्फोट होने पर अत्यधिक मात्रा में गैसें (जैसे CO2, N2) पैदा करते हैं, जिससे एक शक्तिशाली शॉक वेव और गर्मी उत्पन्न होती है।

TNT: एक ऐतिहासिक और शक्तिशाली विस्फोटक

TNT (ट्राइनाइट्रोटोल्यूईन) मिलिट्री-ग्रेड विस्फोटकों में सबसे पुराना और व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाला एक उदाहरण है। यह एक पीला क्रिस्टलीय पाउडर है जो अत्यधिक स्थिर होता है और पानी में नहीं घुलता। इसकी डेटोनेशन वेलोसिटी 6.9 किमी/सेकंड है, और इसे 1 के यील्ड मानक के रूप में मापा जाता है। TNT का उपयोग प्रथम विश्व युद्ध से ही तोपखाने के गोले, बम और तोड़फोड़ के अभियानों में किया जाता रहा है। इसके विस्फोट से जोरदार धमाका, टुकड़ों का बिखराव (फ्रैगमेंटेशन) और हवा में शक्तिशाली दबाव तरंगें पैदा होती हैं, जिससे डेढ़ मीटर तक गहरा गड्ढा बन सकता है और फेफड़ों को गंभीर नुकसान हो सकता है।

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RDX: उच्च क्षमता वाला आधुनिक विस्फोटक

RDX (साइक्लोट्राइमिथाइलीनट्रामाइन या हेक्सोजन) एक सफेद क्रिस्टलीय विस्फोटक है जो TNT से कहीं अधिक शक्तिशाली और कम संवेदनशील होता है। इसकी डेटोनेशन वेलोसिटी 8.75 किमी/सेकंड है और इसकी यील्ड TNT के 1.6 गुना के बराबर है, जो इसे अत्यधिक ऊर्जावान बनाती है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से इसे टॉरपीडो, हवाई बमों और आधुनिक प्लास्टिक विस्फोटक जैसे C-4 के मुख्य घटक के रूप में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। RDX के विस्फोट से एक तीव्र शॉक वेव उत्पन्न होती है जो धातुओं को आसानी से काट सकती है और 1 किलो RDX 50 मीटर दूर तक क्षति पहुंचा सकता है।

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आतंकियों द्वारा मिलिट्री-ग्रेड विस्फोटकों का दुरुपयोग

आतंकी संगठनों द्वारा मिलिट्री-ग्रेड विस्फोटकों का दुरुपयोग एक गंभीर वैश्विक चिंता का विषय बन गया है। काला बाजार के माध्यम से ये शक्तिशाली विस्फोटक आतंकियों के हाथों में पहुंच जाते हैं, जिनका इस्तेमाल वे बड़े पैमाने पर विनाशकारी हमलों को अंजाम देने के लिए करते हैं। 2024 में वैश्विक आतंकी घटनाओं में विस्फोटकों का इस्तेमाल 31% तक बढ़ गया है, जिससे 18,987 मौतें हुईं। C-4 और सेम्टेक्स जैसे प्लास्टिक विस्फोटक, जिनमें RDX एक प्रमुख घटक है, अक्सर सैन्य ठिकानों से चोरी या भ्रष्ट स्रोतों से प्राप्त किए जाते हैं, और फिर इनसे कार बम या आत्मघाती बेल्ट जैसे उपकरण बनाकर आतंकी हमलों में उपयोग किया जाता है।

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