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दिल्ली में पकड़ा गया 'बैंड बाजा बारात' गिरोह, मेहमान नहीं चोर थे ये लोग, हाई-प्रोफाइल शादियों पर नजर

Delhi Police Band Baaja Baarat Gang Arrest: दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो हाई-प्रोफाइल शादियों में मेहमान बनकर शामिल होता था और मौका मिलते ही नकदी, आभूषण और कीमती सामान पर हाथ साफ कर देता था। इसे 'बैंड बाजा बारात' गिरोह नाम दिया गया है।

क्योंकि इसके सदस्य शादी समारोहों में पूरी प्लानिंग के साथ पहुंचते थे, अच्छे कपड़े पहनते थे और शातिर तरीके से चोरी की वारदात को अंजाम देते थे। पुलिस ने इस गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक नाबालिग भी शामिल है।

Delhi Police

कैसे काम करता था 'बैंड बाजा बारात' गैंग?

यह गिरोह दिल्ली-एनसीआर और आसपास के शहरों में होने वाली भव्य शादियों को निशाना बनाता था।गिरोह के सदस्य मेहमान बनकर शादी समारोह में शामिल होते थे और वहां के माहौल में पूरी तरह घुल-मिल जाते थे। ये लोग पहले शादी में घूम-फिरकर यह देख लेते थे कि कहां कैश, गहने और महंगे गिफ्ट आइटम रखे गए हैं।

वारदात को अंजाम देने के लिए गिरोह नाबालिग बच्चों का इस्तेमाल करता था, ताकि किसी को उन पर शक न हो। जैसे ही सही मौका मिलता, ये लोग गहनों और पैसों से भरे बैग उठाकर वहां से चुपचाप निकल जाते थे। चोरी के बाद ये तुरंत अपने गृहनगर मध्य प्रदेश के राजगढ़ लौट जाते थे, ताकि पुलिस को उन पर शक न हो।

'बैंड बाजा बारात' गैंग का कैसे हुआ खुलासा?

दिल्ली में लगातार हो रही शादियों में चोरी की घटनाओं के बाद पुलिस ने विशेष जांच टीम का गठन किया। पुलिस ने विवाह स्थलों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले और संदिग्ध लोगों पर नजर रखी। पुलिस ने अलग-अलग बैंक्वेट हॉल और फार्महाउस में मुखबिरों को तैनात किया। आखिरकार पुलिस को इस गिरोह के बारे में खास सुराग मिले और शास्त्री पार्क मेट्रो डिपो के पास छापेमारी की गई।

इस दौरान तीन आरोपी अज्जू (24), कुलजीत (22) और कालू छायल (25) को गिरफ्तार किया गया और एक 15 वर्षीय नाबालिग को हिरासत में लिया गया। गिरोह से ₹2.14 लाख नगद, मोबाइल फोन और चांदी के गहने बरामद हुए हैं।

बच्चों को कैसे बनाते थे चोर?

दिल्ली पुलिस के अनुसार, गिरोह का सरगना बच्चों को चोरी के लिए ट्रेनिंग देता था। ये लोग गांव के गरीब परिवारों को हर साल 10-12 लाख रुपये देने का लालच देते थे, ताकि वे अपने बच्चों को गिरोह के हवाले कर दें। इन बच्चों की उम्र 9 से 15 साल के बीच होती थी और इन्हें खास ट्रेनिंग दी जाती थी। इन्हें सिखाया जाता था कि कैसे बिना किसी शक के शादी समारोह में शामिल होना है और सही समय पर चोरी करनी है। अगर ये पकड़े जाते, तो इन्हें सिखाया जाता था कि कुछ भी न बोलें और चुप रहें।

एडिशनल सीपी संजय भाटिया ने क्या-क्या बताया?

इस 'बैंड बाजा बारात' गिरोह की गिरफ्तारी पर क्राइम ब्रांच के एडिशनल सीपी संजय भाटिया ने कहा, "क्राइम ब्रांच की एक टीम को सूचना मिली थी कि कुछ लोग राजगढ़, एमपी से दिल्ली आते हैं और बच्चों की मदद से बैंक्वेट हॉल और शादियों में डकैती करते हैं। हमने 15 वर्षीय किशोर सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया है। उनके पास से नकदी और आभूषण बरामद किए गए हैं। उन्होंने बताया कि वे राजगढ़, एमपी से हैं।

एडिशनल सीपी ने आगे बताया कि वे बच्चों को काम पर रखते हैं, उनके माता-पिता को सालाना 12 लाख रुपये देते हैं, बच्चों को यहां लाते हैं और उन्हें शादियों और इसी तरह के समारोहों में डकैती करने के लिए प्रशिक्षित करते हैं, वे अच्छे कपड़े पहनते थे, शादियों में मेहमान बनकर आते थे ताकि कोई उन पर शक न करे। वे एक दिन में 2-3 डकैती करते थे और अपने गृहनगर लौट जाते थे। हमने इस गिरोह का भंडाफोड़ किया है और इसे 'बैंड बाजा बारात' गिरोह नाम दिया है। आगे की जांच जारी है।

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