Atishi Delhi New CM: कैलाश गहलोत, सौरभ भारद्वाज, गोपाल राय पर क्यों भारी पड़ीं आतिशी? AAP के अंदर क्या हुआ?

Atishi Marlena Delhi CM: आतिशी मार्लेना के रूप में दिल्ली को तीसरी महिला मुख्यमंत्री मिलने जा रही है। बीजेपी की सुषमा स्वराज और कांग्रेस की शीला दीक्षित के बाद आम आदमी पार्टी की आतिशी को यह जिम्मेदारी मिली है। जबसे दिल्ली के मौजूदा सीएम अरविंद केजरीवाल ने अपने इस्तीफे की घोषणा की है, तबसे उनकी जगह नए मुख्यमंत्री के तौर पर पांच नाम लिए जा रहे थे, जिसमें आखिरकार आतिशी को सफलता मिली है।

आम आदमी पार्टी के नए विधायक दल के नेता के रूप में आतिशी के अलावा जिन नामों की चर्चा हो रही थी, उनमें खुद केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल भी थीं। इनके अलावा दिल्ली के गृहमंत्री कैलाश गहलोत, स्वास्थ्य और शहरी विकास मंत्री सौरभ भारद्वाज,पर्यावरण और सामान्य प्रशासन विभाग के मंत्री गोपाल राय का नाम भी आगे चल रहा था।

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कैलाश गहलोत को क्यों नहीं मिला मौका?
केजरीवाल कैबिनेट में गृहमंत्री होने के नाते प्रोटोकॉल के तहत मुख्यमंत्री के बाद कैलाश गहलोत का ही नाम आता है। इसी वजह से 15 अगस्त को उपराज्यपाल ने उन्हें ही तिरंगा फहराने का भी अवसर दिया। गहलोत जाट हैं और दिल्ली में इसकी अच्छी-खासी आबादी है। अगर भविष्य में केजरीवाल को फिर से मुख्यमंत्री बनना होता तो गहलोत को हटाना खतरे से खाली नहीं होता। जीतन राम मांझी और चंपाई सोरेन का उदाहरण अभी भी पुराना नहीं पड़ा है।

गोपाल राय से क्यों कन्नी काट लिए केजरीवाल?
गोपाल राय मंजे हुए नेता हैं और वह संगठन के आदमी हैं। उनके पास पूर्वांचलियों का वोट बैंक है, जो कि अब दिल्ली में चुनाव को प्रभावित करता है। गोपाल राय को 'यस बॉस' बनाना आसान नहीं था। कुछ दिन सीएम की कुर्सी पर रहने के बाद उन्हें आसानी से हटाना टेढ़ी खीर साबित हो सकता था। शायद इस वजह से केजरीवाल ने उनके नाम पर जोखिम लेना ठीक नहीं समझा।

सौरभ भारद्वाज में क्या दिक्कत हुई?
सौरभ भारद्वाज मीडिया में आम आदमी पार्टी के चेहरा हैं। वह तेज-तर्रार हैं। उनके पास कोई बड़ा वोट बैंक तो नहीं है, लेकिन वह हमेशा 'यस बॉस' की भूमिका निभाते रह जाते, इसकी गारंटी नहीं दी जी सकती है। शायद यही वजह है कि पार्टी सुप्रीमो ने उनके नाम पर विचार नहीं किया।

आतिशी क्यों पड़ीं सभी नेताओं पर भारी?
आतिशी ने बहुत कम समय में दिल्ली सरकार में अपनी खास छाप छोड़ी है। पार्टी सूत्रों ने वनइंडिया को बताया है कि वह पढ़ी-लिखी हैं, जनता के बीच उनकी पैठ है, पार्टी की मीडिया फेस हैं, महिला होने के साथ-साथ लुकवाइज वह सौम्य व्यक्तित्व वाली नजर आती हैं। सबसे बड़ी बात ये है कि उनसे किसी तरह का 'जनाधार वाला खतरा' नहीं है।

यही वजह है कि आम आदमी पार्टी ने कहा है कि आतिशी 'भरत की तरह' जिम्मेदारी संभालेंगी। मतलब, वह पार्टी सुप्रीमो की 'यस बॉस' वाली भूमिका निभाएंगी। उनसे जितना कहा जाएगा, वह उतना ही करेंगी। वह मनीष सिसोदिया कैंप से हैं और अन्ना आंदोलन के समय से केजरीवाल के साथ काम कर रही हैं। 15 अगस्त को तिरंगा फहराने के लिए केजरीवाल ने उनका ही नाम पहले आगे बढ़ाया था। पिछले एक साल से सिसोदिया के विभागों के साथ ही सबसे ज्यादा और सारे अहम विभागों का जिम्मा उन्हें ही दिया गया है।

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वह पंजाबी राजपूत समुदाय से हैं। अगर भविष्य में केजरीवाल फिर से सीएम बनना चाहते हैं या नए चेहरे को मौका देना चाहते हैं तो उन्हें लगता है कि आतिशी को हटाने में किसी तरह का जोखिम नहीं होगा। वह उनके लिए मांझी या चंपाई नहीं बन पाएंगी! आतिशी ने खुद भी कहा है कि 'मैं अगले चुनाव तक मुख्यमंत्री रहूंगी और केजरीवाल के मार्गदर्शन में सरकार चलाऊंगी।'

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