Delhi-NCR Ravan Dahan Time: इस साल दशहरे पर बन रहे विशेष योग, जानें क्या है रावन दहन का शुभ मुहूर्त?
Delhi-NCR Dussehra 2024 Ravan Dahan Time: दशहरा, जिसे विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है, बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन भगवान राम ने रावण का वध कर, अधर्म पर धर्म की विजय प्राप्त की थी। वहीं हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन मां दुर्गा ने महिषासुर नामक राक्षस का वध किया था।
इसलिए इसे बुराई के अंत और सत्य की जीत के रूप में मनाया जाता है। हर साल यह पर्व हिंदू कैलेंडर के अनुसार आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। इस साल दशहरा 12 अक्टूबर 2024 को मनाया जाएगा। आइए जानते हैं क्या है शुभ मुहूर्त?

दशहरा 2024: रावण दहन का समय (Dussehra 2024 Ravan Dahan Time)
12 अक्टूबर 2024 को दशहरे के दिन रावण का दहन किया जाएगा। इस दिन रावण दहन का सबसे शुभ समय शाम 5 बजकर 53 मिनट से लेकर शाम 7 बजकर 27 मिनट तक होगा। यह समय हिंदू धर्म में प्रदोष काल के नाम से जाना जाता है, और रावण दहन सूर्यास्त से ढाई घंटे तक किया जा सकता है।
शस्त्र पूजा का महत्व और शुभ मुहूर्त (Shastra Puja Timing)
दशहरे के दिन शस्त्र पूजा का भी विशेष महत्व होता है। यह पूजा विजय की प्रतीक मानी जाती है, और इसे शुभ विजय मुहूर्त में किया जाता है। इस साल शस्त्र पूजा का शुभ समय दोपहर 2:02 मिनट से शुरू होकर दोपहर 2:48 मिनट तक रहेगा। कुल मिलाकर यह मुहूर्त 46 मिनट तक रहेगा।
दशहरे पर बन रहे विशेष योग (Dussehra Special Yogas)
इस साल दशहरे के दिन चार दुर्लभ और शुभ संयोग बन रहे हैं। इनमें से पहला श्रवण नक्षत्र का संयोग है, जो 12 अक्टूबर को सुबह 5:25 मिनट से शुरू होकर 13 अक्टूबर को सुबह 4:27 मिनट तक रहेगा। इसके साथ ही, कुंभ राशि में शनि शश राजयोग, शुक्र और बुध लक्ष्मी नारायण योग का निर्माण कर रहे हैं। साथ ही, शुक्र मालव्य नामक राजयोग भी इस दिन बन रहा है, जो इस दिन को और अधिक शुभ बनाता है।
दशहरे के दिन शुभ कार्य
दशहरे का दिन हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ माना जाता है और इस दिन कई मांगलिक कार्य किए जाते हैं। गृह प्रवेश, घर या दुकान का निर्माण, नामकरण, यज्ञोपवीत संस्कार, अन्नप्राशन, भूमि पूजन, और कर्ण छेदन जैसे कार्यों को इस दिन करना शुभ माना जाता है। हालांकि, विवाह जैसे कार्यों को दशहरे के दिन निषेध माना गया है।
दशहरा केवल एक धार्मिक त्योहार ही नहीं, बल्कि यह अच्छाई की जीत और बुराई के अंत का प्रतीक है। यह दिन हमें जीवन में धर्म, सत्य और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। इस दशहरे पर चार दुर्लभ संयोगों के साथ, यह और भी शुभ माना जा रहा है, जिससे इस दिन किए गए कार्य और भी फलदायी होंगे।












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