दिल्ली के मुकुंदपुर में अवैध फैक्ट्री में LPG सिलेंडर हुआ ब्लॉस्ट, 11 मजदूर घायल, 1 की हालत गंभीर
दिल्ली के बाहरी उत्तरी क्षेत्र मुकुंदपुर में मंगलवार सुबह एक भीषण एलपीजी सिलेंडर विस्फोट के बाद एक एकल-मंजिला फैक्ट्री ढह गई। हादसे में 11 श्रमिकों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला गया, जबकि एक महिला गंभीर रूप से झुलस गई। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि परिसर में बर्तन रंगाई के साथ-साथ अवैध रूप से गैस सिलेंडर भरने का काम भी किया जा रहा था। पुलिस ने मामले में दो लोगों को हिरासत में लेकर जांच शुरू कर दी है।
धमाके के बाद मची अफरा-तफरी
यह हादसा गली नंबर-1, ईशु विहार, मुकुंदपुर-II में हुआ। दिल्ली अग्निशमन सेवा (DFS) के अनुसार सुबह 9:37 बजे विस्फोट और इमारत ढहने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही दमकल, पुलिस और बचाव दल मौके पर पहुंचे और मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया।

11 लोगों को निकाला गया, महिला की हालत गंभीर
आउटर नॉर्थ जिले के पुलिस उपायुक्त (DCP) हरेश्वर स्वामी ने बताया कि सुबह करीब 9:30 बजे विस्फोट की सूचना प्राप्त हुई थी। पुलिस और आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम तुरंत मौके पर पहुंची। बचाव अभियान के दौरान 11 लोगों को सुरक्षित निकाला गया। इनमें एक महिला गंभीर रूप से झुलसी हुई थी, जिसे बेहतर इलाज के लिए सफदरजंग अस्पताल रेफर किया गया।
अवैध गैस रिफिलिंग के दौरान हुआ विस्फोट
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि बड़े व्यावसायिक सिलेंडरों से छोटे सिलेंडरों में एलपीजी गैस ट्रांसफर करते समय विस्फोट हुआ। जिस इमारत में हादसा हुआ वहां बर्तन रंगाई की फैक्ट्री संचालित की जा रही थी। पुलिस को मौके से बड़ी संख्या में गैस सिलेंडर बरामद हुए हैं, जिससे अवैध गैस रिफिलिंग के कारोबार का खुलासा हुआ है।
84 गैस सिलेंडर बरामद, दो आरोपी हिरासत में
पुलिस ने फैक्ट्री परिसर से 38 खाली गैस सिलेंडर बरामद किए, जबकि पास के एक कमरे से 46 अन्य सिलेंडर मिले। जांच में सामने आया कि परिसर का उपयोग सुधीर राय बर्तन कोटिंग कार्य के लिए करता था, जबकि हरकेश बहादुर उर्फ बब्लू पर वहां गैस सिलेंडर रखने और अवैध गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है। दोनों को हिरासत में लेकर भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।
गैस रिसाव की शिकायत के बावजूद जारी था काम
स्थानीय श्रमिकों और निवासियों के अनुसार, इमारत में कई छोटी विनिर्माण और पैकेजिंग इकाइयां संचालित थीं। एक हिस्से में बर्तनों की पेंटिंग और बेकिंग की जाती थी, जबकि दूसरे हिस्से में चार्जर और पंखों के पुर्जों की पैकेजिंग का काम होता था। कई श्रमिकों ने दावा किया कि विस्फोट से पहले गैस रिसाव की गंध महसूस हो रही थी।
चाय बनाने के दौरान हुआ धमाका
स्थानीय लोगों का कहना है कि एक महिला ने सुबह चाय बनाने के लिए गैस स्टोव जलाया, जिसके तुरंत बाद जोरदार विस्फोट हुआ। हालांकि पुलिस ने अभी तक इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। गंभीर रूप से घायल महिला रोजाना की तरह मजदूरों के लिए चाय तैयार कर रही थी।
प्रत्यक्षदर्शियों ने सुनाई भयावह कहानी
घायल श्रमिक मुन्ना ने दावा किया कि भट्टे के पास गैस सिलेंडर भरे जा रहे थे और उनमें से एक सिलेंडर से लगातार गैस रिसाव हो रहा था। वहीं कानपुर निवासी संजीव, जो हादसे में बाल-बाल बच गया, ने बताया कि विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि फैक्ट्री का शटर बाहर की ओर उड़ गया और कुछ ही सेकंड में पूरी संरचना मलबे में तब्दील हो गई।
एक अन्य घायल श्रमिक मुकेश गंभीर रूप से झुलस गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार धमाके के बाद पूरे इलाके में धूल का गुबार छा गया और चारों ओर मदद के लिए चीख-पुकार सुनाई दे रही थी।
बचाव कार्य में जुटी कई एजेंसियां
हादसे के बाद अपराध शाखा, फोरेंसिक विशेषज्ञ, दिल्ली अग्निशमन सेवा, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और श्वान दस्ते की टीमों को मौके पर तैनात किया गया। अधिकारी घटना के कारणों और अवैध गैस कारोबार के नेटवर्क की जांच कर रहे हैं।
साकेत हादसे के बाद दिल्ली में दूसरा बड़ा हादसा
गौरतलब है कि यह घटना 30 मई को साकेत मेट्रो स्टेशन के पास हुए भवन ढहने के हादसे के कुछ ही दिनों बाद सामने आई है। उस हादसे में छह लोगों की मौत हो गई थी और आठ अन्य घायल हुए थे। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने राजधानी में औद्योगिक और व्यावसायिक परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।













Click it and Unblock the Notifications