Delhi MCD Election result:AAP की बल्ले-बल्ले भाजपा के लिए कितना बड़ा झटका, आंकड़ों से समझिए

दिल्ली: 2022 में होने वाले दिल्ली नगर निगम चुनावों से एक साल पहले उपचुनाव बड़ी जीत को राजधानी में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी के लिए बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। उपचुनाव से पहले उसके पास एक तरह से चार (एक बीएसपी पार्षद 'आप' में शामिल हो गए थे) सीटें थीं और चुनाव के बाद भी वह अपनी संख्या बरकरार रखने में कामयाब हुई है। झटका बीजेपी के लिए है, जो दिल्ली के तीनों नगर निगमों पर काबिज है, लेकिन वह अपनी भी एक सीट 'आप' के हाथों गंवा बैठी है। पार्टी के लिए यह चुनाव परिणाम बहुत ही ज्यादा निराशाजनक इसलिए कहा जा सकता है कि अरविंद केजरीवाल की सरकार लगातार भाजपा शासित एमसीडी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाती रही है। चुनाव में असल फायदा कांग्रेस को हुआ है, जिसने दंगा-प्रभावित मुस्लिम बहुल इलाके में आम आदमी पार्टी से बहुत ही ज्यादा वोटों से उसकी सीट छीन ली है।

एमसीडी उपचुनाव के नतीजे भाजपा के लिए झटका क्यों है?

एमसीडी उपचुनाव के नतीजे भाजपा के लिए झटका क्यों है?

दिल्ली के तीनों नगर निगमों में कुल 272 सीट हैं, जिनमें से 5 सीटों पर रविवार को उपचुनाव करवाए गए थे। बुधवार को जो चुनाव परिणाम आए हैं, उसमें शालीमार बाग की सीट भाजपा के पास थी, लेकिन वहां 'आप' ने उससे ये सीट छीन ली है। यह परिणाम इसलिए चौंकाने वाला माना जा रहा है क्योंकि यह इलाका भाजपा का गढ़ माना जाता है। आंकड़ों से समझने की कोशिश करें तो यह परिणाम आम आदमी पार्टी का दिल्ली के मतदाताओं पर दबदबा दिखाता है। इन पांच सीटों पर आम आदमी का वोट शेयर बीजेपी से कहीं ज्यादा यानी 46.10% रहा है। वहीं बीजेपी सिर्फ 27.29% वोट ही ले सकी है। कांग्रेस एकबार फिर से तीसरे नंबर की पार्टी रही है, जिसे 21.84% वोट मिले हैं।

दिल्ली में 'आप' की बल्ले-बल्ले

दिल्ली में 'आप' की बल्ले-बल्ले

एमसीडी चुनाव से एक साल पहले 5 में से 4 सीटें जीतकर केजरीवाल एंड कंपनी का गदगद होना लाजिमी है। खासकर उसकी विरोधी 'नंबर वन' बीजेपी का पत्ता साफ हुआ है। शालीमार बाग सीट पर इसकी जीत तो सफलता है ही,पार्टी ने पूर्वी दिल्ली की कल्याणपुरी और त्रिलोकपुरी की रिजर्व सीटों पर भी अपना कब्जा बरकरार रखा है। इसी तरह इसे रोहिणी सीट पर भी जीत मिली है, जो इसके टिकट पर विधानसभा में जीतने वाले पार्षद के कारण ही खाली हुई थी, जिन्होंने बीएसपी के हाथी से उतरकर विधानसभा चुनावों में हाथ में झाड़ू पकड़ने का फैसला किया था।

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    मुस्लिम बहुल इलाके में 'आप' का क्यों खिसका जनाधार?

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    वैसे आम आदमी पार्टी सुप्रीमो भाजपा को हराकर चाहे जितनी खुशियां मना लें, लेकिन उत्तर-पूर्वी दिल्ली की मुस्लिम-बहुल वो भी दंगा-प्रभावित सीट पर कांग्रेस से मिली करारी हाल उन्हें रातभर नींद नहीं आने देगी। चौहान बांगर की सीट कांग्रेस के उम्मीदवार चौधरी जुबेर अहमद ने 'आप' के मोहम्मद इशराक खान को 10,000 से भी ज्यादा वोटों के अंतर से हराकर छीन ली है। इस सीट पर पहले केजरीवाल की पार्टी का कब्जा था। माना जा रहा है कि इस इलाके में आम आदमी पार्टी की हार उसके सत्ता में रहते इस इलाके में हुए सांप्रदायिक दंगे और तबलीगी जमात पर कोरोना फैलाने के आरोप लगने की वजह से हुआ है। लेकिन, इसका एक विश्लेषण ये भी है कि सिर्फ मुसलमानों के इलाके में ही कांग्रेस का प्रभाव बढ़ा है बाकी जगहों पर मुकाबला भाजपा और आम आदमी पार्टी के ही बीच है।

    दिल्ली भाजपा के सामने बड़ी चुनौती

    दिल्ली भाजपा के सामने बड़ी चुनौती

    दिल्ली नगर निगम पर भाजपा करीब चार कार्यकालों से काबिज है। जाहिर है उसके ऊपर आम आदमी पार्टी जो एंटी-इंकम्बेसी और भ्रष्टाचार के आरोप लगा रही है, उससे उसकी मुश्किलें बढ़ती महसूस हो रही हैं। सवाल है कि अगर अगले एक साल में उसके सामने इन सब चीजों से निपटने की चुनौती है तो दिल्ली की सत्ता पर काबिज अरविंद केजरीवाल के लिए भी अपने मुस्लिम वोट बैंक को पकड़कर रखने का दबाव बढ़ गया है।

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