दिल्ली मास्टर प्लान में देरी पर सुप्रीम कोर्ट की केंद्र को फटकार, कहा- शहर पूरी तरह से बदहाल है
दिल्ली नगर पालिका परिषद (NDMC) द्वारा दो परिसरों को डी-सील करने की अधिसूचना सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड कर दी है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा है कि सार्वजनिक अधिकारी खुद को अनुचित शक्तियां देने के लिए सब कुछ अधर में रख रखते जा रहे हैं। ऐसे में अदालत ने दिल्ली मास्टर प्लान उपलब्ध ना कराए जाने पर केंद्र की फटकार लगाई है।
सर्वोच्च अदालत ने दिल्ली शहर को लेकर कहा कि दिल्ली पूरी तरह से अव्यवस्थित है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली मास्टर प्लान में देरी पर टिप्पणी करते हुए सोमवार (23 अक्टूबर) पूछा कि केंद्र नागरिकों का उत्पीड़न रोकने के लिए कदम क्यों नहीं उठाती। इससे पहले पिछले हफ्ते भी MPD 2041 को अधिसूचित करने में देरी पर नाराजगी व्यक्त की थी।

न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और सुधांशु धूलिया की पीठ ने 18 अक्टूबर के अपने आदेश में कहा, "हमें आश्चर्य है कि सरकार नागरिकों के उत्पीड़न को रोकने के लिए कदम नहीं उठाती है। शहर में पूरी तरह से गंदगी हो गई है और सार्वजनिक अधिकारी इस गंदगी को दूर करने को तैयार नहीं।"
अदालत ने ये टिप्पणी उस आदेश में की जिसमें दिल्ली नगर पालिका परिषद के परिसरों को डी-सील करने की अधिसूचना सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड करने के निर्देश दिए थे।
अदालत ने ये टिप्पणी उस आदेश में की जिसमें दिल्ली नगर पालिका परिषद के परिसरों को डी-सील करने की अधिसूचना सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड करने के निर्देश दिए थे। अदालत ने इस बात पर अफसोस जताया था कि नए एमपीडी की अनुपस्थिति और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली कानून (विशेष प्रावधान) दूसरे संशोधन के तहत सभी अनधिकृत निर्माणों के लिए एक व्यापक कानूनी कवर की अनुपस्थिति के कारण दिल्ली में कानून का पालन न करना एक समस्या थी। विधेयक, 2021 जो तीन वर्षों के लिए कुछ प्रकार के अनधिकृत निर्माणों को विध्वंस, सीलिंग आदि से सुरक्षा प्रदान करता है। इस तरह की सुरक्षा को समय-समय पर बढ़ाया गया है।
बता दें कि केंद्र सरकार और दिल्ली विकास प्राधिकरण ने पिछले साल सितंबर में एमपीडी-2041 को जनवरी 2023 तक अंतिम रूप देने की प्रतिबद्धता जताई थी। केंद्र समय सीमा तब तय की जब सुप्रीम कोर्ट की खंड पीठ ने सरकार को निर्देश दिए। इसे तीन महीने पूरा करने का समय दिया था। 30 अप्रैल तक दल्ली मास्टर प्लान तैयार करने की सभी प्रकिया पूरी होनी थी। लेकिन अब तक केंद्र ने दिल्ली मास्टर प्लान फाइनल नहीं किया किया है, जिसका सीधा असर सरकार सुविधाओं पर देखा जा सकता है।
ये पहला मौका नहीं है, इससे पहले पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने समस्य का संज्ञान में लिया था। उस वक्त अदालत ने उम्मीद व्यक्त की थी कि केंद्र को दिए गए समय के भीतर काम पूरा होगा। अदालत ने कहा कि अनिश्चित काल तक समस्या को टाला नहीं जा सकता। पीठ ने कहा कि हमें यकीन है कि अंतिम मास्टर प्लान 30 अप्रैल, 2023 को या उससे पहले प्रकाशित किया जाएगा।












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