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अकाली दल की अगुवाई में किसान आंदोलनकारी दिल्ली पहुंचे, पुलिस ने झारोड़ा कलां बॉर्डर बंद किया

नई दिल्‍ली। राजधानी दिल्‍ली में अब एक और इलाके का रूट आमजन के लिए बंद हो गया है। दिल्‍ली ट्रैफिक पुलिस ने झरोदा कलां बॉर्डर वाली सड़क को भारी पुलिस जाब्‍ता तैनात कर बंद कर दिया है। ट्रैफिक पुलिस की ओर से इस बारे में बताया गया कि, शिरोमणि अकाली दल (शिअद) एवं किसान आंदोलनकारियों के प्रदर्शन को देखते हुए यह फैसला लेना पड़ा है। दरअसल, पंजाब की सत्‍ता में रह चुका शिरोमणि अकाली दल (शिअद) अब दिल्ली में केंद्र सरकार के तीन कृषि कानून के अधिनियमन के एक वर्ष पूरा होने पर 'ब्लैक फ्राइडे' विरोध मार्च निकाल रहा है। ऐसे में दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने यात्रियों से झरोदा कलां इलाके में जाने से बचने को कहा है।

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    दिल्‍ली के एक और बॉर्डर पर आमजन की पहुंच नहीं

    दिल्‍ली के एक और बॉर्डर पर आमजन की पहुंच नहीं

    दिल्ली यातायात पुलिस ने शुक्रवार को एक अलर्ट जारी कर यात्रियों को झरोदा कलां क्षेत्र से बचने के लिए कहा, क्योंकि उन्होंने विरोध-मार्च को देखते हुए सीमा के दोनों ओर सड़कों तक पहुंच बंद की हुई है। पुलिस द्वारा लोगों से गुरुद्वारा रकाबगंज रोड, आरएमएल अस्पताल, पीओ पर जी ट्रैफिक, अशोका रोड, बाबा खड़क सिंह मार्ग से भी बचने को कहा जा रहा है। इसे लेकर अभी ट्रैफिक पुलिस ने हिंदी में ट्वीट किया, "किसानों के आंदोलन के कारण झरोदा कलां सीमा मार्ग दोनों तरफ से बंद कर दिए गए हैं, कृपया इस मार्ग का उपयोग करने से बचें।"

    बॉर्डर को बैरिकेड्स लगाकर बंद कर दिया गया

    बॉर्डर को बैरिकेड्स लगाकर बंद कर दिया गया

    दिल्ली पुलिस के हवाले से न्‍यूज एजेंसी ने ट्वीट किया, ''शिरोमणि अकाली दल के नेतृत्व में गुरुद्वारा रकाब गंज से संसद तक आज होने वाले विरोध मार्च से पैदा होने वाली संभावित समस्‍या को रोकने व नियंत्रित करने के मौजूदा दिशा-निर्देशों के मद्देनजर अनुमति नहीं है। हालांकि, नई दिल्ली धारा 144 लागू कर दी गई है। वहीं, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने भी ट्वीट किया, "किसानों के विरोध को देखते हुए झरोदा कलां बॉर्डर को बैरिकेड्स लगाकर बंद कर दिया गया है।"

    'यह काले-शासन की याद दिलाता है'

    'यह काले-शासन की याद दिलाता है'

    उधर, दिल्‍ली में झरोदा कलां बॉर्डर को बंद किए जाने पर शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने दिल्ली पुलिस को निशाने पर लिया है। शिअद ने आरोप लगाया कि, गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब की सीमाओं की घेराबंदी की जा रही है और दिल्ली की सीमाओं को सील किया जा रहा है। पार्टी ने ट्वीट किया, "आज विरोध प्रदर्शन के लिए आने वाले किसानों और अकाली दल के कार्यकर्ताओं की संख्या को देखते हुए, पंजाबियों को प्रवेश करने से रोकने के लिए रकाब गंज साहिब की घेराबंदी की जा रही है। यह काले-शासन के दौर की याद दिलाता है।"

    पंजाब के वाहनों को दिल्‍ली में नहीं घुसने दिया जा रहा

    पंजाब के वाहनों को दिल्‍ली में नहीं घुसने दिया जा रहा

    शिअद ने यह भी आरोप लगाया कि पंजाब में पंजीकृत वाहनों को दिल्ली की सीमाओं पर रोका जा रहा है। शिअद नेताओं ने कहा, "दिल्ली की सभी सीमाओं को सील कर दिया गया है और पंजाब के वाहनों को रोका जा रहा है। जबकि अन्य सभी गुजरते हैं। मगर, पंजाबियों को बताया रहा है कि आपका प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया है।" शिअद नेता ने कहा, आप देख सकते हैं क‍ि कैसे हमारी शांतिपूर्ण आवाजों ने सत्‍ता को डरा दिया है। इससे पहले शिअद नेता दलजीत सिंह चीमा ने गुरुवार को कहा कि, दिल्ली पुलिस ने उन्हें शुक्रवार का विरोध मार्च निकालने की अनुमति नहीं दी है। चीमा ने इसे अलोकतांत्रिक कदम बताया।

    हम शांतिपूर्वक विरोध करेंगे, भले ही अनुमति न हो

    हम शांतिपूर्वक विरोध करेंगे, भले ही अनुमति न हो

    वहीं, अपने विरोध मार्च को लेकर शिअद महासचिव प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने आश्वासन दिया कि, विरोध मार्च शांतिपूर्ण रहेगा। उन्होंने कहा, "मार्च शांतिपूर्ण होगा। हम तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने के लिए सरकार को एक ज्ञापन देंगे। भले ही हमें विरोध करने की अनुमति नहीं मिली, हम शांतिपूर्वक विरोध करेंगे और अपना ज्ञापन देंगे।"

    सुखबीर बादल और उनकी पत्‍नी कर रहे अगुवाई

    सुखबीर बादल और उनकी पत्‍नी कर रहे अगुवाई

    गौरतलब हो कि, किसान पिछले साल नवंबर से केंद्र के तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं और शुक्रवार को शिरोमणि अकाली दल (शिअद) कानून के एक साल पूरा होने पर 'ब्लैक फ्राइडे' विरोध मार्च निकाल रहा है। विरोध मार्च सुबह 9.30 बजे गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब से संसद भवन तक निकाला गया। विरोध का नेतृत्व शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल और शिअद सांसद हरसिमरत कौर बादल कर रहे हैं।

    ये हैं वे तीन कृषि कानून

    ये हैं वे तीन कृषि कानून

    मोदी सरकार द्वारा संसद में पिछले साल पारित किए गए तीन कृषि कानूनों में किसान उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक, 2020 और मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा विधेयक, 2020 का किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) समझौता शामिल हैं। किसान संगठन और विपक्षी दल इन कानूनों को किसानों के लिए नुकसानदेह बता रहे हैं। वे चाहते हैं कि, ये कानून लागू न हों।

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