वैक्सीन की कमी पर दिल्ली HC की फटकार, कहा- केंद्र के अधिकारी जमीनी हकीकत से बेखबर
नई दिल्ली, मई 19: देश में कोरोना महामारी के बीच हो रही वैक्सीन की कमी को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने तीखी टिप्पणी की है। दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि केंद्र सरकार के अधिकारी 'हाथीदांत के टावरों' में रह रहे हैं, जो कोरोना महामारी की जमीनी हकीकत से बेखबर हैं कि कोविड ने एक भी परिवार को नहीं बख्शा है। जस्टिस मनमोहन और नवीन चावला की पीठ ने कहा कि भारत में रूसी वैक्सीन स्पूतनिक वी टीके के उत्पादन से देश के अंदर टीकों की कमी को दूर करने का एक मौक मिल रहा है।

रूस के स्पूतनिक वैक्सीन निर्माताओं के साथ सहयोग करने वाली एक भारतीय फर्म को केंद्र की ओर से धन की कमी हो रही है, जिसको जानने के बाद हाई कोर्ट ने केंद्र से नाराजगी जताते हुए कहा कि भगवान इस देश को आशीर्वाद दें। इसलिए हम इस स्थिति का सामना कर रहे हैं। ऐसे मामलों में उच्च अधिकारियों से 30 मिनट के भीतर निर्देश प्राप्त किये जाएं। अदालत ने कहा विदेशी वैक्सीन निर्माताओं के साथ इस तरह की साझेदारी के प्रयास टीकों की कमी का सामना कर रहे राष्ट्र के लिए एक अवसर है।
जस्टिस मनमोहन और नवीन चावला की पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अपने अधिकारियों को बताएं कि यह आपके लिए एक अवसर है, इसे गंवाएं नहीं। इस वायरस ने किसी एक परिवार को नहीं बख्शा है। अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि क्या आपके अधिकारी को नहीं लगता कि देश में इतनी मौतें हो रही हैं और हमारे पास टीकों की कमी है? आपके पास टीकों की इतनी कमी है और आप इसे पूरा नहीं कर रहे हैं। शायद यह आपके लिए एक अवसर है। इतना नकारात्मक मत बनो। यह एक प्रचंड आग की तरह है और किसी को परवाह नहीं है। आप लोग क्यों नहीं समझते हैं।
दिल्ली हाई कोर्ट पैनासिया बायोटेक की एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें जुलाई 2020 के मध्यस्थ अवार्ड के अनुसार धन जारी करने की मांग की गई थी, जिसमें कहा गया था कि उसे मानवता के व्यापक हित में जल्द से जल्द धन की आवश्यकता है क्योंकि इसने पहले ही स्पूतनिक वी के परीक्षण बैचों का निर्माण किया है। आरडीआईएफ और स्केल-अप बैचों के निर्माण की प्रक्रिया जारी है। वहीं अब कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए 31 मई तक जवाब मांगा है।












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