Delhi HC Pregnancy को टर्मिनेट करने के पक्ष में, गिराया जाएगा 27 हफ्ते का असामान्य गर्भ
दिल्ली हाईकोर्ट ने गर्भपात पर बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने 27 हफ्ते के असामान्य गर्भ को गिराने की अनुमति दे दी है। याचिकाकर्ता अब मेडिकल साइंस के तरीकों से गर्भपात करा सकेगा।

एक दुर्लभ मामले में Delhi HC Pregnancy को टर्मिनेट करने के पक्ष में है। दिल्ली हाईकोर्ट ने 27 हफ्ते के असामान्य गर्भ को गिराने की परमिशन दे दी है। ये अहम और बड़ा फैसला इसलिए है क्योंकि हाईकोर्ट के फैसले के बाद गर्भपात मेडिकल तरीके से कराया जाएगा। बता दें कि भारत में गर्भपात को लेकर कानूनी प्रावधान बेहद सख्त हैं, ऐसे में याचिकाकर्ता को मिली राहत बड़ा मामला है। अब 6 महीने से अधिक का गर्भ गिराया जाएगा।
AIIMS की रिपोर्ट पर 27 हफ्ते का गर्भ गिराया जाएगा
गर्भपात मामले की इस मामले में रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को हृदय संबंधी असामान्यता से पीड़ित 27 सप्ताह की गर्भावस्था को समाप्त करने की अनुमति दी। उच्च न्यायालय ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), नई दिल्ली के मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पर गौर करने के बाद यह निर्देश दिया।
गर्भवती 9 मार्च को एम्स में भर्ती होगी
एक महिला ने गर्भ गिराने की अनुमति के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिका पर विचार करते हुए न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने गर्भपात की सिफारिश करने वाले मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट का अध्ययन किया। इसके बाद सुरक्षित गर्भपात की अनुमति दी। गर्भपात प्रक्रिया एम्स में की जानी है। पीठ ने याचिकाकर्ता को 9 मार्च को एम्स में भर्ती होने का निर्देश दिया। एम्स में गठित मेडिकल बोर्ड द्वारा एक रिपोर्ट दायर की गई थी जिसमें छह सदस्य थे।
हाईकोर्ट के आदेश पर बना मेडिकल बोर्ड
रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली उच्च न्यायालय ने 3 मार्च को एम्स को उस महिला की जांच के लिए एक मेडिकल बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया था। महिला ने कहा है कि भ्रूण हृदय संबंधी असामान्यता से पीड़ित है। इस पर दिल्ली हाईकोर्ट की पीठ ने कहा था, "असामान्यता की प्रकृति को देखते हुए एम्स द्वारा एक मेडिकल बोर्ड का गठन किया जाए।"
अल्ट्रासाउंड में असामान्यता के संकेत नहीं
गर्भवती महिला के गर्भपात की अनुमति मांगने पर दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि 17 फरवरी को किए गए अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट में भ्रूण में कुछ असामान्यता पाई गई थी। इसके बाद मामले को भ्रूण चिकित्सा विशेषज्ञ के पास भेजा गया। 25 फरवरी को हुई जांच में गड़बड़ी की पुष्टि हुई। अदालत ने 25 फरवरी की रिपोर्ट का अवलोकन किया जिसमें भ्रूण के साथ हृदय संबंधी असामान्यता पाई गई थी। बताया गया है कि 5 जनवरी 2023 को किए गए अल्ट्रासाउंड में कोई असामान्यता नहीं पाई गई थी।
किस कानून के तहत गर्भ गिराने की अपील
याचिकाकर्ता एक 32 वर्षीय विवाहित महिला है जिसे वर्तमान में 27 सप्ताह का गर्भ है। तत्काल याचिका के माध्यम से एमटीपी अमेंडमेंट एक्ट, 2021 द्वारा संशोधित कानून के तहत गर्भपात की परमिशन मांगी गई। मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट, 1971 की धारा 3(2बी) के तहत के तहत उच्च न्यायालय से हस्तक्षेप की अपील की गई।
32 वर्षीय युवती को गर्भपात की परमिशन
याचिका में कहा गया है कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट, 1970 की धारा 3 (2 बी) के तहत 27 हफ्ते के गर्भ को बिना अदालती आदेश के मेडिकल तरीके से टर्मिनेट नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने कहा, इस मामले में गर्भ का समय ही मूल तत्व है। भ्रूण संबंधी असामान्यताओं के कारण याचिकाकर्ता ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत अपने 'जीवन के अधिकार' को लागू करने के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। इसके बाद हाईकोर्ट ने 32 वर्षीय युवती को गर्भपात की परमिशन दे दी।












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