यमुना पानी विवाद: दिल्ली जल बोर्ड ने हरियाणा सरकार पर लगाए नए आरोप, हाईकोर्ट ने भेजा खट्टर सरकार को नोटिस
Delhi Haryana Water Disputes: बोर्ड की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि वर्तमान आवेदन जल आवंटन में किसी भी वृद्धि या किसी अतिरिक्त पानी के लिए नहीं था, बल्कि अवरोधों को हटाने को लेकर था।

पानी के मुद्दे पर दिल्ली और हरियाणा सरकार एक बार फिर से आमने-सामने आ गई है। दिल्ली जल बोर्ड (Delhi Jal Board) ने हाईकोर्ट में आरोप लगाया है कि हरियाणा से यमुना में जो पानी आता है, वो काफी प्रदूषित है और वो पीने योग्य भी नहीं है। यहां जानबूझकर हरियाणा सरकार पानी के प्रवाह में अवरोध पहुंचाने का काम कर रही है। वहीं दिल्ली जल बोर्ड की याचिका पर अब दिल्ली हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार और वहां के सिचाई विभाग को नोटिस जारी किया है।
क्या हैं दिल्ली जल बोर्ड के आरोप
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान दिल्ली जल बोर्ड (Delhi Jal Board) ने कहा हरियाणा से आ रहे पानी में भारी मात्रा में अमोनिकल-नाइट्रोजन, कोलिफॉर्म मिला है। इसकी एक बड़ी वजह ये है कि हरियाणा सरकार द्वारा पानी के बहाव में कई अवरोध पैदा कर दिए गए हैं। इस बात पर भी जोर दिया गया है कि हरियाणा द्वारा अभी भी दिल्ली को उसके हक का पानी नहीं दिया जा रहा है। इस मामले में अगली सुनवाई 10 मई को होने जा रही है।
अभिषेक मनु सिंघवी ने दिल्ली जल बोर्ड की तरफ से दी दलील
दिल्ली जल बोर्ड (Delhi Jal Board) की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि वर्तमान आवेदन जल आवंटन में किसी भी वृद्धि या किसी अतिरिक्त पानी के लिए नहीं था, बल्कि केवल इसके जरिये अवरोधों को हटाने पर मौजूदा न्यायिक निर्देशों के कार्यान्वयन की मांग की गयी थी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने जल बोर्ड से पूछा कि क्या अंतर-राज्यीय जल विवाद होने के कारण उच्चतम न्यायालय द्वारा इसकी सुनवाई की जानी चाहिए? हालांकि, वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि मौजूदा मामला केवल एक 'पुलिसिंग मामला' है और इसमें किसी भी अंतर-राज्यीय जल विवाद के फैसले की आवश्यकता नहीं है।












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