कोरोना के खिलाफ जंग में दिल्ली सरकार से हाई कोर्ट ने कहा- आर्मी से क्यों नहीं मांगते मदद
नई दिल्ली, मई 1: दिल्ली के अस्पतालों में ऑक्सीजन सप्लाई, बेड और दवाओं की कमी को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में शनिवार को भी सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दिल्ली सरकार को जमकर फटकार लगाई। कोर्ट ने दिल्ली सरकार से पूछा कि, फील्ड हॉस्पिटल तैयार करने के लिए आर्मी से अनुरोध क्यों नहीं किया? उनके पास अलग तरह की तकनीक है। हम बेड बढ़ाने जा रहे हैं, यह कहने से समस्या का हल नहीं निकलेगा। ऐसा तुरंत करिए।
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सुनवाई के दौरान दिल्ली के बत्रा अस्पताल ने हाईकोर्ट को बताया कि उनके यहां ऑक्सीजन की भारी किल्लत है। बत्रा अस्पताल के अधिकारियों का कहना है कि हम आज सुबह 6 बजे से SOS में हैं, हमारे पास 307 मरीजों भर्ती हैं, जिनमें से 230 ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि सब तनाव में हैं, यहां तक कि हम भी तनाव में हैं। हाईकोर्ट ने बत्रा हॉस्पिटल से कहा- आप डॉक्टर हैं, आपको अपनी नब्ज को पकड़ना होगा।
दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार से सवाल किया कि जब हमने 4 दिन पहले कहा था कि आर्मी से यहां फील्ड हॉस्पिटल तैयार करने के लिए अनुरोध क्यों नहीं किया। उसनके पास अलग तरह की तकनीक है। हम बेड बढ़ाने जा रहे हैं, यह कहने से समस्या का हल नहीं निकलेगा। हम कर रहे हैं, यह कहने से काम नहीं चलेगा। ऐसा तुरंत करिए। दिल्ली सरकार का तर्क था कि हम जब खुद से दिल्ली में बेड की संख्या बढ़ाने जा रहे हैं तो हम पर आर्मी की मदद लेने के लिए लगातार जोर क्यों दिया जा रहा है। हम स्वयं 15000 बेड की संख्या बढ़ा रहे हैं।
हाई कोर्ट ने कहा कि कोलैबोरेटिव एफर्ट चाहिए इस वक्त, बिना ऑक्सिजन के इन बेड को कोई फायदा नहीं होगा। आर्मी के साथ मिलकर काम करेंगे तो सरकार के संसाधनों का भी बेहतर इस्तेमाल हो पाएगा। दिल्ली सरकार के वकील ने हाई कोर्ट में कहा कि हमारे ऑक्सिजन टैंकरों को प्लांट में प्राथमिकता नहीं दी जा रही है। दिल्ली सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट से अपील की कि उसे सप्लायरों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करनी चाहिए क्योंकि अभी भी आयनॉक्स के साथ ऑक्सीजन सप्लाई में दिक्कत आ रही है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने एक और अहम सवाल उठाया। कोर्ट ने दिल्ली सरकर और अस्पतालों से पूछा कि हम यह जानना चाहते हैं 1 अप्रैल के बाद से कितने आईसीयू बेड उनके यहां भरे हैं और किसने ऑक्यूपाई कर रखे हैं। कोर्ट का कहना था कि अस्पताल में इंसान तभी जाता है जब उसे इमरजेंसी हो और ऐसे में अगर आईसीयू बेड खाली न हो तो बिना आईसीयू बेड सर्कुलेट किए जाने चाहिए।
मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट के एक वकील ने अर्जी लगाई कि 12 ऐसे मामले आए हैं जिनमें राजनीतिक दलों के नेता रेमडेसिविर इंजेक्शन अपने जानने वालों में बांट रहे हैं। क्या यह कालाबाजारी नहीं है। इस पर कोर्ट ने वकील से कहा कि वह इस बारे में जानकारी और साक्ष्य उपलब्ध करवाएं।












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