Delhi: कच्ची कॉलोनियों में विकास को लेकर MCD ने स्थिति की साफ, जानिए क्या कहा?
दिल्ली नगर निगम (Delhi MCD) में अवैध कॉलोनियों में विकास को लेकर स्थित स्पष्ट कर दी है। निगम प्रशासन ने कहा है कि एमसीडी अधिनियम के तहत सार्वजनिक सड़कों और जगहों पर ही निगम की ओर से विकास कार्यों का संचालन किया जाता है। इसके अलावा किसी भी अन्य क्षेत्र में किसी भी प्रकार के फंड से विकास कार्यों को निगम प्रशासन करता है।
दिल्ली नगर निगम ने कहा है कि अनधिकृत कॉलोनियों और कोऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों में विधायक निधि से विकास कार्य नहीं करेगा। एमसीडी ने इसको लेकर 24 जनवरी एक आदेश जारी किया। जिसमें कहा गया कि विधायक निधि से अनाधिकृत कॉलोनियों और कोऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों में विकास के कार्यों को नहीं किया जाता है।

एमसीडी ने बताया कि अनधिकृत कॉलोनियों और कोऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों में विकास कार्यों के लिए एमसीडी अधिकृत नहीं है। यहां राज्य सरकार के दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं बुनियादी ढांचा विकास निगम (DSIIDC) व सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के फंड से विकास कार्य किए जाते हैं। बता दें कि मास्टर प्लान 2021 और निगम के नियमों के मद्देनजर सिर्फ सार्वजनिक सड़कों व जगहों, अधिकृत कॉलोनियों के आसपास के क्षेत्र में विकास कार्यों को निगम देखता है।
वहीं एमसीडी के आदेश को लेकर रिपोर्ट्स के मुताबिक निगम के वरिष्ठ अधिकारी एक रूटीन कार्रवाई मान रहे हैं।
स्थायी समिति की पॉवर को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका
दिल्ली की मेयर डॉ. शैली ओबेरॉय ने स्थायी समिति की पावर के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी है। मेयर ने स्थायी समिति का गठन होने तक उसकी शक्तियां निगम के सदन को दी जाएं। दिल्ली मेयर की इस अर्जी पर बीजेपी ने सवाल उठाया है। याचिका में मेयर ने एलजी को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि कानून का उल्लंघन करते हुए दिल्ली सरकार की सहायता और सलाह के बिना 3 और 4 जनवरी 2023 के आदेशों के माध्यम से वर्तमान में नॉमिनेटेड लोगों को नियुक्त किया। इन नियुक्तियों की वैधता पर फैसले का इंतजार है। मेयर का कहना है कि इन नियुक्तियों की वैधता का निर्धारण सीधे तौर पर स्थायी समिति के 18 में से 12 सदस्यों के चुनाव को प्रभावित करता है, जिससे बहुमत की प्राप्ति पर सीधा असर पड़ता है।












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