दिल्ली सरकार का 'मिशन बुनियाद', संवारेगा नौनिहालों का भविष्य
दिल्ली सरकार ने मिशन बुनियाद को तहत एक नई पहल की शुरूआत की है, जिसके तहत बच्चों के सीखने के अंतर को कम कि जा सकेगा। बच्चों को सीखने में आसानी होगी।

शिक्षा व्यवस्था में दिल्ली सरकार के नए प्रयोगों ने से राज्य की शिक्षा में कई बदलाव देखने को मिले। पहले की तुलना राज्य के शिक्षा व्यवस्था ही नहीं बल्कि पढ़ाने का तरीका भी बदला है। दिल्ली सरकार मिशन बुनियाद के तहत शिक्षा की दिशा में नए आयाम गढ़ रही है। हाल ही में सरकार और एमसीडी के स्कूलों में बच्चों के सीखने के लिए एक अनोखा असवसर उपलब्ध कराने का निर्णय आम आदमी पार्टी के नेतृत्व वाली केजरीवाल सरकार ने लिया है। इसके तहत तीसरी क्लास से लेकर 8वीं तक के बच्चों को कहानियों के पढ़ने के साथ सीखने की भी व्यवस्था होगी।
दिल्ली सरकार नए साल में मिशन बुनियाद पर अधिक फोकस कर रही है। सरकार ने इस कार्यक्रम को 31 अगस्त तक जारी रखने का निर्णय लिया है। शिक्षा विभाग के अनुसार इस मिशन के तहत छात्रों को उनका सिलेबस भी पढ़ाया जाएगा। दरअसल ये दावा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि हाल ही में दिल्ली की शिक्षा मंत्री आतिशी मार्लेना और नगर निगम की महापौर शैली ओबेरॉय की मौजूदगी में उच्च आधिकारियों के एक बैठक भी गई। जिसमें स्पष्ट किया गया कि मिशन बुनियाद के तहत दिल्ली सरकार कई तरह के कदम उठाने जा रही है।
मिशन बुनियाद के तहत अब बच्चों के लर्निंग स्तर को मजबूत करने पर दिल्ली सरकार के अलाव नगर निगम फोकस कर रहा है। राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद ने ठीक एक दिन पहले यानी शनिवार को शिक्षा निदेशालय और एमसीडी स्कूलों के प्रमुखों के लिए मिशन बुनियाद को लेकर संयुक्त ओरिएंटेशन प्रोग्राम आयोजित किया गया। जिसें दिल्ली सरकार में शिक्षा मंत्री आतिशी व दिल्ली नगर निगम की मेयर शैली ओबरॉय शामिल हुईं। दोनों नेताओं ने शिक्षा निदेशालय व एमसीडी स्कूलों के 2700 स्कूल प्रमुखों से चर्चा भी की। बैठक में इस बात की मंथन किया गया कि मिशन बुनियाद के तहत दिल्ली में बच्चों के लर्निंग क्षमता और अधिक कैसे विकसित किया जा सकता है और इसके लिए प्लान को किस तरह से लागू करना होगा।
बुनियादी शिक्षा के विकास संकल्प
दिल्ली सरकार लगातार दिल्ली में शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में कार्य कर रही है। राज्य की शिक्षा नीति में कई अहम बदलाव इस बात के गवाह रहे हैं। मिशन बुनियाद भी केजरीवाल सरकार की इसी सोच का हिस्सा है, जिसके तहत दिल्ली में स्कूल 1 अप्रैल से पूरी क्षमता के साथ काम कर रहे हैं। सरकार का पूरा ध्यान कक्षा 3 से 9 तक के छात्रों की बुनियादी शिक्षा पर है. जिसके अंतर्गत बच्चों की लिखने, पढ़ने और अंकगणित पर समझ मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। मिशन के तहत बच्चों के सीखने के स्तर के विकास का संकल्प है। इसके लिए बच्चों के साप्ताहिक मूल्यांकन के साथ हिंदी और गणित सिखाने पर जोर दिया जाता है। दिल्ली सरकार कोरोना महामारी के दौरान मिशन बुनियाद की शुरूआत की थी। जो 2 सालों बाद भी जारी है।
88 बच्चों के लर्निंग स्तर में सुधार
मिशन बुनियाद के तहत बच्चों की शिक्षा में अब तक सुधार की बात करें तो इसमें दिल्ली सरकार को काफी सफलता मिली है। शिक्षा निदेशालय की ओर से ये कहा गया कि दिल्ली शिक्षा विभाग के स्कूलों के कक्षा 3 से 5 तक के 88% और एमसीडी के 78% बच्चे शब्दों को पढ़ सकते हैं। जबकि कक्षा 6 से 9 तक के 90% छात्र पैराग्राफ को पढ़ पाने में सक्षम हैं। शिक्षा विभाग मिशन बुनियाद के तहत बच्चों की शिक्षा का मूल्यांकन जारी रखेगा। जुलाई में एक मेगा पीटीएम के जरिए माता-पिता को अपने बच्चों के सीखने के स्तर के बारे में सूचित किया जाएगा।












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