आज खुला गाजीपुर से दिल्ली वाला NH-1, महीनों से बंद पड़ा था, बॉर्डर पर अब ऐसे गुजर रहे हैं वाहन

नई दिल्ली। किसान आंदोलन के चलते महीनों से बंद पड़ा गाजीपुर-दिल्ली NH-1 रूट आज से खुल गया है। किसान आंदोलनकारी अपनी झुग्गी-झोपड़ियां और तंबू हटाकर यहां से चले गए हैं। इससे इस सड़क से गुजरने वाले वाले लोग अब राहत महसूस कर रहे हैं। चूंकि, यह वही रास्ता है, जो क्षेत्रवासियों को यूपी और दिल्ली बॉर्डर क्रॉस कराने का मुख्यमार्ग था।

Delhi-Ghazipur NH-1 route

लंबे समय से बंद गाजीपुर से दिल्ली जाने वाला यह रास्ता (NH-1) खुलने पर बहुत से लोगों को ताज्जुब हो रहा है। काफी लोगों को अभी इस बारे में पता भी नहीं चला होगा। यहां से गुजर रही एक लड़की प्राची ने कहा, "ये बहुत अच्छा हुआ। मेरा ऑफिस मेरे रूम से बहुत दूर है। यह रास्ता बंद होने से हम देरी से पहुंचते थे। काफी घूमकर जाना पड़ता था। अब टाइम से ऑफिस पहुंच जाया करेंगे।"

Delhi-Ghazipur NH-1 route

तस्वीरें देखकर आप खुद अंदाजा लगा सकते हैं कि, अभी से वाहनों का गुजरना शुरू हो गया है। एक कार सवार ने कहा कि, यह गाजीपुर से दिल्ली जाने वाला रास्ता है, जिसे NH-1 कहते हैं। इसे ही किसान आंदोलन वाला गाजीपुर बॉर्डर कहा जाता है। यह किसान आंदोलन के चलते लंबे समय से बंद था और आज से खोल दिया गया है। खबर में प्रस्तुत तस्वीरें (दिल्ली-यूपी बॉर्डर) से हैं।

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    Delhi-Ghazipur NH-1 route

    एक साल से ज्यादा समय तक चला किसान आंदोलन
    किसान संगठनों ने यहां केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ 2020 में विरोध-प्रदर्शन शुरू किया था। पिछले महीने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने के मोदी सरकार के फैसले के बाद अब किसान आंदोलन खत्म हो गया है। यह दिल्ली बार्डर पर एक साल से ज्यादा समय तक चला। कल से दिल्ली के हर बार्डर से किसानों की पूरी तरह से घर वापसी शुरू हुई, जिसके बाद अब गाजीपुर बार्डर, टीकरी बॉर्डर, सिंघु बॉर्डर पूरी तरह से आम लोगों के लिए खुल रहे हैं। इस आंदोलन को किसानों की जीत बताने वाले किसान नेता राकेश टिकैत हवन कर समर्थकों के साथ अपने घर वापस लौटे हैं। उन्होंने फतेह मार्च भी निकाला, जिसमें शामिल होने के लिए कई शहरों से किसान यूपी बार्डर गेट पहुंचे।

    मालूम हो कि, राकेश टिकैत ने बीते 12 दिसंबर को खुद कहा था कि, सभी किसान धरना स्थल छोड़ देंगे और किसानों की अगली बैठक 15 जनवरी को होगी। केंद्र सरकार ने किसानों को लिखित आश्वासन भी दिया। जिसके बाद किसानों ने अपना आंदोलन समाप्त करने का फैसला किया, हालांकि माना जा रहा है कि महापंचायतों का आयोजन अभी बंद नहीं होगा।'

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