Delhi Election: 70 में से 67 सीटों पर कांग्रेस की जमानत जब्त, मगर इन सीटों पर कर गई खेला
Delhi Election: दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजे सामने आ चुके हैं और भारतीय जनता पार्टी को 48 सीटें मिली है। वहीं, लगातार तीन बार सरकार बनाने का सपना देख रही आम आदमी पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा। आप को मात्र 22 सीटें मिली है। दूसरी ओर, कांग्रेस एक बार फिर शून्य पर सिमट गई।
दिल्ली चुनाव में कांग्रेस के 70 में से 67 उम्मीदवारों की जमानत तक जब्त हो गई। हालांकि, कांग्रेस के वोट शेयर में 2.1% का मामूली सुधार हुआ है। हालांकि, 70 सीटों पर हारने के बाद भी कांग्रेस पार्टी ने दिल्ली चुनाव में खेला कर दिया। दरअसल, गठबंधन न होने से वोटों का बंटवारा हुआ और बीजेपी की आक्रामक चुनावी रणनीति ने AAP की हार की पटकथा लिख दी।

दिल्ली विधानसभा चुनाव के जो नतीजे शनिवार 08 फरवरी को सामने आने है, उनसे एक बड़ा सवाल जरूर उठ खड़ा हुआ है। और वो सवाल है कि क्या आम आदमी पार्टी को ज्यादा अच्छा प्रदर्शन करने के लिए कांग्रेस के साथ हाथ मिलना चाहिए था? अगर हाथ मिलाते तो दिल्ली में झाड़ू कितनी चलती?
क्या कांग्रेस-आप के साथ आकर दिल्ली में चुनाव लड़ने से मौजूदा चुनावी समीकरण बदल सकते थे? दरअसल, लोकसभा चुनाव के वक्त भारतीय जनता पार्टी (BJP) को हराने के लिए तमात विपक्षी दलों ने इंडिया ब्लॉक बनाया था। इसमें कांग्रेस और आम आदमी पार्टी भी शामिल थी। लेकिन, विधानसभा चुनाव आते-आते दोनों दल अलग हो गए।
पहले हरियाणा तो अब दिल्ली में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने अलग-अलग चुनाव लड़ा। दोनों पार्टी के अलग-अलग चुनाव लड़न का सीधा फायदा भारतीय जनता पार्टी को हुआ। नतीजन दोनों जगह ही भारतीय जनता पार्टी की सरकार बन गई। हरियाणा में आप ने कांग्रेस के वोट काटे तो अब दिल्ली में इसका उलट देखन को मिला।
दिल्ली में कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी के वोट बैंक में सेंधमारी की। जिसका नतीजा, यह हुआ कि भाजपा को जबरदस्त फायदा मिला है। जबकि, आप को कई सीटों पर कुछ हजार वोटों से हार का सामना करना पड़ा। वहीं, कांग्रेस पार्टी का प्रदर्शन भले ही कमजोर रहा हो, लेकिन कई सीटों पर कांग्रेस के वोट आप के लिए गेम चेंजर साबित हो सकते थे।
कांग्रेस से गठबंधन न होना AAP के लिए साबित हुआ नुकसान
कांग्रेस पार्टी भले ही दिल्ली में चुनाव में हार गई...67 उम्मीदवारों की जमानत तक जब्त हो गई। लेकिन, आप का किला ढहाने में कांग्रेस ने भी बड़ी भूमिका निभाई है। जी हां..कांग्रेस द्वारा 70 सीटों पर उम्मीदवार उतारने से सबसे ज्यादा नुकसान आप का हुआ है। क्योंकि, केजरीवाल समेत मनीष सिसोदिया और सौरभ भारद्वाज जैसे AAP के बड़े नेता बहुत कम अंतर से सीट हार गए।
इन सीटों पर इस अंतर से अधिक वोट कांग्रेस उम्मीदवारों के पाले में गए। यानी साफ है कि कांग्रेस से गठबंधन न होना AAP के लिए बड़ा नुकसान साबित हुआ है। हालांकि, आप ने 70 में से 22 सीटें जीतीं,लेकिन इनमें से कई सीटों पर उसका वोट शेयर घट गया।
कांग्रेस ने बेशक कोई सीट नहीं जीती, लेकिन कई सीटों पर पार्टी का वोट शेयर 5 से 15 फीसदी तक बढ़ा है। वहीं, भाजपा ने कई ऐसी सीटें जीतीं, जहां आप और कांग्रेस के वोट बंटने से उसे फायदा हुआ। बता दें कि दिल्ली की 14 ऐसी सीटें हैं, जहां आप के उम्मीदवारों की हार सिर्फ कांग्रेस के वोट काटने के चलते हुई। यानी इन सीटों पर बीजेपी से ज्यादा कांग्रेस ने आप को नुकसान पहुंचाया।
कांग्रेस ने इन सीटों पर आप को पहुंचाया ज्यादा नुकसान
- कांग्रेस ने केजरीवाल की नई दिल्ली विधानसभा सीट पर सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया। यहां प्रवेश वर्मा ने 30088 वोटों के साथ जीत दर्ज कराई है। इस सीट पर केजरीवाल 4089 वोटों से हार गए। केजरीवाल को 25999 वोट मिले। वहीं, कांग्रेस के संदीप दीक्षित को 4568 वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
- कांग्रेस पार्टी ने ग्रेटर कैलाश सीट पर आप को नुकसान पहुंचाया है। इस सीट से तीन बार के विधायक सौरभ भारद्वाज को हार का सामना करना पड़ा। उन्हें बीजेपी की शिखा रॉय ने 3188 वोटों से हराया। यहां सौरभ भारद्वाज को 46406 वोट मिले। वहीं, कांग्रेस प्रत्याशी गर्वित सिंघवी 6711 वोट लेकर तीसरे स्थान पर रहे।
- कांग्रेस ने जंगपुरा सीट पर आप को नुकसान पहुंचाने का काम किया है। इस सीट परआम आदमी पार्टी (AAP) के प्रत्याशी मनीष सिसोदिया महज 675 वोटों से हार गए। वहीं, कांग्रेस के उम्मीदवार फरहद सूरी को 7,350 वोट मिले।
- अगर राजेंद्र नगर सीट की बात करें तो इस सीट से आप के दुर्गेश पाठक महज 1231 वोटों के अंतर से हार गए। उन्हें 45,440 वोट मिले, जबकि इस सीट पर कांग्रेस के विनीत यादव 4,015 को वोट मिले।












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