दिल्ली चुनाव में केजरीवाल को हराने के लिए BJP के सहयोगी ने चला दांव! NCP के अकेले चुनाव लड़ने से किसको नुकसान?
Delhi Election 2025: अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) दिल्ली विधानसभा चुनाव में अकेले चुनाव लड़ रही है। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने एनसीपी (अजित पवार) और शिवसेना (एकनाथ शिंदे) के साथ मिलकर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। लेकिन दिल्ली विधानसभा चुनाव में एनसीपी ने अकेले लड़ने का फैसला किया है।
नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने 11 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं। बुराड़ी से रतन त्यागी, बादली से मुलायम सिंह, मंगलोपुरी से खेम चंद, चांदनी चौक से खालिदुर्रहमान, बल्लीमारान से मोहम्मद हारून, छतरपुर से नरेंद्र तंवर, संगम विहार से कमर अहमद, ओखला से इमरान सैफी, लक्ष्मीनगर से नमाहा, सीमापुरी राजेश लोहिया, गोकुलपुरी से जगदीश भगत को टिकट दिया है।

Delhi Chunav 2025: एनसीपी के अकेले चुनाव लड़ने से किसको फायदा, किसको नुकसान
एनसीपी ने फिलहाल 11 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं और 25 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। एनसीपी के अकेले चुनाव लड़ने से दिल्ली के चुनावी समीकरण में बदल गए हैं। एनसीपी के अकेले चुनाव लड़ने भाजपा को फायदा हो सकता है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (AAP) को शिकस्त देने के लिए भाजपा ने अपने सहयोगी दलों को अकेले चुनाव लड़ने की सलाह दी है। संभावना ये भी है कि भाजपा दिल्ली की 70 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी।
NCP का दिल्ली में अकेले चुनाव लड़ने का उद्देश्य खासकर उन क्षेत्रों में अपना प्रभाव बढ़ाना हो सकता है, जहां वह स्थानीय स्तर पर पहचान बनाने की कोशिश कर रही है। अगर एनसीपी आम आदमी पार्टी (AAP) के खिलाफ उम्मीदवार खड़ा करती है, तो इससे उनके वोटों का विभाजन हो सकता है। अगर एनसीपी भाजपा के खिलाफ एक मजबूत उम्मीदवार खड़ा होता है, तो वह भाजपा के लिए भी चुनौती बन सकता है। ये स्थिति तब साफ हो गई जब भाजपा अपने उम्मीदवारों की घोषणा करेगी।
इस स्थिति में हो सकता है भाजपा को लाभ
भाजपा के लिए यह स्थिति लाभकारी भी हो सकती है अगर एनसीपी उन सीटों पर चुनाव लड़ती है जहां भाजपा का मुख्य प्रतिद्वंदी आप है। इस स्थिति में एनसीपी का उम्मीदवार AAP के वोट बैंक को प्रभावित कर सकता है और इससे भाजपा को फायदा हो सकता है क्योंकि AAP के वोट भाजपा को नहीं जाएंगे, लेकिन भाजपा को नजदीकी प्रतिद्वंदी का नुकसान हो सकता है।
एनसीपी को दिल्ली में AAP और भाजपा के बीच सीधे मुकाबले के मुकाबले कम स्थानीय प्रभाव का सामना करना पड़ सकता है। यह भी हो सकता है कि एनसीपी की उपस्थिति से कोई बड़ा राजनीतिक झटका ना लगे, क्योंकि उसकी स्थिर सीटें या प्रभाव ज्यादा नहीं हैं।
कुल मिलाकर एनसीपी के अकेले चुनाव लड़ने से भाजपा को ज्यादा नुकसान नहीं हो सकता है। लेकिन यह AAP को नुकसान पहुंचा सकता है और इससे भाजपा को कुछ लाभ भी मिल सकता है।












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