शराब नीति पर CAG की रिपोर्ट: दिल्ली चुनाव के बीच केजरीवाल की AAP पर क्या होगा असर?
Delhi Election 2025 CAG report: कंप्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल ऑफ इंडिया (CAG) की रिपोर्ट में कथित तौर पर कहा गया है कि दिल्ली सरकार की अब वापस ली गई आबकारी नीति के कारण राज्य के खजाने को 2,026 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। दावा किया जा रहा है कि CAG रिपोर्ट लीक हो गई है, इसमें सरकार को 2026 करोड़ रुपए का रेवेन्यू लॉस होने की बात कही गई है।
कैग रिपोर्ट पर भाजपा और कांग्रेस ने आप पर निशाना साधते हुए उस पर भ्रष्टाचार और खुली लूट में लिप्त होने का आरोप लगाया। रिपोर्ट, जिसे अभी दिल्ली विधानसभा में पेश किया जाना है, कथित तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के नेतृत्व में हुई चूक और उल्लंघन को उजागर करती है।

दिल्ली भाजपा प्रमुख वीरेंद्र सचदेवा ने कहा, "केजरीवाल सरकार द्वारा लागू की गई नई शराब नीति को दिल्ली विधानसभा ने मंजूरी नहीं दी थी और इसमें कई मामलों में पारदर्शिता का अभाव था... अगर भाजपा के विरोध के कारण अरविंद केजरीवाल को अपनी नई शराब नीति वापस लेने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता, तो अब तक नुकसान कम से कम 10,000 करोड़ रुपये को पार कर गया होता।"
ऐसे में आइए जानते हैं कि दिल्ली चुनाव के बीच आई इस CAG रिपोर्ट पर अरविंद केजरीवाल की AAP पर क्या असर होगा? इस रिपोर्ट का असर दिल्ली विधानसभा चुनाव पर क्या पड़ेगा, यह एक अहम सवाल है?
शराब नीति पर CAG की रिपोर्ट में क्या कहा?
CAG की एक रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि शराब नीति के क्रियान्वयन में कथित अनियमितताओं के कारण सरकारी खजाने को 2,026 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक लीक हुई CAG रिपोर्ट में लाइसेंस जारी करने में महत्वपूर्ण चूक, नीतिगत विचलन और उल्लंघनों को उजागर किया गया है।
इसमें यह भी जिक्र किया गया है कि नीति अपने इच्छित लक्ष्यों को प्राप्त करने में विफल रही और आप नेताओं ने कथित तौर पर रिश्वत का लाभ उठाया। रिपोर्ट में यह भी जिक्र किया गया है कि तत्कालीन उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के नेतृत्व वाले मंत्रियों के समूह (जीओएम) द्वारा विशेषज्ञ पैनल की सिफारिशों की अवहेलना की गई थी।
नवंबर 2021 में शुरू की गई शराब नीति का उद्देश्य दिल्ली में शराब की खुदरा बिक्री को बेहतर बनाना और राजस्व को अधिकतम करना था। हालांकि, भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के कारण ईडी और सीबीआई ने जांच की। तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, सिसोदिया और संजय सिंह समेत आप के कई शीर्ष नेताओं को गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, पिछले साल उन्हें जमानत मिल गई थी।
दिल्ली विधानसभा में अभी तक पेश नहीं की गई सीएजी रिपोर्ट से पता चला है कि शिकायतों के बावजूद सभी संस्थाओं को बोली लगाने की अनुमति दी गई और बोली लगाने वालों की वित्तीय स्थिति की जांच नहीं की गई। इसमें कहा गया है कि घाटे की रिपोर्ट करने वाली संस्थाओं को लाइसेंस दिए गए या फिर उनका नवीनीकरण भी किया गया।
इसके अलावा, सीएजी ने पाया कि उल्लंघन करने वालों को जानबूझकर दंडित नहीं किया गया। इसने यह भी उजागर किया कि नीति से संबंधित प्रमुख निर्णय कैबिनेट की मंजूरी या उपराज्यपाल की मंजूरी के बिना लिए गए थे। इसके अलावा, नए नियमों को आधिकारिक प्रक्रिया के विपरीत, विधानसभा के समक्ष अनुमोदन के लिए पेश नहीं किया गया।
अरविंद केजरीवाल और AAP पर प्रभाव
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के निकट आने के साथ ही यह रिपोर्ट केजरीवाल सरकार और उनकी पार्टी आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए एक चुनौती बन सकती है। AAP ने हमेशा अपनी छवि को पारदर्शिता और भ्रष्टाचार विरोधी पार्टी के रूप में प्रस्तुत किया है। ऐसे में शराब नीति पर उठे सवाल और CAG की रिपोर्ट उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती हैं।
AAP के विरोधी, विशेष रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस, इस मुद्दे को भुनाने की पूरी कोशिश करेंगे। बीजेपी ने पहले ही आरोप लगाया है कि केजरीवाल सरकार में भ्रष्टाचार बढ़ गया है और शराब नीति इसके प्रमाण के रूप में सामने आई है। कांग्रेस भी इस पर निशाना साधते हुए इसे केजरीवाल सरकार की नाकामी के रूप में पेश कर सकती है।
हालांकि AAP के लिए यह एक अवसर भी हो सकता है। पार्टी यह तर्क दे सकती है कि CAG की रिपोर्ट राजनीतिक दबाव में आई है और इसके आरोपों का जवाब पार्टी अपने तरीके से देगी। अगर CAG रिपोर्ट का असर दिल्ली के मतदाताओं पर पड़ता है, तो AAP को इसका भारी नुकसान होगा।












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