Delhi Crime: दिल्ली में किसका दबदबा? 4 दिन में फायरिंग से दहली राजधानी, NCRB के आंकड़ों में दबी चीखें!
Delhi Crime News: देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर गोलियों की गूंज से थर्राने लगी है। पिछले 4 दिनों में हुई कई घटनाओं ने शहर को हिलाकर रख दिया है, जिसमें फायरिंग और गैंगस्टर गतिविधियों का बोलबाला साफ नजर आ रहा है। ऐसे में, बढ़ते अपराध और गोलीबारी की घटनाओं ने एक बार फिर से राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राज्य की सरकार लगातार प्रशासनिक प्रमुख पर उंगलियां उठाने लगी है। हिमांशु भाऊ, गोल्डी बराड़, और गोगी गैंग जैसे नामों ने दिल्ली को अपना अड्डा बना लिया है। आइए जानते हैं दिल्ली में क्राइम या कानून?

दिल्ली में किसका दबदबा?
- नारायणा: 27 सितंबर की रात को तीन बदमाशों ने नारायणा के एक पुराने कार शोरूम पर ताबड़तोड़ फायरिंग की। गैंगस्टर हिमांशु भाऊ ने पांच करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी थी।
- महिपालपुर: 27 सितंबर की देर रात महिपालपुर स्थित एक होटल पर तीन बाइक सवार बदमाशों ने गोलियां बरसाईं। पीड़ित को गैंगस्टर गोल्डी बराड़ से धमकी मिली हुई थी।
- नांगलोई: 28 सितंबर सुबह सुल्तानपुर मोड़ पर रोशन हलवाई की दुकान पर बदमाशों ने फायरिंग की। इसके बाद गोगी गैंग के दीपक बॉक्सर समेत तीन गैंगस्टरों के नाम की पर्ची छोड़ गए।
- नांगलोई: 29 सितंबर को 30 वर्षीय पुलिस कांस्टेबल संदीप की सड़क पर एक हिंसक झड़प में जान चली गई। संदीप को लगभग 10 मीटर तक घसीटा गया।
NCRB के आंकड़े (पिछले 5 साल):
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि दिल्ली में अपराध की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। खासतौर पर संगठित अपराध और गैंगस्टर से जुड़े अपराधों में लगातार इजाफा हो रहा है।
- हत्या और हत्या के प्रयास: पिछले 5 सालों में दिल्ली में हत्या और हत्या के प्रयास की घटनाओं में लगभग 18% की वृद्धि दर्ज की गई है।
- फायरिंग: गोलीबारी की घटनाओं में भी इजाफा हुआ है, जिसमें मुख्य रूप से रंगदारी और आपसी दुश्मनी शामिल है।
- चोरी और लूटपाट: NCRB के अनुसार, दिल्ली में लूटपाट और चोरी की घटनाएं भी बढ़ी हैं, जिससे आम जनता के बीच असुरक्षा की भावना गहरी हो रही है।

अपराध दर के मामले में दिल्ली का स्थान
2023 की NCRB रिपोर्ट के अनुसार, अपराध दर के मामले में दिल्ली सबसे आगे है। दिल्ली की अपराध दर 1832.6 है, जो कि राष्ट्रीय औसत से 3.36 गुना अधिक है। जयपुर, इंदौर और पटना जैसे शहर भी अपराध के उच्च स्तर पर हैं, लेकिन दिल्ली की स्थिति सबसे चिंताजनक है।
महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध
ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध भी बढ़ते जा रहे हैं। NCRB की 2023 रिपोर्ट के अनुसार, महिलाओं के खिलाफ अपराध में 12.3% की वृद्धि दर्ज की गई है। 2022 में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ कुल 48,755 मामले दर्ज किए गए थे।

जिम्मेदार कौन?
दिल्ली में अपराध के बढ़ते ग्राफ के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें संगठित अपराध, प्रशासनिक विफलताएं और राजनीतिक अस्थिरता प्रमुख हैं।
- गैंगस्टर गतिविधियों का बढ़ना: पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में कई कुख्यात गैंग सक्रिय हो गए हैं। हिमांशु भाऊ, गोल्डी बराड़, और गोगी गैंग जैसे नामों का बढ़ता प्रभाव कानून-व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
- पुलिस और प्रशासन की नाकामी: बार-बार होने वाली फायरिंग और गैंगस्टर से जुड़े अपराध पुलिस की कमजोरी को उजागर करते हैं। अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई न होने के कारण उनका हौसला और बढ़ता जा रहा है।
- राजनीतिक अस्थिरता: दिल्ली की राज्य सरकार और केंद्र सरकार के बीच चल रही राजनीतिक खींचतान भी अपराध पर नियंत्रण न कर पाने की एक बड़ी वजह मानी जा रही है।
दिल्ली में अपराध का खाका
- 2013 - 80184
- 2014- 155654
- 2015- 191377
- 2016- 209519
- 2017- 233580
- 2018- 250719
- 2019- 301085
- 2020- 250324
- 2021- 293303
- 2022 - 159048 (15 जुलाई तक)
दिल्ली के प्रशासन के आलाकमान में कौन-कौन रहा?
- अजीत प्रताप सिंह (1966-1972) - दिल्ली के पहले उप-राज्यपाल थे, जिन्होंने इस पद की स्थापना के समय इसे संभाला।
- धीरेंद्र ब्रह्मचारी (1972-1980) - प्रसिद्ध योग गुरु के तौर पर जाने जाने वाले, वह दिल्ली के उप-राज्यपाल बने।
- तेजेंदर खन्ना (1997-1998, 2007-2013) - तेजेंदर खन्ना ने दो बार उप-राज्यपाल के रूप में सेवा की। उनकी कार्यावधि के दौरान कई प्रशासनिक और अवसंरचनात्मक विकास हुए।
- नजीब जंग (2013-2016) - कांग्रेस पार्टी के नजीब जंग ने उप-राज्यपाल के रूप में काम किया, और उनके कार्यकाल में दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार के बीच कई राजनीतिक खींचतान की घटनाएं हुईं।
- अनिल बैजल (2016-2022) - भाजपा के अनिल बैजल ने लंबे समय तक उप-राज्यपाल के रूप में कार्य किया, जिनके कार्यकाल के दौरान भी दिल्ली सरकार और उप-राज्यपाल कार्यालय के बीच मतभेद देखने को मिले।
- विनय कुमार सक्सेना (2022-वर्तमान) - भाजपा के विनय कुमार सक्सेना वर्तमान में दिल्ली के उप-राज्यपाल हैं।
दिल्ली की सत्ता पर कौन काबिज?
आपको बता दें कि साल 2013 से आम आदमी पार्टी की सत्ता दिल्ली पर काबिज है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने 2013 के चुनाव में शानदार जीत दर्ज की, और अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री बने। हालांकि, उन्होंने 49 दिनों के बाद इस्तीफा दे दिया, क्योंकि जन लोकपाल बिल पास नहीं हो पाया था।
इसके बाद, 2015 में आम आदमी पार्टी की सत्ता दिल्ली पर काबिज हुई। 2015 और फिर 2020 में भारी बहुमत से जीत हासिल कर, अरविंद केजरीवाल ने लगातार दो बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। दिल्ली की राजनीतिक स्थिति में बदलाव अक्सर केंद्र और राज्य सरकार के बीच खींचतान के कारण देखने को मिलता है, क्योंकि दिल्ली एक केंद्र शासित प्रदेश है और यहां उप-राज्यपाल की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। हाल ही, में दिल्ली की सत्ता पर बड़ा फेरबदल हुआ और आप पार्टी से आतिशी सिंह दिल्ली की नई मुख्यमंत्री बनी।
दिल्ली में बढ़ते अपराध और गोलीबारी की घटनाएं राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। NCRB के आंकड़े और हाल की घटनाएं यह दर्शाती हैं कि दिल्ली में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। जनता की सुरक्षा और विश्वास को दोबारा स्थापित करना अब सरकार और प्रशासन दोनों के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है।












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