Delhi Chunav Result 2025: नई दिल्ली सीट पर क्यों हारे अरविंद केजरीवाल? AAP सुप्रीमो की हार की 5 बड़ी वजह
Delhi Chunav Result 2025: आम आदमी पार्टी (AAP) सुप्रीमो और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल नई दिल्ली सीट पर चुनाव हार गए हैं। उनकी हार अप्रत्याशित नहीं है, क्योंकि चुनाव के दौरान से ही ऐसी जमीनी रिपोर्ट आ रही थी, जिसमें आप सुप्रीमो की स्थिति इस बार डंवाडोल बताई जा रही थी। कुल मिलाकर मोटे तौर पर 5 ऐसे कारण रहे हैं, जिसकी वजह से अपने ही गढ़ में केजरीवाल की लुटिया डूब गई है।
नई दिल्ली सीट पर पहली बार केजरीवाल ने 2013 में दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री और कांग्रेस की दिग्गज शीला दीक्षित को हराया था। उसके बाद वह 2015 और 2020 में भी उन्होंने वहां धमाकेदार जीत दर्ज की और तीन-तीन बार दिल्ली के मुख्यमंत्री बने। लेकिन, इस बार उसी सीट पर दिल्ली के एक पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा के बेटे ने और भाजपा के पूर्व सांसद प्रवेश वर्मा ने उन्हें हरा दिया है।

Delhi Chunav Result 2025: पहला) क्यों हारे केजरीवाल- एक दशक से अधिक की एंटी-इंकंबेंसी
नई दिल्ली सीट पर केजरीवाल के खिलाफ एक दशक से ज्यादा की सत्ता-विरोधी लहर (Anti Incumbency) उनके खिलाफ गई। नई दिल्ली सीट पर अगर देश प्रथम नागरिक के तौर पर राष्ट्रपति वोटर हैं तो यहां झुग्गियों और मलिन बस्तियों में भी बड़ी आबादी रहती है।
इस बार नई दिल्ली सीट पर झुग्गी-झोपड़ी से लेकर सभ्रांत इलाकों में भी अरविंद केजरीवाल के कामकाज को लेकर उंगलियां उठ रही थीं। पूरे भारत के सत्ता के केंद्र वाले इलाके में भी वोटरों में पानी और इसी तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। तरह-तरह के वादों दावों के बावजूद लोग रोजगार नहीं मिलने को लेकर नाराज थे।
हाल ही में वाल्मीकि बस्ती में लोगों ने सरेआम आम आदमी पार्टी (AAP) की प्रचार गाड़ी पर हमला बोल दिया था। उनका आरोप था कि केजरीवाल ने बीते 10-12 वर्षों में उनके साथ छलावे के अलावा कुछ नहीं किया है।
Delhi Chunav Parinam 2025: दूसरा) नई दिल्ली में क्यों हारे केजरीवाल?- बहुत ही मुश्किल समीकरण
नई दिल्ली सीट पर इस बार बीजेपी ने अपने दो बार के सांसद और पूर्व सीएम साहिब सिंह वर्मा के बेटे प्रवेश वर्मा और कांग्रेस ने पूर्व सीएम शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित को टिकट दिया था। केजरीवाल ने जब इस सीट पर पहली बार शीला दीक्षित को हराया था, तब वह उनपर बहुत गंभीर आरोप लगाकर जीते थे। लेकिन, एक दशक से ज्यादा समय तक सत्ता में रहने के बावजूद वह किसी भी आरोप को साबित नहीं कर पाए।
इससे संदीप दीक्षित को जहां मतदाताओं का सहानुभूति उठाने का मौका मिला, वहीं इसने बीजेपी के पक्ष में भी माहौल बनाने का मौका दिया। आप की ओर से लोगों को जो फ्री की सुविधाएं दी जा रही हैं, बीजेपी की ओर से खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन सबको जारी रखने का वादा किया है, साथ ही साथ उससे भी बढ़कर कई ठोस कल्याणकारी योजनाओं को लेकर संकल्प दिखाया है।
इस इलाके में बड़ी तादाद में सरकारी कर्मचारी भी हैं,और केंद्र सरकार ने जिस तरह से इस बार के बजट में आयकर में मध्यम वर्ग को बहुत बड़ी रियायत दी है, उसने भी केजरीवाल का सियासी काम तमाम काम करने का काम किया है।
Delhi Election Result 2025 News: तीसरा) नई दिल्ली में क्यों हारे केजरीवाल?- कोर वोटरों में बढ़ी नाराजगी
अनुसूचित जाति (SC), झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोग और दिल्ली के ऑटो वालों को कभी केजरीवाल और आम आदमी पार्टी (AAP) का कट्टर समर्थक माना जाता है। लेकिन, इस बार केजरीवाल के इन सभी समर्थकों में नाराजगी देखी जा रही थी। वाल्मीकि समाज के लोगों में जहां रोजगार को लेकर निराशा थी, वहीं झुग्गी-झोपड़ी वाले रोजमर्रा की दिक्कतों से परेशान थे। वहीं ऑटो वाले दिल्ली सरकार के विभागों में जारी भ्रष्टाचार से नाराज हो गया था। दूसरी ओर पीएम मोदी ने झुग्गी वालों को पक्का मकान बांटने का सिलसिला शुरू कर दिया था।
Delhi Assembly Chunav Result 2025: चौथा) नई दिल्ली से क्यों हारे केजरीवाल?-घोटालों के भयंकर आरोप
अरविंद केजरीवाल ईमानदार राजनीति के नाम पर सत्ता में आए थे। लेकिन, वह और उनकी पूरी पार्टी भ्रष्टाचार और घोटालों के आरोपों में बुरी तरह से घिर गई। केजरीवाल समेत पार्टी के तमाम नेता तिहाड़ जेल में रहे, लेकिन नैतिकता के नाम पर भी कुर्सी नहीं छोड़ी। केजरीवाल ने तब जाकर इस्तीफा दिया, जब सुप्रीम कोर्ट ने जमानत तो दी, लेकिन ऐसी शर्तें लगा दीं कि न तो मुख्यमंत्री कार्यालय जा सकते हैं और ना ही किसी फाइल पर साइन कर सकते हैं।
फिर भी इस चुनाव में केजरीवाल खुद को अगले सीएम के तौर पर प्रोजेक्ट कर रहे थे, जो बात नई दिल्ली सीट के मतदाताओं को पच नहीं पाई और उन्होंने केजरीवाल की जगह प्रवेश वर्मा पर भरोसा जता दिया।
Delhi Chunav Result 2025: पांचवां) नई दिल्ली सीट से क्यों हारे केजरीवाल?- आम आदमी वाली राजनीति पर भारी 'शीशमहल' वाला दाग
केजरीवाल अपने वोटरों की नजरों में सबसे ज्यादा तब खटकने लगे, जब उनपर यह आरोप लगे कि उन्होंने मफलर की राजनीति की और अपने सरकारी आवास पर जनता के पैसे पानी की तरह बहा दिए। सीएजी रिपोर्ट तक में उनकी फिजूलखर्ची को लेकर रिपोर्ट सामने आई।
नई दिल्ली सीट पर सभ्रांत वोटरों का एक बड़ा तबका भी केजरीवाल समर्थक रहा है, लेकिन कोविड के समय एक मुख्यमंत्री के आलीशान हवेली के नाम पर हुई कथित फिजूलखर्ची को बर्दाश्त करने के लिए तैयार नहीं हो पाए।
विपक्षी बीजेपी ने उनके खिलाफ इस मुद्दे को लेकर जो 'शीशमहल' वाला अभियान चलाया, लगता है कि वह कारगर साबित हुआ और केजरीवाल को उन्हीं वोटरों ने चुनावों में धूल चटाने का काम किया, जो लगातार तीन बार से उन्हें सिर-आंखों पर बिठाते आ रहे थे।
दिल्ली चुनाव के नतीजे (ECI) यहां देखें
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