Delhi Chunav 2025: AIMIM के ताहिर हुसैन के चुनाव प्रचार से भाजपा को होगा फायदा! जानिए कैसे?
Delhi Chunav 2025: दिल्ली विधानसभा चुनाव में राजधानी की मुस्तफाबाद विधानसभा सीट खूब सुर्खियां बटोर रही है। इसकी वजह है कि इस सीट से ओवैसी की AIMIM ने इस सीट से जेल में बंद दिल्ली दंगों के संदिग्ध आरोपी ताहिर हुसैन को चुनाव मैदान में उतारा है।
इतना ही नहीं 2020 से जेल में बंद ताहिर हुसैन को दिल्ली में चुनाव प्रचार के लिए सुप्रीम कोर्टसे 72 घंटे की पैरोल मिली चुकी है। जिसके बाद ताहिर हुसैन ने युद्ध स्तर पर चुनाव प्रचार शुरू कर दिया है। ताहिर हुसैन के मुस्तफाबाद सीट पर चुनाव प्रचार शुरू करने के बाद तमाम अटकलें लगाई जा रही हैं लेकिन इस सीट का राजीनीतिक समीकरण देखा जाए तो ताहिर के प्रचार से भाजपा को सबसे ज्यादा लाभ हो सकता है। आइए जानते हैं कैसे?

गौतरलब है कि 2008 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई दिल्ली की मुस्तफाबाद सीट पर तीन पार्टियां जीत हासिल कर चुकी है। जिसमें AAP ने दो बार जीत हासिल की है, जबकि भाजपा और कांग्रेस ने एक-एक बार जीत हासिल की है।
मुस्तफाबाद सीट के वोटर्स
मुस्तफाबाद सीट पर मुस्लिम वोटर्स का बोलबाला है, इस सीट पर लगभग 40 प्रतिशत वोटर्स मुस्लिम हैं और 60 फीसदी हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक वोटर्स हैं। हिंदू आबादी में, सबसे महत्वपूर्ण संख्या पिछड़े वर्गों, ब्राह्मणों और ठाकुरों की है, जो सामूहिक रूप से लगभग 30 प्रतिशत वोट बनाते हैं।
मुस्तफाबाद सीट के उम्मीदवार
मुस्तफाबाद सीट पर कांग्रेस, आप और ओवैसी की पार्टी ने तीन मजबूत मुस्लिम उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतार कर मुकाबला सख्त कर दिया है। आम आदमी पार्टी ने पूर्व विधायक हसन अहमद के बेटे आदिल अहमद को मैदान में उतारा है, जबकि कांग्रेस ने अली मेंहदी को टिकट दिया है और एआईएमआईएम ने ताहिर हुसैन को उम्मीदवार बनाया है। वहीं बीजेपी ने करावल नगर से पूर्व विधायक मोहन सिंह बिष्ट पर दांव लगाया है।
यानी इस सीट पर भाजपा अकेली बड़ी पार्टी है जिसने हिंदू उम्मीदवार को उम्मीदवार बनाया है। तीन मुस्लिम उम्मीदवार के बीच 40 फीसदी मुस्लिम वोट बंट सकता है जिससे भाजपा को फायदा हो सकता है।
ताहिर के प्रचार से भाजपा को फायदा?
स्थानीय स्तर पर चर्चित और पूर्व वार्ड पार्षद ताहिर हुसैन को चुनाव प्रचार के लिए पैरोल पर रिहा किए जाने के बाद सहानुभूति वोट मिलने की उम्मीद है। ताहिर की पैरोल प्रभावशाली मुस्लिम उम्मीदवारों के बीच प्रतिस्पर्धा से मुस्लिम वोटों में विभाजन हो सकता है, जिसका फायदा भाजपा को मिल सकता है।
वोटों के धुव्रीकरण से भाजपा को लाभ
दिल्ली में 70 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें से 12 मुस्लिम बहुल मानी जाती हैं। अगर एआईएमआईएम के आक्रामक प्रचार और ताहिर के सहानुभूति वोट हासिल करने के प्रयास से ध्रुवीकरण बढ़ता है, तो भाजपा को सीधा लाभ मिल सकता है।
भाजपा 2015 में जीत चुकी है ये मुस्तफाबाद सीट
मुस्तफाबाद उन कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है, जहां मुस्लिम आबादी काफी है और जहां भाजपा पहले भी जीत हासिल कर चुकी है। भाजपा ने 2015 में यहां आप की लहर के बावजूद जीत हासिल की थी, जब भाजपा के जगदीश प्रधान ने आप के हसन अहमद को 6,031 वोटों से हराया था। ताहिर के मैदान में उतरने से भाजपा की 2015 के चुनाव परिणामों को दोहराने की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
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