Delhi Blast Update: लाल किला ब्लास्ट के बाद केंद्र सरकार सख्त, अब रॉ चीफ संभालेंगे पीएम मोदी की सुरक्षा
Delhi Blast Update: दिल्ली के लाल किले के पास हुए भीषण कार ब्लास्ट मामले की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। इस धमाके में अब तक 8 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि कई गंभीर रूप से घायल हैं। इस बीच, सरकार ने देश की सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने और जांच की गति बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
बुधवार (12 नवंबर) को केंद्र सरकार ने रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) के प्रमुख पराग जैन को कैबिनेट सचिवालय में सुरक्षा सचिव (Secretary, Security) का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है। यह निर्णय कैबिनेट की अपॉइंटमेंट्स कमेटी (Appointments Committee of the Cabinet) द्वारा पारित आदेश के तहत लिया गया है।

सरकार का आदेश: "तुरंत प्रभाव से कार्यभार संभालें"
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) द्वारा जारी आदेश में कहा गया कि सक्षम प्राधिकारी ने निर्णय लिया है कि आईपीएस अधिकारी पराग जैन जो वर्तमान में कैबिनेट सचिवालय के अंतर्गत रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (R&AW) के सचिव हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से सुरक्षा सचिव का अतिरिक्त प्रभार सौंपा जाता है। यह जिम्मेदारी नियमित नियुक्ति होने तक या अगले आदेश तक जारी रहेगी। यह नियुक्ति ऐसे समय पर की गई है जब आंतरिक सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने और विभिन्न खुफिया एजेंसियों के बीच समन्वय की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
'सुरक्षा सचिव' का अहम दायित्व
कैबिनेट सचिवालय में सुरक्षा सचिव का पद बेहद रणनीतिक और संवेदनशील माना जाता है। यह भूमिका देश के आंतरिक सुरक्षा तंत्र की निगरानी, खुफिया एजेंसियों के समन्वय, और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों व गणमान्य व्यक्तियों की सुरक्षा व्यवस्था को देखती है।
पराग जैन की नियुक्ति को केंद्र सरकार की उस रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जिसके तहत जांच की निरंतरता और ऑपरेशनल स्थिरता बनाए रखी जा सके। लाल किला ब्लास्ट जैसे संवेदनशील मामलों में कई एजेंसियों की भूमिका होती है - R&AW, IB, NIA और दिल्ली पुलिस - ऐसे में एक अनुभवी अधिकारी के नेतृत्व में इन एजेंसियों का समन्वय बेहद जरूरी है।
कौन हैं पराग जैन?
पराग जैन, 1989 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी हैं, और पंजाब कैडर से आते हैं। उन्होंने 1 जुलाई को भारत की बाह्य खुफिया एजेंसी (R&AW) के प्रमुख का पदभार संभाला था। उनका कार्यकाल दो वर्षों के लिए निर्धारित है। पराग जैन को देश की खुफिया दुनिया में रणनीतिक और ऑपरेशनल प्लानिंग का विशेषज्ञ माना जाता है। वे विशेष रूप से 'ऑपरेशन सिंदूर' के प्रमुख योजनाकारों में से एक रहे हैं - यह वह मिशन था जिसे भारत ने पुलवामा हमले के बाद आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई के तौर पर अंजाम दिया था।
कैबिनेट बैठक में रेड फोर्ट ब्लास्ट को 'आतंकी हमला' घोषित
बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में सरकार ने रेड फोर्ट कार ब्लास्ट को स्पष्ट रूप से "आतंकी घटना" (Terrorist Incident) घोषित किया। बैठक में प्रधानमंत्री ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और निर्देश दिया कि दोषियों, सहयोगियों और साजिशकर्ताओं को जल्द से जल्द न्याय के कटघरे में लाया जाए। केंद्र सरकार ने जांच एजेंसियों को "उच्चतम प्राथमिकता और तेजी" के साथ कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
क्यों मिली ये अहम जिम्मेदारी?
सुत्रों के अनुसार, पराग जैन की नई जिम्मेदारी के तहत देश के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों, राजधानी के हाई-वैल्यू जोन, और खुफिया समन्वय प्रोटोकॉल की समीक्षा की जाएगी। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब जांच एजेंसियां 32 पुरानी गाड़ियों में विस्फोटक लगाने की साजिश जैसी भयावह योजनाओं का खुलासा कर चुकी हैं।
लाल किला ब्लास्ट की जांच अब न सिर्फ एक आतंकी केस, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की परीक्षा बन चुकी है। सरकार का पराग जैन को सुरक्षा सचिव का अतिरिक्त प्रभार देना इस बात का संकेत है कि केंद्र अब इस मामले को टॉप-लेवल निगरानी में रखना चाहता है। जहां एक ओर देश इस हमले से स्तब्ध है, वहीं अब खुफिया एजेंसियों की जिम्मेदारी और भी बढ़ गई है ताकि ऐसी किसी भी साजिश को समय रहते नाकाम किया जा सके।












Click it and Unblock the Notifications