Delhi Chunav: दिल्ली दंगों के आरोपी ताहिर हुसैन को नामांकन दाखिल करने के लिए मिली पैरोल, कोर्ट ने कही यह बात

Delhi Assembly Elections 2025: कड़कड़डूमा कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए ताहिर हुसैन और शिफा उर रहमान को हिरासत पैरोल पर रिहा करने का आदेश दिया है। जिससे उन्हें आगामी दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के लिए नामांकन दाखिल करने की अनुमति मिल गई। दोनों उम्मीदवारों को यह छूट उनकी लोकतांत्रिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए दी गई। जो उनके चल रहे कानूनी मामलों के बीच न्यायपालिका की संवेदनशीलता को दर्शाता है।

ताहिर हुसैन को मिली राहत

ताहिर हुसैन जो पहले AAP के पार्षद थे और अब AIMIM पार्टी के उम्मीदवार हैं। उन पर दिल्ली दंगों 2020 से जुड़े कई गंभीर आरोप हैं। इनमें आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या, मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य 11 मामलों के आरोप शामिल हैं।

delhi court

हाल ही में उच्च न्यायालय ने उनकी अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हालांकि कोर्ट ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया में उनकी भागीदारी को ध्यान में रखते हुए उन्हें हिरासत पैरोल दी। जिससे वह एसडीएम करावल नगर कार्यालय में जाकर अपना नामांकन दाखिल कर सकें।

शिफा उर रहमान को भी कस्टडी पैरोल

ताहिर हुसैन के साथ AIMIM के एक और उम्मीदवार शिफा उर रहमान को भी कोर्ट ने हिरासत पैरोल की मंजूरी दी। रहमान भी 2020 के दिल्ली दंगों में कथित संलिप्तता को लेकर कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे हैं। कोर्ट ने उन्हें नामांकन प्रक्रिया पूरी करने के लिए अतिरिक्त दिन की छूट भी दी है।

अदालत का संतुलित नजरिया

कड़कड़डूमा कोर्ट ने अपने फैसले में साफ किया कि हिरासत पैरोल केवल चुनावी प्रक्रिया में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए दी गई है। दोनों उम्मीदवारों को एसडीएम कार्यालय तक सीमित समय के लिए ले जाया जाएगा। पुलिस की निगरानी में यह प्रक्रिया पूरी होगी। अगर आवश्यक हुआ तो नामांकन के लिए एक अतिरिक्त दिन की अनुमति होगी।

दिल्ली दंगों के मामले में हुसैन और रहमान पर आरोप

ताहिर हुसैन और शिफा उर रहमान पर दिल्ली पुलिस ने गंभीर आरोप लगाए हैं। हुसैन पर अंकित शर्मा की हत्या और दंगों में भूमिका, मनी लॉन्ड्रिंग और दंगों के लिए फंडिंग करने और रहमान पर दंगों की साजिश रचने और भड़काने के आरोप है।

दिल्ली पुलिस का तर्क और कोर्ट का रुख

दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में तर्क दिया कि हुसैन और रहमान का चुनाव में भाग लेना सामाजिक सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है। हालांकि अदालत ने इसे मौलिक अधिकारों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा मानते हुए चुनावी प्रक्रिया के लिए अस्थायी रिहाई की अनुमति दी।

सियासी और कानूनी माहौल पर प्रभाव

2025 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में AIMIM की तरफ से हुसैन और रहमान की उम्मीदवारी ने राजनीतिक और कानूनी बहस को जन्म दिया है। चुनावी प्रक्रिया बनाम कानूनी बाधाएं, गंभीर आरोपों के बावजूद चुनाव लड़ने का अधिकार कैसे सुरक्षित किया जाए। आरोपों के बीच चुनावी मैदान में उतरने वाले उम्मीदवारों को लेकर जनता का भरोसा। लोकतंत्र और कानून के बीच संतुलन बनाना।

विशेष प्रावधान और फैसले की अहमियत

यह फैसला न्यायपालिका के विवेकपूर्ण दृष्टिकोण और लोकतांत्रिक अधिकारों को बनाए रखने के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। ताहिर हुसैन और शिफा उर रहमान की हिरासत पैरोल यह सुनिश्चित करती है कि चुनावी प्रक्रिया बाधित न हो। भले ही कानूनी लड़ाई जारी रहे।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+