लाल किला हमले के आंतकियों को फांसी पर लटकाने की तैयारी शुरू, तिहाड़ जेल में मांगा डेथ वारंट
Delhi 2000 Red Fort strike, जेल के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि उन्होंने इस महीने की शुरुआत में अदालत को फांसी की प्रकिया शुरू करने के लिए लिखा है। अधिकारियों ने सजा के लिए डेंट वारंट जारी करने की अपील की है।

Delhi 2000 Red Fort strike, साल 2020 में दिल्ली के लाल किले पर आतंकी हमले में दोषी करार लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी मोहम्मद आरिफ उर्फ अशफाक को फांसी की सजा सुनाई गई थी। अशफाक अभी दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है। अब अशफाक के लिए मौत की सजा की तारीख को अंतिम रूप देने के लिए दिल्ली के तिहाड़ जेल अधिकारियों ने तीस हजारी अदालत को लिखा है।
जेल के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि उन्होंने इस महीने की शुरुआत में अदालत को फांसी की प्रकिया शुरू करने के लिए लिखा है। अधिकारियों ने सजा के लिए डेंट वारंट जारी करने की अपील की है। तिहाड़ जेल के अधिकारी ने कहा कि मामला 27 फरवरी के लिए सूचीबद्ध है। आरिफ ने राष्ट्रपति से अपनी सजा कम करने की अपील नहीं की है।
माना जा रहा है कि, आतंकी आरिफ को अभी फांसी देने इतना आसान नहीं रहेगा। क्योंकि आरिफ के पास अंत समय में भी दोबारा सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रपति से दया याचिका लगाने का मौका है। जो फांसी के और टाल सकता है। बता दें कि दिल्ली के लाल किले पर तैनात जवानों पर 22 दिसंबर, 2000 को पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा के छह आतंकियों ने हमला कर दिया था।
लश्कर के इन आतंकियों ने जवानों की बैरक पर अंधाधुंध गोलियां बरसाई थीं। हमला करने के बाद आतंकी मौके से फरार हो गए थे। लाल किले में भारतीय सेना की राजपूताना राइफल्स की यूनिट 7 तैनात थी और उन पर गोलियां चला दीं। हमले में सेना के तीन जवान शहीद हो गए थे। जांच में सामने आया कि सभी आतंकी लाल किले में लाइट एंड साउंड शो देखने के बहाने घुसे थे।
ये आतंकी हमला करने के बाद में किले की पिछली ओर की दीवार को लांघ कर भाग निकले थे। जिसके बाद पुलिस ने इस मामले में आरिफ के अरेस्ट किया था। पुलिस की जांच में पता चला था कि लश्कर के संदिग्ध आतंकी बिलाल अहमद के अकाउंट में 29.50 लाख रुपये हवाला के जरिए ट्रांसफर किए गए थे। यह पैसे मोहम्मद आरिफ ने ही ट्रांसफर किए थे। वह इस हमले का मास्टरमाइंड था। अशफाक को हवाला के जरिए यह पैसा पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स के जरिए मिला था।
अक्टूबर 2005 में निचली अदालत ने आरिफ को मौत की सजा सुनाई थी। उसकी इस सजा को दिल्ली उच्च न्यायालय ने सितंबर 2007 में बरकरार रखा था। इसके बाद उसने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अगस्त 2011 में शीर्ष अदालत ने आरिफ को दी गई मौत की सजा को बरकरार रखते हुए याचिका को खारिज कर दिया था।
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