दिल्ली में कोरोना के डेल्टा वेरिएंट की फरवरी से जुलाई तक बढ़ी रफ्तार, 91 फीसदी तक की हुई बढ़ोतरी
नई दिल्ली, सितंबर 10। देश में आई कोरोना की दूसरी लहर राजधानी दिल्ली की चौथी लहर थी। कोरोना के अल्फा वेरिएंट के मुकाबले दिल्ली में डेल्टा वेरिएंट ने खतरनाक रूप धारण कर लिया था। वैसे तो अल्फा वेरिएंट के मुकाबले डेल्टा वेरिएंट के अधिक घातक होने के समय-समय पर कई सबूत मिलते गए हैं, लेकिन जीनोम सर्विलांस की डिटेल वाली रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के कई प्रयोगशालाओं में Sars-Cov-2 के तेजी से फैलने वाले डेल्टा वैरिएंट के सैंपलों में फरवरी से जुलाई के बीच 0 से बढ़कर 91 प्रतिशत की हिस्सेदारी देखी गई है। इन दस्तावेजों के मूल्यांकन से ये भी पता चलता है कि डेल्टा वेरिएंट जंगल में आग की तरह फैला था।

फरवरी से जुलाई तक कैसे बढ़ी डेल्टा वेरिएंट की रफ्तार
आपको बता दें कि राजधानी दिल्ली में कोरोना के डेल्टा वेरिएंट के तेजी से फैलने के कई सबूत मिले हैं। डेल्टा वेरिएंट कैसे तेजी से फैला, इससे संबंधित कई अनदेखे विवरण दस्तावेज़ में मिल रहे हैं। मार्च में 47.4% सैंपल अल्फा वैरिएंट (जिसे B.1.1.7 के रूप में भी जाना जाता है और पहली बार यूके में पाया गया) के पाए गए थे। उस वक्त डेल्टा वेरिएंट की संख्या केवल 0.9% थी, लेकिन इसके अगले ही महीने जब अल्फा के सैंपल घटकर 12.1% हो गए तो डेल्टा वेरिएंट की संख्या बढ़कर 54% हो गई। ये सिलसिल जारी रहा और जुलाई तक, डेल्टा के मामलों में 91% का उछाल था जबकि अल्फा घटकर 2.3% हो गया।
हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक, NCDC, ILBS, और लोक नायक अस्पताल के द्वारा एकत्रित किए गए 6673 सैंपल जीनोम सीक्वेंसिंग पर आधारित पाए गए। ये जानकरी स्वास्थ्य विभाग ने 27 अगस्त को एक बैठक में दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) को साझा की।
दिल्ली में कोरोना का हाल
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आपको बता दें कि दिल्ली में अब कोरोना की चौथी लहर का असर काफी कम हो गया है। एक समय दिल्ली में 25 हजार के करीब केस आ रहे हैं थे, लेकिन अब दिल्ली में कोरोना संक्रमित मरीजों का आंकड़ा तीन डिजीट से कम है। गुरुवार को दिल्ली में कोरोना के 36 नए मामले मिले, जबकि एक भी मरीज की कोरोना के कारण मौत नहीं हुई।












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