कौन हैं अरविंदर सिंह लवली जिन्होंने दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष पद से दिया इस्तीफा, क्या फिर से BJP में जाएंगे?
दिल्ली में लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को चिट्ठी लिखकर इस्तीफे की वजह भी बताई है।
बताया जा रहा है कि लवली ने दिल्ली कांग्रेस प्रभारी महासचिव दीपक बाबरिया के साथ अनबन के चलते पद छोड़ा है। इसके अलावा लवली दिल्ली में आप संग गठबंधन होने और टिकट बंटवारे में कम सीटें आने से भी नाराज बताए जा रहे हैं।

अरविंदर सिंह लवली ने कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे को चिट्ठी भेजी है। इसमें उन्होंने लिखा है कि दिल्ली कांग्रेस इकाई उस पार्टी के साथ गठबंधन के खिलाफ थी, जो कांग्रेस पार्टी के खिलाफ झूठे, मनगढ़ंत और दुर्भावनापूर्ण भ्रष्टाचार के आरोप लगाने के आधार पर बनी थी। इसके बावजूद, पार्टी ने दिल्ली में AAP के साथ गठबंधन करने का फैसला किया।
पार्टी ने पिछले साल 31 अगस्त को लवली को दिल्ली कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया था। लवली, शीला दीक्षित की सरकार में 15 साल तक परिवहन और शिक्षा समेत कई मंत्रालय संभाल चुके हैं। दिल्ली के सिख समुदाय में उनकी अच्छी पैठ है।
अरविंदर सिंह लवली का जन्म साल 1968 में गांधीनगर में हुआ। बचपन से ही राजनीति में रुचि होने के कारण दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करते वक्त गुरु तेग बहादुर कॉलेज के स्टूडेंट यूनियन के अध्यक्ष चुने गए। कुछ साल बाद वह भीमराव अम्बेडकर कॉलेज के चेयरमैन भी बने।
साल 1990 में अरविंदर सिंह लवली दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के महासचिव भी नियुक्त किये गए। 1992 से 1996 तक वह एनएसयूआई के महासचिव भी रह चुके हैं। लवली साल 1998 में लली गांधीनगर से विधायक चुने गए। वे 2003, 2008 और 2013 में भी विधायक रहे। साल 2003 से 2013 तक वह दिल्ली सरकार में मंत्री भी बने रहे।
2017 में नगर निगम चुनाव से अरविंदर सिंह लवली भाजपा में शामिल हो गए थे। हालांकि, महज एक साल के भीतर ही उन्होंने बीजेपी छोड़ फिर से कांग्रेस ज्वाइन कर लिया था। कांग्रेस में वापसी करते हुए लवली ने कहा था कि वो वैचारिक रूप से वहां फिट नहीं बैठ रहे थे।
अरविंदर सिंह लवली के इस्तीफे के बाद बीजेपी नेता आरपी सिंह ने कहा कि कांग्रेस में सब ठीक ठाक नहीं है। एक परिवार पूरी तरह से पार्टी का डिसीजन लेता है। साथ ही जिस तरह से कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी के साथ समझौता किया है उससे कार्यकर्ता परेशान हैं। पार्टी के अंदर लोगों का सांस घुट रही है, उन्हें घुटन महसूस हो रही है, इसलिए ये सब हो रहा है।












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