अध्यादेश पर PM मोदी का 10 साल पुराना ट्वीट, केजरीवाल का तंज, बोले- ऑर्डिनेंस क्यों लाए सर?
Narendra Modi Tweet On Ordinance: अध्यादेश पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 10 पहले किए गए ट्वीट को रीट्वीट करते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि अध्यादेश क्यों लाए सर?

दिल्ली में अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर केजरीवाल सरकार और केंद्र सरकार के बीच तल्खी बढ़ती जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटने के लिए केंद्र सरकार द्वारा अध्यादेश लाए जाने के बाद से आम आदमी पार्टी के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल लगातार हमलावर हैं। वह लगातार प्रधानमंत्री मोदी को टारगेट कर रहे हैं। इसी क्रम में आज एक बार फिर अरविंद केजरीवाल ने पीएम मोदी के 10 साल पुराने ट्वीट को निकालकर उन्हें घेरने की कोशिश की है। उन्होंने पूछा है कि सर आप अध्यादेश क्यों लाए?
क्या है पीएम मोदी का 10 साल पुराना ट्वीट
बता दें कि केजरीवाल ने जो पीएम मोदी का 10 साल पुराना ट्वीट जो निकाला है उस समय अध्यादेश को लेकर प्रधानमंत्री की अलग राय थी। प्रधानमंत्री ने 14 जुलाई 2013 को ट्वीट करते हुए लिखा था कि संसद वैसे भी बैठक कर रही है। केंद्र संसद को भरोसे में क्यों नहीं ले सका और एक अच्छा बिल क्यों नहीं दे सका? अध्यादेश क्यों? अब पीएम के इसी 10 साल पुराने ट्वीट को याद दिलाते हुए केजरीवाल ने पूछा है कि सर अध्यादेश क्यों लाए?
इससे पहले कल भी केजरीवाल ने पीएम मोदी को घेरा था
वहीं कल यानी बीते 20 मई को भी अरविंद केजरीवाल ने प्रेसकॉन्फ्रेंस कर प्रधानमंत्री मोदी और केंद्र सरकार को घेरा था। अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि केजरीवाल छोटी चीज़ है, जनता बड़ी है। मैं दिल्ली के एक-एक घर जाऊंगा, लोगों को बताऊंगा कि कैसे इन्होंने जनता के अधिकारों को छीना है। अगर देश में इस तरह से तानाशाही आ जाएगी तो जनता जिंदा कैसे रहेगी? ऐसा लगता है कि ये लड़ाई Centre Vs Supreme Court बन गई है। सुप्रीम कोर्ट कोई भी ऑर्डर केंद्र सरकार के खिलाफ़ करेगा, तो ये लोग Ordinance लाकर उसको उलट देंगे। देश की जनता कहां जाएगी?
केंद्र सरकार के अध्यादेश में क्या है?
केंद्र सरकार के अध्यादेश में लिखा गया है कि दिल्ली केंद्र शासित प्रदेश है, लेकिन विधायिका के साथ दिल्ली में प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रपति कार्यालय कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संस्थान और अथॉरिटीज काम कर रही हैं। सुप्रीम कोर्ट समेत कई संवैधानिक संस्थाएं हैं। विदेशी और तमाम ऑफिस हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया गया है।












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