आप ने पूछा, 'एक देश और एक कानून के बावजूद दिल्ली के साथ ऐसा बर्ताव क्यों '

नई दिल्ली। चुनाव आयोग द्वारा 'लाभ के पद' के आरोप में आप के 20 विधायकों की सदस्यता रद्द करने की सिफारिश पर आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को निशाने पर लिया है। आम आदमी पार्टी के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से इस मामले को लेकर एक के बाद एक कई ट्वीट किए गए। जिसमें पार्टी ने पूछा है कि इस तरह की कार्यवाही केवल आम आदमी पार्टी के साथ क्यों हो रही है,अन्य के साथ क्यों नहीं।

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आप ने चुनाव आयोग से ट्वीट कर सवाल पूछे कि, देश के अलग-अलग राज्यों में भी सरकारों ने संसदीय सचिव नियुक्ति किये, दिल्ली समेत कई राज्यों में न्यायालय ने उनकी नियुक्ति पर रोक लगा दी, लेकिन चुनाव आयोग ने फैसला सिर्फ दिल्ली के विधायकों को लेकर ही क्यों दिया ?

वहीं दूसरा ट्वीट कर लिखा, अन्य राज्यों की सरकारों ने संसदीय सचिव नियुक्त किये, जिसके नाम पर करोड़ो, अरबों का फण्ड खर्च हुआ, दिल्ली सरकार ने भी संसदीय सचिव नियुक्त किये लेकिन एक भी रुपया खर्च नहीं किया, तो फिर AAP के साथ ये भेदभाव क्यों ? अन्य राज्यों में जहां भी संसदीय सचिव बनाये गए वहाँ उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया और सभी सुविधाएं दी गईं, दिल्ली में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ, फिर भी हमारे साथ भेदभाव किया जा रहा है

एक देश और एक कानून की बात करने वाले लोग आज चुनाव आय़ोग द्वारा हमारे 20 विधायकों को अयोग्य ठहरा दिए जाने पर बहुत खुश है, लेकिन सिर्फ दिल्ली के विधायकों के साथ ही ऐसा क्यों बर्ताव किया जा रहा है? क्या यही एक देश और एक कानून है? इस ट्वीट के साथ एक वीडियो भी पोस्ट किया है। इसमें बताया गया है कि, 2012 में पंजाब में 24 संसदीय सचिव बनाए गए थे लेकिन उन्हें अयोग्य करार नहीं दिया।

इसी तरह अरुणाचल में 2016 में 26, मेघायल 2017 में 18, नागालैंड 2017 में 26, 2015 में दिल्ली में 21, 2016 में गुजरात में 8, 2015 में छत्तीसगढ़ में 15, 2016 में राजस्थान में 10, 2013 में उत्तराखंड में 12 संसदीय सचिव थे लेकिन इस पर चुनाव आयोग ने कोई कार्यवाही नहीं की।

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