Chitrakoot: माघी पूर्णिमा पर मंदाकिनी नदी में आस्था की डुबकी, चित्रकूट के घाटों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
Chitrakoot News: चित्रकूट के घाटों पर माघी पूर्णिमा को लेकर श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा है। जहां श्रद्धालु स्नान और पूजा पाठ करने के बाद दान करते हुए दिख रहे हैं। इस बीच श्रद्धालु जल चढ़ाकर पूजा करते हुए दिख रहे हैं।
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की तपोस्थली पवित्र नगरी चित्रकूट धाम में माघ पूर्णिमा के अवसर पर हजारों की तादाद में श्रद्धालु मंदाकिनी नदी में स्नान कर दान पुण्य करते हुए नजर आ रहे हैं।

बता दें कि माघ पूर्णिमा के अवसर पर पवित्र नदियों में स्नान के बाद दान पुण्य करने का विशेष महत्व होता है। ऐसी मानता है कि चित्रकूट की पवित्र नदी मंदाकिनी में स्नान करने का बहुत विशेष ही महत्व है।
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क्योंकि प्रयागराज जो सभी तीर्थों के राजा कहलाते हैं और वो भी जब पापों से भर जाते हैं। तब अपने पाप धोने के लिए स्वयं चित्रकूट आते है और मंदाकिनी में स्नान करते हैं।
रामायण श्री राम चरित मानस सहित अन्य वेद पुराणों के अनुसार जिस समय भगवान श्रीराम को चौदह वर्षों का वनवास हुआ था। तब भगवान श्री राम ने माता जानकी और भाई लक्ष्मण जी के सहित वनवास काल के साढ़े 11 वर्ष इसी चित्रकूट धाम में बिताया था।
साथ ही अपने पितरों के मोक्ष के लिए मंदाकनी नदी में श्राद्ध और तर्पण किया था। इसलिए मंदाकिनी नदी में स्नान का विशेष महत्व बढ़ जाता है।इसी मान्यता और विश्वास के चलते माघ मास में चित्रकूट की मंदाकिनी नदी में श्रृद्धालु भक्त एक महीने तक स्नान करते हैं।
आज माघ माह का आखिरी स्नान माघी पूर्णिमा है। जिसके चलते लोग माघ मास में आखिरी स्नान करने के लिए मंदाकिनी नदी के विभिन्न घाटों पर पहुंचे हैं। और हजारों की तादाद में श्रद्धालु स्नान के बाद दान पुण्य कर मंदिरों में दर्शन पूजन करते हुए नजर आ रहे हैं। इस दौरान प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए है।
संतोष शास्त्री(श्रद्धालु) ने वन इंडिया हिंदी को जानकारी दी की जो एक महीने लगातार माघ मास में सुबह स्नान करते हैं। उनको विशेष लाभ पुण्य फल प्राप्त होता है। स्नान के बाद लोग तिल कंबल जैसी वस्तुओं का दान करते हैं। पवित्र नदियों में स्नान से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।












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