भूपेश बघेल के अपने पिता नंद कुमार बघेल से क्यों रहे हैं मतभेद ? पीएम मोदी के खिलाफ जताई थी ये ख्वाहिश
रायपुर, 7 सितंबर: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को अपने बुजुर्ग पिता नंद कुमार बघेल के विवादास्पद बयानों के चलते पहलीबार फजीहत नहीं झेलनी पड़ी है। उनकी विवादित टिप्पणियों और विवादों की एक लंबी फेहरिस्त है, जिसको लेकर विरोधी कई बार भूपेश बघेल की ओर भी उंगली उठा चुके हैं। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ के सीएम के पिता को ब्राह्मण समाज के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी के लिए गिरफ्तार किया गया है और अदालत ने उन्हें 15 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। इससे पहले अपने 86 वर्षीय पिता के सिरफिरे बयान को लेकर एफआईआर दर्ज होने पर मुख्यमंत्री ने कहा था कि कानून से ऊपर कोई नहीं है।

भूपेश बघेल को क्यों देनी पड़ी थी चेतावनी
जुलाई 2018 की बात है, छत्तीसगढ़ के तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल को एक चिट्ठी जारी करके पार्टी कार्यकर्ताओं को चेतावनी देनी पड़ी थी कि उनके पिता नंद कुमार बघेल कांग्रेस के सदस्य नहीं हैं, इसलिए अगर कोई उनके साथ किसी भी तरह की गतिविधियों में शामिल पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। दरअसल, उस समय कांग्रेस प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रही थी और बघेल के पिता ने प्रदेश के ब्राह्मण नेताओं के खिलाफ विवादित बयान दे दिया था। बुजुर्ग बघेल ने कह दिया था कि सत्यनारायण शर्मा और अरुण वोरा जैसे नेता राजस्थानी ब्राह्मण हैं, इसलिए उन्हें कांग्रेस का टिकट नहीं मिलना चाहिए।
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बघेल ने जब राहुल गांधी को बताया था अपना 'छोटा बेटा'
इससे पहले उन्होंने अप्रैल 2018 में एक कथित वीडियो भी जारी किया था, जिसमें वो कथित रूप से दावा कर रहे थे कि तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष 'राहुल गांधी उनके छोटे बेटे हैं' और भूपेश बघेल उनके बड़े बेटे हैं। तब रिपोर्ट में ये भी दावे किए गए थे कि कांग्रेस का टिकट मांगने वाले कई दावेदार उनसे संपर्क में हैं और वह प्रदेश अध्यक्ष (अपने बेटे भूपेश बघेल को) उनके नामों की सिफारिश करेंगे।

पिता से सार्वजनिक तौर पर जाहिर कर चुके हैं मतभेद
नंद कुमार बघेल मतदाता जागृति मंच के नाम का संगठन चलाते हैं और विवादित बयानों के लिए कुख्यात हो चुके हैं। जब ब्राह्मण समाज के खिलाफ बुजुर्ग बघेल ने मौजूदा विवादास्पद टिप्पणी की तो मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि पिता होने के नाते वह उनका सम्मान जरूर करते हैं, लेकिन सीएम होने के नाते समाज में शांति और भाईचारा बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने न सिर्फ अपने पिता के खिलाफ कानून के मुताबिक ऐक्शन लेने की बात कही, बल्कि समाज के एक वर्ग के लिए आपत्तिजनक बयान पर दुख भी जताया। इससे पहले भी नंद कुमार पटेल खुद अपने बेटे की कैबिनेट में ऊंची जातियों के मंत्रियों के खिलाफ विवादास्पद टिप्पणी कर चुके हैं। यही वजह है कि मौजूदा कांड से पहले भी कई बार भूपेश बघेल को अपने पिता से वैचारिक मतभेद की बात कबूल करनी पड़ चुकी है। वो मीडिया से भी कहते रहे हैं कि उनके पिता की बातों को उनसे जोड़कर तूल न दें और खबरों को उन्हीं के नाम से कोट करें।

पहले भी जेल जा चुके हैं नंद कुमार बघेल
सीएम बघेल के मुताबिक पिता से उनके वैचारिक मतभेद बचपन के दिनों से ही रहे हैं। नंद कुमार पटेल को इससे पहले भी अजीत जोगी सरकार के दौरान ऐसी ही हरकत के लिए जेल जाना पड़ा था। उस सरकार में भूपेश बघेल भी कैबिनेट मंत्री थे। जानकारी के मुताबिक उस वक्त भी भूपेश बघेल ने पिता को जेल से निकलवाने के लिए कोई कवायद नहीं की थी, अलबत्ता दिवाली आई तो उनके लिए जेल में मिठाइयां जरूर भिजवाई थी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जोगी ने भूपेश बघेल से जब पिता को लेकर सवाल किया तो उन्होंने यही कहा था कि उनसे वैचारिक मतभेद हैं और कानून के मुताबिक काम होने दें।

धार्मिक मान्यताओं को लेकर भी अलग नजरिया
पिता-पुत्र में यह मतभेद सिर्फ वैचारिक और राजनीतिक ही नहीं है, धार्मिक मान्यताओं को लेकर भी दोनों की राह अलग दिखाई पड़े हैं। मसलन, जब नंद कुमार बघेल की पत्नी या भूपेश बघेल की मां विध्येश्वरी बघेल का निधन हुआ था तो धार्मिक रीति-रिवाज अपनाने को लेकर दोनों का अलग नजरिया दिखा था। क्योंकि, भूपेश बघेल और उनका पूरा परिवार सनातन धर्म के अनुसार पिंडदान और अस्थियों के पवित्र गंगा में प्रवाहित करने के पक्षधर थे। लेकिन, उनके पिता अपनी पत्नी का अंतिम संस्कार बौद्ध रीतियों के मुताबिक बौद्ध भिक्षुओं के साथ राजिम में कर रहे थे।

बघेल ने पीएम मोदी के खिलाफ जताई थी ये ख्वाहिश
2019 के लोकसभा चुनावों से कुछ महीने पहले नंद कुमार बघेल तब सुर्खियों में आए थे, जब उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने की इच्छा जता दी थी। उन्होंने मीडिया वालों से कहा था कि अगर कांग्रेस उन्हें टिकट देती है तो वह "तानाशाह" मोदी को हरा देंगे और राहुल गांधी को देश का अगला प्रधानमंत्री बनाएंगे। तब उन्होंने यहां तक ऐलान कर दिया था कि अगर कांग्रेस ने टिकट नहीं दिया तो वे पीएम मोदी के खिलाफ निर्दलीय ही चुनाव मैदान में उतर जाएंगे। हालांकि, उनकी दोनों ही ख्वाहिशें तब अधूरी रह गई थी।

पीएम मोदी के खिलाफ चुनाव नहीं लड़ने की रखी थी शर्त
दिलचस्प बात है कि छत्तीसगढ़ के सीएम के पिता ने उस समय एक और छोटा वीडियो जारी किया था, जिसमें वह यह कहते सुनाई दे रहे थे कि अगर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत पीएम मोदी की जगह भाजपा के बुजुर्ग नेता लालकृष्ण आडवाणी या मुरली मनोहर जोशी को ले आएंगे तो वह वाराणसी से चुनाव लड़ने का अपना फैसला वापस ले लेंगे। तब सूत्रों ने वन इंडिया से कहा था कि 'सब कुछ गांधी परिवार का ध्यान खींचने के लिए किया जा रहा है। भूपेश, जो कि पहले अपने पिता के बयानों पर नाखुशी जताते रहे हैं, वह आश्चर्यजनक तौर पर उनकी इस बचकानी हरकत पर चुप हैं।'












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