जब तहसील कोर्ट में 'खुद' पेश हुए भगवान भोलेनाथ, छत्तीसगढ़ में सरकारी महकमे का 'अद्वितीय' कारनामा

रायगढ़, 27 मार्च: इंसानी विवाद की वजह से खुद भगवान को धरती की किसी अदालत में पेश होना पड़े, ऐसा वाक्या शायद ही कभी सुनने को मिला हो। लेकिन, छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में सरकारी महकमे ने यह कारनामा भी कर दिखाया है। मामला थोड़ा अजीब है, लेकिन पुरी तरह से सच्चाई पर आधारित है। दरअसल, किसी व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई थी कि एक शिव मंदिर सरकारी जमीन को अतिक्रमण करके बनाया गया है। इस मामले की सुनवाई के लिए जब तहसीलदार ने नोटिस जारी किया तो उसने मंदिर के पुजारी या संरक्षक या कर्ताधर्ता के नाम समन भेजने की जगह सीधे शिव मंदिर को अपने सामने पेश होने का हुक्म सुना दिया। इसके बाद जो कुछ हुआ, वह बहुत ही अप्रिय है।

जब तहसील कोर्ट में 'खुद' पेश हुए भगवान भोलेनाथ

जब तहसील कोर्ट में 'खुद' पेश हुए भगवान भोलेनाथ

छत्तीसगढ़ के एक तहसील कार्यालय से एक शिव मंदिर के खिलाफ समन जारी कर दिया गया और साथ ही साथ इस आदेश के तामील नहीं होने पर 10,000 रुपये जुर्माना वसूले जाने की चेतावनी भी जारी कर दी गई। तहसील कोर्ट के भय से उस मंदिर का पुजारी इतना डर गया कि उसने शिव मंदिर से शिवलिंग को ही उखाड़ लिया और ठेले पर लेकर तहसील दफ्तर में पेश होने के लिए पहुंच गया। घटना छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से करीब 250 किलोमीटर दूर रायगढ़ जिले की है। सुनने में अटपटा जरूर लगता है, लेकिन सच्चाई ये है कि 10 लोगों के खिलाफ सरकारी जमीन पर अतिक्रमण का आरोप लगाते हुए यह शिकायत की गई थी और तहसीलदार ऑफिस ने 'शिव मंदिर' समेत बाकी सभी लोगों को समन जारी कर दिया।

शिव मंदिर के नाम से जारी किया गया था समन

शिव मंदिर के नाम से जारी किया गया था समन

मंदिर के नाम से जारी समन में उसकी देखभाल करने वाले किसी पुजारी या दूसरे व्यक्ति का जिक्र नहीं था, इसलिए उसकी देखभाल करने वाला पूरी तरह से असमंजस में पड़ गया। उसे 10,000 रुपये जुर्माने का ऐसा डर हुआ कि उसने तय किया कि तहसील कोर्ट में खुद 'भगवान शिव' को पेश करने से अच्छा कोई विकल्प नहीं बचा है। जब मंदिर से 'शिवलिंग' को उखाड़ कर कोर्ट ले जाने की खबर फैली तो इलाके में सनसनी मच गया। भगवान के साथ-साथ बड़ी तादाद में लोग ठेले के पीछे-पीछे तहसीलदार ऑफिस की ओर बढ़ चले। दरअसल, तहसीलदार कार्यालय की ओर से इस मामले में जिन 10 कब्जाधारियों के नाम से नोटिस जारी किया गया था, उनमें से छठे स्थान पर शिव मंदिर का नाम था। जबकि, यह मंदिर सार्वजनिक है।

दोबारा से नोटिस भेजने की दी गई जानकारी

दोबारा से नोटिस भेजने की दी गई जानकारी

जब तहसील अधिकारियों को इस बात की भनक लगी तो उनके हाथ-पांव कांपने लगने। जब उन्होंने फौरन समन की भाषा को क्रॉस चेक किया तो उन्हें बहुत बड़ी गलती का पता चला। फिर आनन-फानन में तहसील कार्यालय में चैंबर के बाहर सूचना लगा दी गई कि पीठासीन अधिकारी किसी दूसरे सरकारी कम में लगे हुए हैं, इसलिए आज इस मामले की सुनवाई नहीं होगी। बाद में तहसीलदार ने कहा कि गलती से नोटिस मंदिर के नाम पर भेज दिया गया था। उन्होंने दोबारा से संबंधित लोगों के नाम से नोटिस जारी करने की बात कही है।

13 अप्रैल को होगी अगली सुनवाई

13 अप्रैल को होगी अगली सुनवाई

अब तहसील कोर्ट में इस मामले की 13 अप्रैल को सुनवाई होगी। दरअसल, यह मामला एक स्थानीय निवासी की याचिका पर सामने आया है, जिसमें दावा किया गया है कि उस शिव मंदिर का निर्माण सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करके किया गया है। जानकारी के मुताबिक जब भगवान का काफिला तहसील पहुंचा तो कार्यालय से संबंधित अधिकारी पहले से ही वहां से खिसक गए थे। इस मामले पर राजनीति भी शुरू हो गई।

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