अगर घूमने के हैं शौकीन तो छत्तीसगढ़ के ये 5 बेस्ट डेस्टिनेशन जरूर जाएं, पहाड़ों और नदियों का उठाएं लुत्फ

रायपुर। छत्तीसगढ़ भारत का मध्य राज्य है, जो मध्यप्रदेश से अलग होकर बना। वैसे तो हम सबमें से अधिकांश लोग घूमने के लिए पहाड़ों की तरफ रूख करते हैं या फिर उन जगहों पर जाना पसंद करते हैं, जहां पार्टी वाला माहौल है। लेकिन अगर आप खुद के साथ वक्त बिताना चाहते हैं तो आपके लिए छत्तीसगढ़ के ये 5 डेस्टिनेशन परफेक्ट हैं। आइए जानते हैं उन पांच जगहों के बारे में जहां आप खुद से मिल सकते हैं।

चिरमिरी

चिरमिरी

चिरमिरी छत्तीसगढ़ का बेहद ही खूबसूरत हिल स्टेशन है। कोरिया जिले में स्थित चिरमिरी को छत्तीसगढ़ का स्वर्ग कहा जाता है। यहां पर हरे-भरे पेड़, पहाड़, मंदिर और नदियां इसे बेहद ही खूबसूरत बनाती हैं। प्रकृति प्रेमियों के लिए यह बहुत ही सुकून वाली जगह है। चिरमिरी रेल और सड़क मार्ग के जरिये प्रमुख शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।

कैलाश और कोटुसमर गुफा

कैलाश और कोटुसमर गुफा

छत्तीसगढ़ के जगदलपुर जिले से महज 40 किलोमीटर दूर स्थित कैलाश और कोटुसमर की गुफाएं भारत की सबसे लंबी गुफाओं में शामिल हैं। 1993 में इसकी खोज की गई थी। बहुत अंदर तक जाने के बाद इस गुफा में ऑक्सीजन काफी मुश्किल से मिलता है। यह गुफा घने जंगलों के बीच मौजूद है। यहां पर ताली बजाने से खोखली दिवारों से हिलती हुई संगीतमय आवाज निकलती है।

तीरथगढ़ वॉटरफॉल

तीरथगढ़ वॉटरफॉल

छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में कांगेर नदी की सहायक नदी मुनगा और बहार नदी के बीच में यह वॉरफॉल है, जो लगभग तीन सौ फीट ऊंचाई से नीचे गिरता है। इस झरने के पास ही शिव जी और पार्वती माता का एक मंदिर भी है। यहां की खूबसूरती देखने लायक है। इस वॉरफॉल के अलावा छत्तीसगढ़ में तातापानी, रक्सगंडा सहित कई जलप्रपात हैं।

मैनपाट

मैनपाट

मैनपाट को छत्तीसगढ़ का शिमला और मिनी तिब्बत भी कहा जाता है। इसे मिनी तिब्बत इसलिए कहते हैं कि क्योंकि जब तिब्बत पर चीन ने आक्रमण किया था तो तिब्बत शरणार्थियों ने यहां शरण ली थी। यहां आपको संस्कृतियों और अलग-अलग परंपराओं का संगम देखने को मिल सकता है। भागदौड़ भरे जीवन से दूर होकर कुछ दिन सुकून पाने वाले पर्यटकों के लिए यह जगह किसी स्वर्ग से कम नहीं है।

ढोलकल गणेश

ढोलकल गणेश

ढोलकल गणेश छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले से केवल 18 किलोमीटर दूर स्थित फरसपाल गांव के पास बैलाडिला पहाड़ी पर स्थित है। करीब तीन हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यहां पर गणेशजी की एक विशालकाय और प्राचीन मूर्ति स्थापित की गई है। इस मंदिर तक पहुंचने के लिए आपको बैलाडीला के जंगलों में ट्रैकिंग करना पड़ेगी और ऊंची पहाड़ी पर चढ़ान भी होगा।

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