सूरजपुर: नकली नक्सलियों ने लगाया फोन, पिता से मांगे 10 लाख, नहीं मिली फिरौती तो कर डाला ऐसा कांड
सूरजपुर जिले में तीन नाबालिक पैसों की लालच में अपने ही दोस्त के जान के दुश्मन बन गए। इन्होने अपने दोस्त के अपहरण की प्लानिंग कर उसे अगवा किया, जिसके बाद 17 वर्षीय अरमान के पिता से 10 लाख की फिरौती मांग की।
सूरजपुर, 22 अगस्त। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में तीन नाबालिक पैसों की लालच में अपने ही दोस्त के जान के दुश्मन बन गए। इन्होने अपने दोस्त के अपहरण की प्लानिंग की और मघ्यप्रदेश से उसे अगवा किया, जिसके बाद 17 वर्षीय अरमान के पिता से 10 लाख की फिरौती मांग करने लगे, मांग की रकम नही मिलने पर आरोपियों ने अरमान को मौत के घाट उतार दिया।

नक्सली बनकर लगाया फोन
पूरा मामला सूरजपुर जिले के ओडगी क्षेत्र का है जहाँ तीन नाबालिगों ने मध्यप्रदेश से अपने दोस्त अरमान को घुमाने के बहाने छत्तीसगढ़ साथ ले आए। लेकिन छत्तीसगढ़ पहुंचते ही अरमान को बंधक बना लिया। तीनो ने अरमान के पिता से फिरौती की रकम मांगने के लिए स्वयं को नक्सली बताया। अरमान के पिता को नक्सली बनकर फोन लगाया और 10 लाख रुपए मांग की। रुपए नहीं मिलने पर पर उन्होंने अरमान की हत्या करने की धमकी दी।

17 अगस्त से लापता था अरमान
दरअसल छत्तीसगढ़ के मध्य प्रदेश सीमा से लगे विन्ध्यनगर थाना क्षेत्र के सिम्प्लेक्स कॉलोनी निवासी 16 वर्षीय अरमान खान 17 अगस्त से घर से लापता था, जिसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट उसके पिता रकीब अहमद ने जयंत चौकी में दर्ज कराई, उन्होने पुलिस को बताया कि उनका 16 वर्षीय पुत्र अरमान 17 अगस्त की दोपहर अपनी मोटर साइकिल से कहीं जाने के लिए निकला लेकिन देर शाम तक घर नहीं आया। उसका मोबाइल भी बंद है। इस मामले में विंध्यनगर निरीक्षक यूपी सिंह ने केस दर्ज कर खोजबीन शुरू की। 19 अगस्त को पिता रकीब अहमद के मोबाइल पर पुत्र अरमान के फोन से कॉल कर 10 लाख की फिरौती मांगी गई।
लोकेशन ट्रेस करने पर पुलिस को हुआ शक
परिजनों की रिपोर्ट दर्ज करने के बाद पुलिस हरकत में आई और अरमान का लास्ट कॉल लोकेशन ट्रेस करना शुरू किया। इधर शनिवार की रात अरमान का शव चांदनी बिहारपुर के बाक घाट जंगल के खाई में मिला। पुलिस ने शव का शिनाख्त कर जिला चिकित्सालय में रखवा दिया। जिसके बाद परिजनों को इसकी सूचना दी गई। परिजनों के अनुसार उसके तीन दोस्त कुछ दिन पहले घर आए थे।

पुलिस ने बताया कि अरमान के परिजन को किसी बीमा क्लेम से करीब 10 लाख रुपए मुआवजा मिला था। इससे अरमान के लिए पिता ने एक नई बाइक सहित कुछ अन्य कीमती सामान खरीदा था। जिसे देखकर उसके दोस्तों को भी उन रुपयों का लालच आ गया और उन्होंने अरमान को अगवा कर पिता से रुपये मांगने का प्लान बनाया।
दोस्त ही निकले हत्यारे
इस प्लान के तहत तीनो नाबालिकों ने उसे घुमाने का बहाना कर छत्तीसगढ़ ले आए। यहां लेकर अरमान को बन्धक बनाया, पूछताछ में आरोपी नाबालिगों ने बताया कि इसके कारण उन्होंने अरमान के पिता से 10 लाख रुपए डिमांड किया, लेकिन पिता ने रुपए देने में असमर्थ बताया। लेकिन इन सबके बीच नाबालिक अरमान अपने तीनो दोस्तों को पहचान चुका था । अरमान को छोड़ने से तीनों के फंसने के डर था इसलिए तीनो नाबालिकों ने उसकी हत्या कर दी और शव को खाई में फेंक दिया। तीनों नाबालिग आरोपी में एक बिहारपुर क्षेत्र और दो एमपी के तियरा व सरसवाह के रहने वाले हैं।
ऐसे दिया घटना को अंजाम
एसपी ने बताया कि फिरौती मांगने वालों को पकड़ने के लिए टीमें गठित की गई। टीम ने लापता किशोर के एक दोस्त श्याम कार्तिक को पकड़ कर पूछताछ की तो सच्चाई सामने आई। पूछताछ करने पर श्याम कार्तिक ने बताया कि पिछले कुछ दिन पहले मेरी अरमान से दोस्ती हुई थी। अरमान के मोटर साइकिल एवं खर्च करने के तरीके से लगा कि वह बड़ा आदमी है। फिर उसने अपने बुआ के बेटे रामकया व एक रिश्तेदार अमरेश के साथ एक योजना बनाई। तीनों ने बांक के जंगल झनझन कुंड के पास अरमान के पास मौजूद रुपये, मोबाइल, गाड़ी, हेलमेट आदि लूट लिया। इसके बाद उसे चाकू दिखाकर झनझन कुंड के किनारे ले जाकर फेंक दिया। पकड़े न जाए इस डर से उसकी मोटर साइकिल को मकरोहर के जंगल में छिपा दिया।












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