Success Story: जहां किया चपरासी का काम, अब वहीं असिस्टेंट कमिश्नर, जानें शैलेन्द्र के संघर्ष की पूरी कहानी
Shailendra Kumar Bandhe Success Story: छत्तीसगढ़ के 29 वर्षीय शैलेन्द्र कुमार बंधे ने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प से साबित कर दिया कि सफलता किसी भी स्थिति में हासिल की जा सकती है। मैकेनिकल इंजीनियरिंग में एनआईटी रायपुर से बीटेक करने के बाद भी उन्होंने सरकारी सेवा का सपना देखा और छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की परीक्षा पास कर सहायक आयुक्त (Assistant Commissioner ) राज्य कर का पद हासिल किया।
शैलेन्द्र ने CGPSC 2023 में 73वीं रैंक (जनरल कैटेगरी) और 2वीं रैंक (आरक्षित वर्ग) हासिल की। खास बात यह है कि शैलेन्द्र PSC में चपरासी का काम करते थे, लेकिन वक्त का पहिया ऐसा घूमा और अब अफर बनकर लौटे हैं। यह यात्रा सिर्फ उनकी शैक्षणिक योग्यता की नहीं, बल्कि उनके अदम्य साहस और धैर्य की मिसाल है...

कैसे मिली सफलता?
परिवार का साथ: शैलेन्द्र अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता के अटूट समर्थन को देते हैं। उन्होंने हर मुश्किल घड़ी में अपने बेटे का साथ दिया। बंधे कहते हैं कि मेरे माता-पिता ने हर कदम पर मेरा साथ दिया।
असफलताओं से मिली सीख:
- पहले प्रयास में प्रारंभिक परीक्षा पास नहीं कर सके।
- दूसरे प्रयास में मेन्स में असफल रहे।
- तीसरे और चौथे प्रयास में इंटरव्यू चरण तक पहुंचे लेकिन चयन नहीं हुआ।
- पांचवें प्रयास में उन्होंने 73वां सामान्य और आरक्षित श्रेणी में दूसरा स्थान हासिल किया।
नौकरी और तैयारी का संतुलन:
रायपुर में CGPSC कार्यालय में चपरासी की नौकरी करते हुए उन्होंने मेन्स और इंटरव्यू की तैयारी जारी रखी। शैलेन्द्र ने कहते हैं कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता, हर काम की अपनी गरिमा होती है।
सरकारी सेवा का सपना और प्रेरणा
शैलेन्द्र ने निजी क्षेत्र में आकर्षक नौकरी के अवसरों को ठुकराकर सरकारी सेवा को चुना। उनके इस फैसले की प्रेरणा उनके सीनियर से मिली, जिन्होंने CGPSC-2015 में सफलता पाई थी।
परिवार और सहयोगियों का योगदान
शैलेन्द्र के पिता संतराम बंधे ने उनके संघर्ष को देखा और उनकी मेहनत पर गर्व किया। शैलेंद्र के पिता कहते हैं कि मेरा बेटा उन सभी के लिए प्रेरणा है जो कड़ी मेहनत से अपने सपनों को साकार करना चाहते हैं। आलोचनाओं और तानों का सामना करते हुए भी शैलेन्द्र ने अपना आत्मविश्वास बनाए रखा।
शिक्षा और प्रेरणा
- गृह जिला: बिलासपुर, छत्तीसगढ़।
- स्कूलिंग: रायपुर।
- डिग्री: मैकेनिकल इंजीनियरिंग, एनआईटी रायपुर।
'असफलताओं से सीखें और कभी हार न मानें'
शैलेन्द्र की सफलता न केवल उनकी मेहनत की कहानी है, बल्कि यह उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है जो किसी भी परिस्थिति में अपने सपनों को पूरा करने का हौसला रखते हैं। शैलेन्द्र ने बताते हैं कि असफलताओं से सीखें और कभी हार न मानें।












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