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CG में पुलिस भर्ती घोटाला: आरक्षक ने की आत्महत्या,पूर्व CM भूपेश बघेल बोले- CBI जांच होनी चाहिए

Chhattisgarh Constable Recruitment Fraud: छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में एक पुलिस आरक्षक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। है। मृतक की पहचान अनिल रत्नाकर के रूप में की गई है, जिसने साल 2021 में पुलिस ज्वाइन की थी।

इस प्रकार राजनांदगांव में आरक्षक संवर्ग भर्ती प्रक्रिया के दौरान फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद पुलिस प्रशासन के कुछ अधिकारी और कर्मचारियों पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। इधर इस मामले में राजनीति भी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस घटना की जांच सीबीआई से करवाने की मांग की है।

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कांग्रेस नेता और पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा कि राजनांदगांव में ग्राम घोरदा के खेत में आरक्षक अनिल रत्नाकर की फांसी के फंदे से लाश लटकी मिली है।आरक्षक के तार पुलिस भर्ती घोटाले से जुड़े होना बताया जा रहा है। सवाल यह है कि क्या यह हत्या है या आत्महत्या?क्या इसमें कोई "बड़े खिलाड़ी" शामिल हैं?किसी और को बचाने के लिए किसी और की बलि ली जा रही है? इस घोटाले और हत्या की CBI जाँच मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी को करवानी चाहिए।

क्या है पूरा मामला?

मामला राजनांदगांव पुलिस रेंज की आरक्षक भर्ती से जुड़ा हुआ है, जो आठवीं बटालियन पेंड्री में आयोजित हो रही थी। इस भर्ती के दौरान एक अभ्यर्थी को गोला फेंक इवेंट में 11 की बजाय 20 अंक दे दिए गए, जबकि कुछ अभ्यर्थी जो गोला फेंक और लंबी कूद जैसी इवेंट्स में शामिल ही नहीं हुए थे, उन्हें भी अंक मिल गए। इसके अलावा, 30 अभ्यर्थियों के डेटा में भी संदिग्धताएं पाई गई हैं।

इसके बाद पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया है और अब इस मामले में भर्ती प्रक्रिया से जुड़े हर इवेंट के अधिकारी और कर्मचारियों की संलिप्तता की जांच की जा रही है। भर्ती प्रक्रिया के दौरान इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा था, और आरोप है कि इन उपकरणों से छेड़छाड़ की गई है।

फर्जीवाड़ा की पोल खुली, एक आरक्षक की आत्महत्या
इस विवादित भर्ती प्रक्रिया में जुड़े 14 आरक्षकों पर संदेह जताया जा रहा है, जिनमें से एक आरक्षक, अनिल रत्नाकर ने आत्महत्या कर ली। रत्नाकर, जो खैरागढ़ जिले के जालबांधा थाना में पदस्थ थे, 2021 में पुलिस में भर्ती हुए थे। वह इस भर्ती प्रक्रिया में ड्यूटी पर थे। आत्महत्या की घटना के बाद, खैरागढ़ पुलिस अधीक्षक त्रिलोक बंसल और राजनांदगांव के सीएसपी पुष्पेंद्र नायक ने इसकी पुष्टि की है।

घोटाले का खुलासा, जांच शुरू

डीएसपी तनुप्रिया ठाकुर, जो शारीरिक दक्षता परीक्षा के गोला फेंक इवेंट के प्रभारी थे, ने 14 दिसंबर को भर्ती ड्यूटी के दौरान गोला फेंक के रिजल्ट में गड़बड़ी देखी। रिपोर्ट के मुताबिक, एक अभ्यर्थी को गोला फेंक में 20 अंक दिए गए थे, जबकि किसी भी अभ्यर्थी को 20 अंक नहीं मिले थे। यह शंका के घेरे में आ गया, और मैनुअल रजिस्टर में भी गोला फेंकने का रिकॉर्ड सिर्फ 5.88 मीटर पाया गया।

फर्जीवाड़े के इस मामले की पुष्टि होते ही प्रशासन ने जांच तेज कर दी है और हर स्तर पर अधिकारियों की भूमिका की जांच की जा रही है। इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, और जांच के परिणामों का इंतजार किया जा रहा है।

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