पीएम सुरक्षा चूक: छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल ने क्यों दिलाई भाजपा को झीरम हमले की याद?
रायपुर, 7 जनवरी। पंजाब के फिरोजपुर में हो रही रैली में जाने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हुसैनीवाला के राष्ट्रीय शहीद स्मारक जा रहे थे कि तीस किलोमीटर पीछे फ्लाईओवर पर उनको रुकना पड़ा क्योंकि आगे किसान प्रदर्शनकारियों ने रास्ता जाम कर रखा था। ऐसा दावा किया जा रहा है कि फ्लाईओवर पर 15 मिनट तक प्रधानमंत्री का काफिला फंसा रहा और फिर यूटर्न लेकर वापस उनको बठिंडा एयरपोर्ट आना पड़ा जहां से वे दिल्ली लौट गए। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इसे सुरक्षा में भारी चूक बताते हुए कहा कि खराब मौसम की वजह से पीएम ने हवाई मार्ग से न जाकर सड़क मार्ग से जाने का फैसला लिया था। इस मामले पर भाजपा पंजाब की चन्नी सरकार और कांग्रेस पर हमलावर है। वहीं, मुख्यमंत्री चन्नी ने भी अपना पक्ष रखते हुए सुरक्षा में चूक की बात को खारिज किया। इस मामले में केंद्र और राज्य दोनों सरकारों ने जांच कमेटी का गठन कर दिया है। इस घटना पर भाजपा शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री भी कांग्रेस के खिलाफ बयान देने लगे तो कांग्रेस शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री भी इस सियासत का जवाब देने लगे। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस किया जिसमें उन्होंने कई सवाल दागने के साथ-साथ भाजपा को झीरम घाटी हमले की भी याद दिलाई जिसमें कांग्रेस के टॉप नेताओं समेत 29 लोगों की हत्या नक्सलियों ने कर दी थी। उस समय छत्तीसगढ़ में भाजपा की रमन सरकार थी।

झीरम घाटी में हुआ था कांग्रेस के काफिले पर नक्सली हमला
25 मई 2013 को सुकमा की चुनावी रैली से कांग्रेस नेताओं का काफिला जगदलपुर जा रहा था। छत्तीसगढ़ में चुनाव होना था और दस सालों से सत्तासीन भाजपा सरकार के खिलाफ कांग्रेस कमर कस रही थी। कांग्रेस के काफिले में पार्टी प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, नक्सलियों के खिलाफ सलवा जुडूम की लीडरशिप करने वाले महेंद्र कर्मा, वरिष्ठ नेता विद्याचरण शुक्ल समेत 200 लोग गाड़ियों से जगदलपुर की तरफ बढ़ रहे थे। झीरम घाटी से होकर यह काफिला शाम में करीब चार बजे गुजर रहा था कि नक्सलियों ने हमला कर दिया। आधिकारिक तौर पर इस हमले में 29 लोग मारे गए थे। बताया जाता है कि नक्सलियों का मुख्य निशाना महेंद्र कर्मा थे जिन्होंने सलवा जुडूम अभियान चलाया था। सलवा जुडूम अभियान के तहत महेंद्र कर्मा ने ग्रामीण इलाकों में ऐसा फोर्स तैयार किया था जो नक्सलियों का मुकाबला करता था। सलवा जुडूम की वजह से ही महेंद्र कर्मा नक्सलियों के टारगेट पर थे। झीरम घाटी के हमले में महेंद्र कर्मा को बहुत ही निर्ममता से मारा गया। इस हमले में प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं समेत 29 लोगों की हत्या हुई। नौ बार सांसद रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल भी काफिले पर हमले में घायल हुए थे लेकिन उन्होंने कुछ दिन बाद इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था।

भूपेश बघेल ने क्यों की झीरम हमले की चर्चा?
हुसैनीवाला जाते समय पीएम नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में चूक मामले पर जब भाजपा नेता पंजाब की कांग्रेस सरकार पर निशाना साधने लगी तो इसी दौरान ट्विटर पर प्रेसिडेंट रूल हैशटैग चला जिसमें पंजाब सरकार को बर्खास्त कर वहां राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग ट्वीट के जरिए होने लगी। इस पर सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि सोशल मीडिया में यह चल रहा कि पंजाब सरकार को बर्खास्त करो। झीरम घाटी में तो छत्तीसगढ़ कांग्रेस की पूरी पीढ़ी को खत्म कर दिया गया, यहां सुरक्षा दी जानी थी लेकिन भाजपा सरकार ने नहीं दी थी। उस वक्त तो भाजपा के मुख्यमंत्री से इस्तीफा नहीं मांगा गया था। पंजाब में जहां कुछ नहीं हुआ वहां बर्खास्त करने की बात कही जा रही है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीएम भूपेश बघेल ने पीएम से सवाल किया कि जान का खतरा था तो आपने पाकिस्तान सीमा से दस किलोमीटर दूर बने सड़क मार्ग से जाने की जानकारी क्यों नहीं दी? उन्होंने पीएम की सुरक्षा में लगी एसपीजी और खुफिया एजेंसियों पर भी सवाल उठाया। इस पर छत्तीसगढ़ भाजपा नेता राजेश मूणत ने ट्वीट कर कहा कि झीरम घाटी के सबूत अपने पास होने की बात करने वाले भूपेश बघेल 3 साल हो गया इस मुद्दे पर राजनीतिक रोटियां सेंकते हुए, जब दस्तावेज हैं तो उसे सार्वजनिक क्यों नहीं करते। शहीद हुए लोग आपके पार्टी के नेता तो बाद में थे सबसे पहले वो छत्तीसगढ़ के नेता थे।

कहां तक पहुंची झीरम हमले की जांच?
2013 में हुए झीरम हमले की जांच रिपोर्ट आठ साल बाद नवंबर 2021 में छत्तीसगढ़ की राज्यपाल अनुसुईया उइको को सौंपी गई। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि अभी झीरम हमले की जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया जएगा। राजभवन से यह रिपोर्ट प्रदेश सरकार को मिली है लेकिन यह रिपोर्ट अभी अधूरी है जिस वजह से सरकार इसको सार्वजनिक नहीं करेगी। इस अधूरी जांच रिपोर्ट को पूरा करने के लिए दो सदस्यीय समिति का गठन किया गया है जो अन्य बिंदुओं पर भी आगे छानबीन करेगी। बहरहाल, झीरम हमला की याद दिलाकर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भाजपा को यह बताना चाहते हैं कि सुरक्षा चूक का बड़ा मामला छत्तीसगढ़ के इतिहास में तब हुआ था जब यहां भाजपा की सरकार थी। प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक मामले पर देश की सियासत गरमाई हुई है और भाजपा-कांग्रेस एक दूसरे पर निशाना साध रही है। लेकिन अभी इस मामले में कुछ भी स्पष्ट नहीं है कि चूक आखिर हुई कहां, एसपीजी या खुफिया एजेंसियों की गलती है या फिर पंजाब पुलिस की, इसकी जांच की जा रही है, रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ पता चल पाएगा।












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