राष्ट्रीय जनजातीय साहित्य महोत्सव का शुभारंभ, आदिवासी धुन पर जमकर थिरके छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल
आदिवासी धुन पर जमकर थिरके छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल
रायपुर, 19 अप्रैल। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में मंगलवार से तीन दिनों तक चलने वाले राष्ट्रीय जनजातीय साहित्य महोत्सव का शुभारंभ किया। इस महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर प्रख्यात बस्तर बैंड की प्रस्तुति हुई। पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ जनजातीय समुदाय के बस्तर बैंड ने अपनी शानदार प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया ,इसी दौरान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी मुंडा बाजा से थाप देते बस्तर बैंड के कलाकारों के साथ ताल से ताल मिलाया।
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तीन दिनों तक चलेगा राष्ट्रीय जनजातीय साहित्य महोत्सव
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में मंगलवार से देशभर के जनजातीय साहित्यकारों का कुंभ शुरू हो चूका है। 19 से 21 अप्रैल तक रायपुर के पंडित दीनदयाल आडिटोरियम में चलने वाले राष्ट्रीय जनजातीय साहित्यकार महोत्सव में हर दिन जनजातीय नृत्य प्रदर्शन और कला और चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया जायेगा । इसके अतिरिक्त पुस्तक मेला और कई अन्य विभागों की प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएंगी ।

बस्तर बैंड में दिल जीता
जिस बस्तर बैंड की प्रस्तुति ने मुख्यमंत्री भूपेस बघेल और उनके मंत्रियो को थिरकने पर मजबूर कर दिया ,वह बस्तर बैंड अपनी अलग ही पहचान रखता है। ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के प्रसिद्द बस्तर बैंड की स्थापना अनुप रंजन पाण्डेय ने की थी । आज बस्तर बैंड को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचाना जाता है। इस बैंड में चार वर्ष के बच्चे से लेकर 77 साल तक के उम्रदराज कलाकार भी शामिल हैं। कला की दुनिया में अपना अमूल्य योगदान देने के लिए अनुप रंजन पाण्डेय को पद्मश्री पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है। बस्तर बैंड के कलाकार विभिन्न जनजातीय समुदाय से हैं। यह कलाकार वाद्य यंत्रों को बजाने के अलावा इन वाद्य यंत्र के निर्माण में पारंगत हैं ।

नक्सलियों से लोगो का डर खत्म हुआ
जनजातीय वर्ग के इस महाकुम्भ को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि नक्सलियों के डर से पहले लोग छत्तीसगढ़ आने से डरते थे किन्तु अब उनका डर अब खत्म हो गया है। सीएम भूपेश बघेल ने आगे कहा की राज्य की विलुप्त हो रही संस्कृति,लोक नृत्य और भाषा को बचाना हमारा मकसद है। उन्होंने कहा कि यह महोत्सव आदिवासी को मुख्य धारा में लाने में सेतु का काम करेगा और आदिवासियों को जमीन, जंगल, शिक्षा का अधिकार दिलावा पाएंगे।
सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पिछले तीन वर्षाें में नक्सली समस्या कम हुई है। अब छत्तीसगढ़ की चर्चा देश-दुनिया में यहां की समृद्ध संस्कृति के लिए हो रही है। हमारी सरकार ने जनजातियों की संस्कृति और सभ्यता के संरक्षण के लिए आदिवासी नृत्य महोत्सव का आयोजन कराया, जिसका स्वरूप अंतर्राष्ट्रीय हो गया। इससे देश-दुनिया के लोगों को छत्तीसगढ़ को जानने और समझने का मौका मिला। उन्होंने कहा कि चिंता का विषय है कि विश्व में बहुत सी जनजातियों का अस्तित्व समाप्त हो रहा है, जिससे उनकी संस्कृति विलुप्त हो रही है। बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने जनजातीय संस्कृति के संरक्षण के लिए स्कूली स्तर भी पहल की है।

10 राज्यों के विशेषज्ञ प्रस्तुत करेंगे शोध
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित इस जनजातीय महोत्स्व में 10 प्रदेशों के विद्वानों की तरफ से जनजातियाें के विकास पर शोध पत्र प्रस्तुत किया जाएगा। जनजातियों के समग्र विकास के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने जनजातीय साहित्य महोत्सव आयोजित किया है। तीन दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में छत्तीसगढ़ के अलावा झारखंड, महाराष्ट्र, मेघालय, पश्चिम बंगाल, आंध्रप्रदेश,मध्यप्रदेश, तेलंगाना, अरुणांचल प्रदेश और कर्नाटक से विद्वान और प्रतिष्ठित साहित्यकार जानकारी देंगे ,वहीं जनजातियों के विकास जुड़े 80 शोधपत्र, 28 प्रोफेसरों के अनुसंधान, 74 रचनाकारों के साहित्य को पढ़ा जायेगा।
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