महाराष्ट्र के लिए छत्तीसगढ़ में कोयला खनन करने का रास्ता साफ़
महाराष्ट्र को कोयला खनन करने छत्तीसगढ़ सरकार से मिली हरी झंडी
रायपुर, 19 अप्रैल। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में महाराष्ट्र सरकार की तरफ से कोयला खनन करने का रास्ता साफ़ हो गया है। छत्तीसगढ़ सरकार ने रायगढ़ वन मंडल के गारे पेलमा सेक्टर-2 खुली कोयला खदान खनन परियोजना के वनभूमि डायवर्जन की स्वीकृति के लिए भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को अनुशंसा पत्र भेज दिया है।इस प्रकरण में महाराष्ट्र स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी लिमिटेड गारे पेलमा कोल माईन्स सेक्टर-2 विद्युत भवन, कटोल रोड नागपुर की तरफ से व्यपवर्तन के लिए 214.869 हेक्टेयर वनभूमि का विवरण दर्शाया गया है, जो आवेदक और वन मंडलाधिकारी रायगढ़ की तरफ से हस्ताक्षरित है। इस परियोजना की कुल लागत 300 लाख करोड़ रूपए आंकी गई है। इसमें वन विभाग रायगढ़ की तरफ से प्रस्ताव को परीक्षण के बाद स्वीकृति योग्य माना गया है।

छत्तीसगढ़ सरकार से मिली हरी झंडी
यह पत्र छत्तीसगढ़ के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की तरफ से मेसर्स महाराष्ट्र स्टेट पावर कंपनी लिमिटेड गारे पेलमा कोल माईन्स सेक्टर-2 विद्युत भवन, कटोल रोड नागपुर से मिले आवेदन पर सभी औपचारिकताएं और निर्धारित 44 बिन्दुओं की शर्तों और विवरणों को पूरा करके भेजा गया है। गौरतलब है कि महाराष्ट्र के ऊर्जा मंत्री नितिन राउत ने 18 अप्रैल को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मुलाकात करके गारे पेलमा सेक्टर-2 कोल ब्लॉक के क्लीयरेंस के लिए जल्द मदद करने की अपील की थी। गारे पेलमा सेक्टर-2 रायगढ़ जिले में स्थित है,जिसे केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र की विद्युत कंपनी को आबंटित किया है।

बड़े पैमाने पर करना होगा विस्थापन
अगर सरकार रायगढ़ में महाराष्ट्र और गुजरात को खनन के लिए क्लीयरेंस दे देती है, तो गाँवो को बड़े पैमाने पर विस्थपित करना पड़ेगा। गारे पेलमा सेक्टर-2 कोल ब्लॉक के लिए लगभग 6 हजार 570 एकड़ जमीन में खनन प्रस्तावित है। इसके तहत तमनार ब्लॉक के 26 गांवोंं के लगभग 5 हजार से भी अधिक किसानों की खेतिहर जमीन ली जानी है।इसके अलावा कुछ अन्य गांवों पर विस्थापन का भी संकट है। परियोजना आवंटन के प्रारंभ में ग्रामीणों ने कड़ा विरोध किया था।

कोयला खनन नदियों पर पड़ेगा दुष्प्रभाव
वहीं महाराष्ट्र को मिली 22 लाख मीट्रिक टन हर साल उत्पादन क्षमता वाली गारे पेलमा सेक्टर-2 खदान रायगढ़ के तमनार इकाई में है। यह क्षेत्र पूर्व से ही बेहद अधिक खनन और बिजली उत्पादन गतिविधियों से प्रभावित है। इस खदान को शुरू करने के लिए 214.869 हेक्टेयर वन भूमि को डाइवर्ट किया जायेगा। साल 2021 में छत्तीसगढ़ का वन विभाग वन भूमि के डाइवर्जन की अनुशंसा कर चुका है। इस खदान के चालू शुरू होने की वजह से पूरे इलाके में करीब 100 हेक्टेयर संरक्षित वन क्षेत्र खत्म हो जाएगा। वहीं इससे केलो नदी और महानदी पर भी दुष्प्रभाव बढ़ेगा।

राजस्थान को मिल चुकी है मंजूरी
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने राजस्थान के बिजली विभाग के लिए छत्तीसगढ़ में कोल ब्लॉक आवांटित की हैं, खदानों में खनन कार्य शुरू करने के लिए छत्तीसगढ़ से पर्यावरणीय स्वीकृति नहीं मिली थी,जिससे राजस्थान को कोयला नहीं मिल पा रहा था । लेकिन हाल ही में राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत के छत्तीसगढ़ प्रवास के बाद स्वीकृति मिल गई। साल 2015 में छत्तीसगढ़ के सरगुजा में स्थित परसा ईस्ट-कांटा बासन में 4340 मेगावाट बिजली उत्पादन इकाइयों के लिए 15 MTPA और परसा में 5 MTPA क्षमता के कोयला खदान को केंद्र से अनुमति मिलने के बाद भी भूपेश बघेल सरकार की ओर से स्वीकृति नहीं दी गई थी
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