छत्तीसगढ़: हसदेव अरण्य के बाद अब गारे पेलमा में भी मिल सकती है कोयला खनन को मंजूरी ?
छत्तीसगढ़:गारे पेलमा में भी मिल सकती है कोयला खनन को मंजूरी ?
रायपुर, 18 अप्रैल। छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार इस असंजस में है कि वह पर्यावरण बचाये या राज्यों को आबंटित कोयला खदानों पर उन्हें काम करने दे। हाल ही में राजस्थान सरकार को छत्तीसगढ़ ने सरगुजा में आबंटित कोयला खदान में खनन की स्वीकृति दी है। इस फैसले के बाद अब भूपेश बघेल सरकार पर अन्य राज्यों की तरफ से भी दबाव भी बढ़ने लगा है। सोमवार को महाराष्ट्र के ऊर्जा मंत्री नितिन राउत ने रायपुर पहुंचकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मुलाकात की । इस दौरान उन्होंने रायगढ़ की गारे पेलमा सेक्टर-2 कोल ब्लॉक में खनन की अनुमति मांगी है।

नितिन राउत ने की सीएम भूपेश से मुलाकात
सोमवार को रायपुर स्थिति सीएम हाउस में महाराष्ट्र के उर्जा मंत्री नितिन राउत ने सीएम भूपेश बघेल को बताया, महाराष्ट्र विद्युत उत्पादन कंपनी को छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले की गारे पेलमा सेक्टर-2 कोल ब्लॉक आवंटित है। इस कोयला खदान से मिलने वाले कोयले से महाराष्ट्र में बिजली का उत्पादन किया जाना है। महाराष्ट्र के उर्जा मंत्री ने सीएम भूपेश बघेल से कोल ब्लाक से जुड़ी सभी औपचारिकताओं को शीघ्र पूर्ण कराने का आग्रह किया।
राउत ने मुख्यमंत्री बघेल से गारे पेलमा की कोल ब्लाक के लिए वन भूमि के डाइवर्जन और छत्तीसगढ़ सरकार की अनुशंसा का अनुरोध भी किया। मिली जानकारी के मुताबिक सीएम भूपेश ने राउत को क्लीयरेंस के लिए नियमो के मुताबिक यथासंभव जल्द मदद करने का आश्वासन दिया है। इस बैठक के बाद जल्द ही गुजरात सरकार भी छत्तीसगढ़ सरकार से सम्पर्क करने वाली है,क्योंकि उसे भी केंद्र सरकार से गारे पेलमा-1 कोल ब्लॉक आवंटित है।

बड़े पैमाने पर करना होगा विस्थापन
अगर सरकार रायगढ़ में महाराष्ट्र और गुजरात को खनन के लिए क्लीयरेंस दे देती है, तो गाँवो को बड़े पैमाने पर विस्थपित करना पड़ेगा। गारे पेलमा सेक्टर-2 कोल ब्लॉक के लिए लगभग 6 हजार 570 एकड़ जमीन में खनन प्रस्तावित है। इसके तहत तमनार ब्लॉक के 26 गांवोंं के लगभग 5 हजार से भी अधिक किसानों की खेतिहर जमीन ली जानी है।इसके अलावा कुछ अन्य गांवों पर विस्थापन का भी संकट है। परियोजना आवंटन के प्रारंभ में ग्रामीणों ने कड़ा विरोध किया था।

कोयला खनन नदियों पर पड़ेगा दुष्प्रभाव
वहीं महाराष्ट्र को मिली 22 लाख मीट्रिक टन हर साल उत्पादन क्षमता वाली गारे पेलमा सेक्टर-2 खदान रायगढ़ के तमनार इकाई में है। यह क्षेत्र पूर्व से ही बेहद अधिक खनन और बिजली उत्पादन गतिविधियों से प्रभावित है। इस खदान को शुरू करने के लिए 214.869 हेक्टेयर वन भूमि को डाइवर्ट किया जायेगा। साल 2021 में छत्तीसगढ़ का वन विभाग वन भूमि के डाइवर्जन की अनुशंसा कर चुका है। इस खदान के चालू शुरू होने की वजह से पूरे इलाके में करीब 100 हेक्टेयर संरक्षित वन क्षेत्र खत्म हो जाएगा। वहीं इससे केलो नदी और महानदी पर भी दुष्प्रभाव बढ़ेगा।

राजस्थान को मिल चुकी है मंजूरी
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने राजस्थान के बिजली विभाग के लिए छत्तीसगढ़ में कोल ब्लॉक आवांटित की हैं, खदानों में खनन कार्य शुरू करने के लिए छत्तीसगढ़ से पर्यावरणीय स्वीकृति नहीं मिली थी,जिससे राजस्थान को कोयला नहीं मिल पा रहा था । लेकिन हाल ही में राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत के छत्तीसगढ़ प्रवास के बाद स्वीकृति मिल गई। साल 2015 में छत्तीसगढ़ के सरगुजा में स्थित परसा ईस्ट-कांटा बासन में 4340 मेगावाट बिजली उत्पादन इकाइयों के लिए 15 MTPA और परसा में 5 MTPA क्षमता के कोयला खदान को केंद्र से अनुमति मिलने के बाद भी भूपेश बघेल सरकार की ओर से स्वीकृति नहीं दी गई थी
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