जानिए कौन हैं यशोदा वर्मा? जिन्होंने जीता छत्तीसगढ़ का खैरागढ़ उपचुनाव
रायपुर,16 अप्रैल। छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ उपचुनाव में बड़ी जीत दर्ज करने वाली कांग्रेस प्रत्याशी यशोदा वर्मा का नाम चर्चाओं में बना हुआ है। खैरागढ़ सीट जोगी कांग्रेस से विधायक रहे देवव्रत सिंह के निधन के बाद खाली थी। इस चुनाव में कांग्रेस की महिला प्रत्याशी यशोदा वर्मा ने भाजपा के कोमल जंघेल को 20 हजार से भी अधिक वोटों से हरा दिया है। आइये जानते हैं कौन है यशोदा वर्मा।
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सरपंच से विधायक तक का सफर
खैरागढ़ उपचुनाव की घोषणा के बाद से ही सबकी इस बात पर नजर बनी हुई थी कि सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी किसे टिकट देगी ,क्योंकि इस सीट से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की प्रतिष्ठा जुडी हुई थी। यशोदा वर्मा खैरागढ़ में कांग्रेस की ब्लॉक अध्यक्ष हैं। वह राजनांदगांव जिला पंचायत की सदस्य भी रह चुकी हैं। इसके अलावा वह जनपद पंचायत सदस्य और अपने गांव में सरपंच रह चुकी हैं।

24 नामों को पछाड़कर पाया टिकट
जब खैरागढ़ के लिए कांग्रेस की चुनाव समिति की प्रत्याशियों के नाम पर विचार कर रही थी ,तब बैठक में 24 दावेदारों के नाम सामने आए थे। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उपस्थिति में इन सभी नामों पर चर्चा हुई थी। बाद में कांग्रेस की चुनाव समिति ने 7 नामों को शार्ट लिस्ट किया था,जिसमे पूर्व विधायक गिरवर जंघेल, दशमत जंघेल , ममता पाल और पदम कोठारी जैसे बड़े नाम भी शामिल थे। छत्तीसगढ़ कांग्रेस की तरफ से इन सभी नामों को कांग्रेस केंद्रीय चुनाव समिति दिल्ली ,भेजा गया था। कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति के प्रभारी मुकुल वासनिक ने यशोदा वर्मा का नाम फ़ाइनल किया था।

पुरुष प्रत्याशियों को दी पटखनी
देवव्रत सिंह के निधन के बाद खाली हुई खैरागढ़ विधानसभा सीट से उनकी पूर्व पत्नी पद्मा सिंह और उनकी पत्नी विभा सिंह के बीच राजपरिवार पर उनके हक और सीट पर दावेदारी से उपजे विवाद को देखते हुए यह माना जा रहा था कि अगर दिवंगत विधायक की कोई पत्नी चुनावी मैदान पर उतरती है, तब भाजपा और कांग्रेस समेत अन्य दलों को भी महिला प्रत्याशी को ही मैदान में उतारना पड़ेगा,लेकिन किसी भी पार्टी ने राजपरिवार के किसी व्यक्ति के चुनाव नहीं लड़ने के कारण भाजपा और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ ने पुरुष प्रत्याशियों पर भरोसा किया, लेकिन कांग्रेस ने अपना मन नहीं बदला और महिला आरक्षित सीट ना होने के बावजूद यशोदा वर्मा को चुनावी मैदान पर उतरा।

रमन,भूपेश की प्रतिष्ठा लगी थी दांव पर
खैरागढ़ उपचुनाव ना केवल वहां से नामांकन दाखिल करने वाले प्रत्याशियों ने लड़ा , बल्कि छत्तीसगढ़ के मौजूदा मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह भी लड़ा यानी इस चुनाव में दोनों नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई थी । इसकी वजह भी बेहद ही साफ थी । छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद हुए चित्रकोट, मरवाही और दंतेवाड़ा उपचुनाव में कांग्रेस ने जीत हासिल की थी । मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कि अगुवाई में कांग्रेस किसी भी सूरत में अपनी जीत का सिलसिला जारी रखना चाहती थी । यही वजह रही कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने खुद चुनावी कमान संभलकर रखी हुई थी और खैरागढ़ को जिला बनाने का वादा जनता से किया था ,जो काम कर गया।
वहीं खैरागढ़ रियासत जो राजनांदगांव जिले में आती है, उस राजनांदगांव सीट से पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह विधायक हैं। इतनी ही नहीं खैरागढ़ से लगा हुआ कवर्धा भी डॉ. रमन सिंह का गृह नगर होने के नाते उनके प्रभाव वाला क्षेत्र है, लिहाजा खैरागढ़ उपचुनाव को छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम और मौजूदा सीएम के बीच की जंग के तौर पर देखा गया। इस पुरे चुनाव के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने लगातार चुनावी मोर्चा संभाले रखा।
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