जशपुर में रेल सेवा प्रोजेक्ट सुस्त, 300 बच्चों ने पीएम मोदी को भेजा पोस्टकार्ड, सांसद गोमती साय ने की थी मांग

सरगुजा सँभाग के जशपुर जिले में जर्जर सड़कों के कारण लोगों को यातायात में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। जशपुर रेल मार्ग प्रोजेक्ट की शुरुआत नहीं होने पर जिले के लगभग 300 बच्चों ने पीएम मोदी को पोस्टकार्ड भेजा है।

jashpur postcard

छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में रेल सेवा की मांग आजादी बाद से लगातार की जा रही है। लेकिन अब तक सुदूर वनांचल और आदिवासी बाहुल्य जशपुर जिले को यह सुविधा नहीं मिल सकी है। लेकिन क्षेत्र की सांसद गोमती साय ने लगातार यह मांग लोकसभा में रखी है। इसके साथ साथ अब इस मांग को लेकर बच्चों ने भी मुहिम शुरू कर दी है। जशपुर के 300 से अधिक स्कूली बच्चों ने पीएम नरेंद्र मोदी को पोस्टकार्ड भेजकर जल्द ट्रेन शुरू करने की मांग की है।

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जशपुर के बच्चों ने इसलिए भेजा पीएम मोदी को पत्र
दरअलस सरगुजा सँभाग के जशपुर, कोरिया जिले में जर्जर सड़कों के कारण लोगों को यातायात में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। यहां लोगों को परिवहन और यात्रा के लिए सड़क मार्ग ही सहारा है। अन्य जिलों व अन्य राज्यों में यात्रा के लिए मुसाफिरों को मनेंद्रगढ़ या फिर सीधे रायपुर जाकर ट्रेन पर सफर करना होता है। अब तक जशपुर रेल मार्ग प्रोजेक्ट की शुरुआत नहीं होने पर जिले के लगभग 300 बच्चों ने पीएम मोदी को पोस्टकार्ड भेजा है। जिसमें रेल लाइन की मांग की है।
gomti sai

तीन बार सर्वे के बाद भी नहीं शुरू हुआ काम
जानकार बताते हैं कि इस रेल लाइन का पहले भी 3 बार सर्वे किया जा चुका है। जिसमे काम की शुरुआत नहीं की गई। जब 2019 में पहली बार सांसद बनने के बाद गोमती साय ने इस मुद्दे को संसद में उठाया। उसके बाद नई रेल लाइन के लिए भू-तकनीकी जांच, फील्ड विवरण तैयार करने की प्रक्रिया की शुरुआत हुई थी। इसका सर्वे सबसे पहले 1970 में, दूसरी बार 1980 में और तीसरी बार यूपीए सरकार में किया गया। जबकि झारखंड के गुमला जिले और छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ होते हुए कोरबा तक रेल लाइन के विस्तार का काम पूरा हो चुका है। अब सिर्फ लोहरदगा से धरमजयगढ़ के बीच का काम बाकी है।

रेल मंत्रालय ने जारी किया था टेंडर

जनप्रतिनिधियों के माध्यम से जशपुर में लंबे समय से कोरबा-लोहरदगा और अंबिकापुर-झारसुगड़ा रेल लाइन की मांग की जा रही है। कोरबा-लोहरदगा रेल लाइन के लिए सर्वे को भी स्वीकृति सितम्बर माह में मिल चुकी है। मोदी सरकार के रेल मंत्रालय ने इसके लिए 8 करोड़ का टेंडर भी जारी किया है। वहीं स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी लोगों को जल्द कार्य शुरू होने का आश्वासन दिया है। इस प्रोजेक्ट में देरी की वजह से लोगों में काफी आक्रोश है। क्योंकि ट्रेन आने से क्षेत्र का विकास होगा। यातायात की सुविधाएं बढ़ेंगी।

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