Jashpur Naglok: बच्चे ने गुस्से में कोबरा को काटा, सांप की मौत, तपकरा में पाए जाते हैं जहरीले सांप
Chhattisgarh के जशपुर जिले का तपकरा वन परिक्षेत्र नागलोक के नाम से जाना जाता है। यहां सर्प की 60 से अधिक प्रजातियां पाई जाती है। जिसके कारण यहां सर्पदंश के बहुत से मामले आते हैं। आपने हमेशा सांप के काटने से लोगों की मौत होने की बातें सुनी होगी । लेकिन जशपुर जिले अजीबो गरीब मामला सामने आया है। यहां एक बच्चे ने गुस्से में आकर एक कोबरा को ही काट लिया। जिससे कोबरा बुरी तरह घायल हो गया।

बहन के घर खेलने पहुंचा था दीपक, फिर सांप ने काटा
जशपुर जिले के बगीचा ब्लॉक में तपकरा वन परिक्षेत्र के ग्राम पंडरापाठ में पहाड़ी कोरवा बहुतायत संख्या में निवास करते हैं। यहां एक पहाड़ी कोरवा बालक दीपक राम अपने घर से कुछ दूरी पर बहन के यहां पर खेलने पहुंचा था। खेलने के दौरान एक कोबरा ने उसके हाथ में काट लिया। सांप के काटने के बाद निडर बालक दीपक को गुस्सा आ गया। इससे पहले की सांप वहां से कहीं दूर भाग पाता, दीपक ने उसे पकड़कर अपने दांतों से काट लिया।

दीदी ने दीपक को पहुंचाया अस्पताल, स्वस्थ है दीपक
दरअसल इस घटना के बाद 8 साल के बच्चे दीपक ने अपनी दीदी को यह बात बताई की खेलने के दौरान एक सांप ने उसे आकर काट लिया। जिससे उसे गुस्सा आया और उसने भी सांप को काट दिया। घबराकर दीदी ने तुरंत अस्पताल पहुंचाया। जहां एंटी वेनम का इंजेक्शन लगाने के बाद दीपक को घर भेज दिया गया। दीदी ने बताया कि बच्चे घर में खेल रहे थे उस वक्त वह बाहर पानी लेने गई हुई थी। तभी दीपक ने आकर बताया।

बच्चे को इसलिए आया गुस्सा, सांप से लिया बदला
दरअसल हर बार सांप लोगों को काटता है। जिसे लोगों की मौत की खबर सामने आती है लेकिन इस बार सांप ने दीपक को काटा तो इसका बदला 8 वर्षीय दीपक ने सांप को की काट लिया। ग्राम पंडरापाठ निवासी दीपक ने बताया कि जब उन्होंने सांप को पकड़ा तो सर्प ने भी दीपक के हाथों को बुरी तरह जकड़ लिया था जिस दीपक को गुस्सा आया और दीपक ने भी सांप को काटकर बुरी तरह घायल कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई।

नागलोक के नाम से मशहूर है तपकरा क्षेत्र
जशपुर जिले के तपकरा वन परिक्षेत्र का वातावरण सर्पों के लिए अनुकूल है। यहाँ की भुरभुरी मिट्टी और आबोहवा से सर्पो में वृद्धि होती है। जिसके चलते यहां जहरीले कोबरा के चार, और करैत की तीन प्रजातियां पाई जाती है। यहां बहुत जल्द स्नैक पार्क और सर्प विष संग्रहण केंद्र की शुरुआत होने जा रही है। यहां एक गुफा है जिसे नागलोक का मुख्य द्वार माना जाता है। जहां पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है।

सर्पदंश से जिले में लगभग 630 लोगों की मौत
यहाँ के रहवासी सर्पो को नुकसान नहीं पहुंचाते। इसके अलावा यहां के अधिकतर पहाड़ी कोरवा परिवार के बच्चे भी सांप पकड़ने में माहिर है। जिसके चलते बच्चों को सांपो से खेलते देखा जा सकता है। वहीं जिला प्रशासन वन विभाग इन्हें सर्पों के संरक्षण के लिए जागरूक करता है। वहीं दूसरी ओर सर्पदंश से जिले में 15 सालों में लगभग 630 लोगों की मौत हो चुकी है।अधिकतर मौतें पिड़ितों को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाने और झाड़फुंक करने की वजह से होती हैं।
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